फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   farmers protest, cold season

खुले आसमान के नीचे सबसे सर्द रात भी नहीं तोड़ सकी किसानों का हौसला, रिकार्ड 2.5 डिग्री तापमान में डटे हैं किसान

Wed, 30 Dec 2020 11:32 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 11:32 PM IST
विज्ञापन
farmers protest, cold season
कुंडली बॉर्डर धरना स्थल पर अलाव जलाकर ठंड दूर करने का प्रयास करते किसान। - फोटो : Sonipat
सोनीपत। खुला आसमान और तेज हवाओं के बीच जमा देने वाली ठंड में भी किसान पूरे हौसले के साथ धरना स्थल पर डटे हैं। महज 2.5 डिग्री तापमान में भी उनका आंदोलन अडिग है। किसानों के लिए शामियाने और ट्रैक्टर-ट्राली व टैंट ही अब उनका घर है। ठंड से बचने के लिए रजाई-गद्दों के साथ ही रात भर जलने वाला अलाव ही उनका सहारा है। इसके बावजूद हर किसान की जुबान पर एक ही बात है कि तीन काले कानून रद्द कराए बिना उनकी घर वापसी नहीं होगी।
विज्ञापन

दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में ठंड अपने चरम पर पहुंच चुकी है। बुधवार को इस सीजन का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा और न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री तक आ पहुंचा। उसके बावजूद किसानों के हौसले बुलंदी पर हैं। देश के कई राज्यों के हजारों किसान खुले आसमान के नीचे अपने आशियानों में डटे हैं। शामियाना हो या ट्रैक्टर ट्राली में बना तंबू या फिर पंजाब से पहुंचे वाटरप्रूफ टेंट अब किसानों की रात उन्हीं में बीत रही है। ठंड अपने चरम पर पहुंच चुकी है, लेकिन किसानों का हौसला अडिग है। इन किसानों में युवा ही नहीं बुजुर्ग, महिलाएं व उनके बच्चे भी शामिल है। तीन कानूनों पर सभी का सुर एक हो जाता है। वह कहते हैं कि कानून वापस होंगे तभी उनकी वापसी होगी।
विज्ञापन

रात को ट्रैक्टर-ट्राली में लेटे 78 साल के किसान बलकार सिंह ठंड से बचने के लिए खुद को कपड़ों में लपेटे थे। वह नीचे गद्दा बिछाने के साथ ही दो रजाई लेकर लेटे हुए थे, लेकिन उनका हौंसला जीवंत था। उनकी जुबान पर एक ही बात थी, यहां तापमान इससे भी कम हो जाए तो भी गया तो भी वह यहां से तीन कानून रद्द कराए बिना नहीं लौटेंगे। 74 साल के बलविंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उन पर तीन कानून थोपकर अत्याचार कर रही है, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं है। इसके लिए उनकी जान भी चली गई तो भी उनका मनोबल कम नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रात भर जलता रहता है अलाव, गर्म कपड़ों का सहारा
कडाक़े की ठंड से बचने के किसान रात भर अलाव जलाकर लेटे रहते हैं। किसान चरणजीत सिंह ने बताया कि कई बार रात को ठंड ज्यादा परेशान करने लगती है। ऐसे में ट्राली से बाहर जल रहे अलाव के पास जाकर शरीर को तापते हैं। वह अपनी जान देने को तैयार है, लेकिन आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए पीछे नहीं हटेंगे। किसानों के चेहरे पर सिकन नहीं आती। बच्चे रात को गर्ग कपड़ों में लिपटकर सोते हैं। अब जहां लोग घरों के अंदर रजाई के साथ ही हीटर जलाकर खुद को ठंड से बचा रहे हैं, ऐसे में किसानों को शामियाना के अंदर रात बिताना लगातार कठिन साबित हो रहा है। फिर भी किसान अपने आंदोलन को फीका नहीं पड़ने दे रहे हैं।
किसान ठंड में घबराकर वापस जाने वाला नहीं हैं। अगर जान भी देनी पड़ेगी तो भी किसान वापस नहीं जाएगा। तीन कानून किसान के हक में नहीं हैं। जिसके खिलाफ वह सडक़ पर बैठे हैं। अब अगर तापमान इससे भी कम हो गया तो भी किसान यहीं पर डटा रहेगा।
अमरजीत सिंह बालियां, लुधियाना, पंजाब
ठंड किसान का हौसला कमजोर नहीं कर सकती। मैं किसान आंदोलन में लंगर की सेवा कर रहा हूं। रात ट्रैक्टर-ट्राली में गुजरती है। दो रजाई ओढर्क ठंड से बचने का प्रयास करता हूं। पास ही अलाव जलाकर रखते हैं। वापस तब जाऊंगा जब केंद्र सरकार तीन कानूनों को रद्द कर देगी।

मलकीत सिंह।
ठंड किसानों का हौसला कमजोर नहीं कर सकती। केंद्र सरकार किसानों का इम्तहान ले रही है। हम किसान हैं, रातभर खेत में पानी के अंदर रहकर भी अपनी फसल को उगाते हैं तो यहां की ठंड से डरकर वापस नहीं भागेंगे। सरकार को चाहिए कि किसानों के हित में काम करते हुए उनकी मांगोमं को पूरा करें।
ज्ञान सिंह, मोहाली पंजाब।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed