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किसानों ने पुलवामा के शहीदों के लिए सुबह मौन रखा, शाम को कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि

Mon, 15 Feb 2021 12:14 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2021 12:14 AM IST
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farmers protest, pulwama attack, candle march
कुंडली बॉर्डर पर मंच पर मोमबत्ती व फूल लेकर खड़े किसान नेता - फोटो : Sonipat
सोनीपत। कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर रविवार को किसानों ने पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह को दो मिनट का मौन रखा तो वहां शाम को कैंडल मार्च निकाला गया। वहां किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों को भी श्रद्धांजलि दी गई। किसान संगठनों के नेताओं ने धरनास्थल पर मौजूद हर ट्राली के पास पहुंचकर किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए अभियान चलाया गया। उनसे कहा गया कि यह आंदोलन अभी लंबा चलने वाला है और वह इस धैर्य के साथ ही आंदोलन जारी रखेंगे तो उनकी जीत जरूर होगी।
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कुंडली बॉर्डर पर रविवार को पुलवामा हमले में शहीद होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। जहां मंच पर सुबह को शहीदों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया और उन शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनकी शहादत को देश कभी नहीं भुला सकता है। वह एक इतिहास में दर्ज हो गया है कि किस तरह से अपनी शहादत देकर जवानों ने देश की रक्षा की। उसके बाद दिनभर आंदोलन को लेकर धरनास्थल पर मौजूद किसानों को बताया गया तो वहां शाम को किसानों ने एक हाथ में फूल व दूसरे हाथ में मोमबत्ती लेकर मार्च निकाला। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि देश की रक्षा में सीमा पर सबसे ज्यादा किसानों के बेटे हैं और वह देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक देने में पीछे नहीं हटते हैं। जहां खेत में किसान अन्न उगाकर देश का पेट भरता है तो वहीं उनके बेटे सीमा पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं। इस तरह से किसान व जवान दोनों ही देश के लिए हमेशा जुटे रहते हैं।
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किसानों का मनोबल बढ़ाने को हर ट्राली तक पहुंचे किसान नेता
कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर रविवार को किसान नेताओं ने किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए अभियान चलाया। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, बलदेव सिंह समेत अन्य ने ट्रालियों के पास पहुंचकर किसानों से बातचीत की। किसानों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि गया कि इस आंदोलन को लंबा खींचकर सरकार उनका मनोबल तोड़ना चाहती है, लेकिन किसानों को धैर्य बनाए रखना है और उनको आंदोलन में डटे रहना है। किसान शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करते रहेंगे और यहां से नहीं हटेंगे तो सरकार को जरूर झुकना पड़ेगा।
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