फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   exclusive

किसान आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा, भीड़ भी लगातार बढ़ रही, एकजुटता बड़ी चुनौती

Fri, 18 Dec 2020 12:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2020 12:44 AM IST
विज्ञापन
exclusive
अंकित चौहान
विज्ञापन

सोनीपत। कृषि कानूनों के विरोध में किसान 21 दिन से नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसानों का आंदोलन लंबा खिंचने से जहां सरकार के लिए परेशानी बढ़ रही है, वहीं आंदोलन लंबा खिंचने व भीड़ बढ़ने से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह बड़ी चुनौती सभी को एकजुट रखने की दिख रही है। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में आंदोलन की रूपरेखा को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधि अलग-अलग मत के साथ दिखे, उससे सभी को एकजुट रखने की यह चिंता ज्यादा बढ़ जाती है। यह बात किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी समझ चुके हैं और उनके मत भले ही कई बार अलग दिखे हो, लेकिन वह बाहर एकजुटता दिखाना चाहते है। उनका मानना है कि सभी एकजुट रहेंगे तो सरकार पर दबाव बना रहेगा।
सिंघु बॉर्डर पर शुरुआत में केवल पंजाब के किसान और वहां के करीब 30 से ज्यादा संगठन दिखते थे। लेकिन जिस तरह से समय बीत रहा है, उसी तरह से वहां किसान बढ़ते जा रहे हैं और वहां पंजाब के साथ ही हरियाणा, यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, केरल समेत अन्य राज्यों के किसान भी पहुंचे हैं। यह आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा है और कुंडली बॉर्डर पर धरने को 21 दिन बीत चुके है। जिस तरह से आंदोलन लंबा होता जा रहा है, उसी तरह से भीड़ भी बढ़ी है। हालात यह है कि कुंडली बॉर्डर पर ही किसान दोगुने हो चुके हैं और वह इतनी सर्दी होने के बाद भी डटे हुए हैं। यह सबकुछ किसान प्रतिनिधियों के लिए काफी सुखद है। लेकिन किसान प्रतिनिधियों के लिए कुछ चिंता भी सता रही है। जिस तरह से आंदोलन लंबा होने के साथ आंदोलन की रूपरेखा को लेकर कई बार संगठनों के प्रतिनिधियों के मत अलग-अलग हो रहे है। क्योंकि किसान प्रतिनिधि दर्शनपाल ने कुछ दिन पहले रेलवे ट्रैक जाम करने की बात कही तो उसके अगले ही दिन संयुक्त किसान मोर्चा के बलबीर सिंह राजेवाल ने ट्रैक रोकना आंदोलन का हिस्सा नहीं होने की बात कही। वहीं एक निजी कंपनी के मॉल व अन्य संस्थानों पर किसानों ने तालाबंदी करके धरना शुरू किया तो भाकियू हरियाणा के गुरनाम सिंह चढूनी ने उससे किनारा कर लिया। उसे आंदोलन का हिस्सा नहीं बताया गया। इस तरह कई बार आंदोलन की रूपरेखा को लेकर अलग-अलग मत हो चुके हैं। इस तरह किसानों को आगे एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती दिख रही है। यह चुनौती उस समय ज्यादा बढ़ गई, जब टिकरी बॉर्डर पर गुरनाम सिंह चढूनी के साथ धक्कामुक्की हुई। हालांकि किसान संगठनों के प्रतिनिधि दावा करते हैं कि सभी संगठन व किसान एकजुट है और मत कई बार अलग हो सकते है, लेकिन हर किसी का मकसद कृषि कानूनों को रद्द कराना है। इस मकसद में तभी कामयाबी मिल सकती है, जब सभी एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ते रहेेंगे।
विज्ञापन

--
देशभर के किसानों व संगठनों को दिया जा रहा भाईचारा का संदेश
जिस तरह से आंदोलन लंबा होता जा रहा है और उसमें अलग-अलग राज्यों के किसान जुड़ते जा रहे हैं। उसको सबसे ज्यादा भाईचारा का संदेश दिया जा रहा है। किसान संगठनों के प्रतिनिधि इसे भाईचारे का प्रतीक बता रहे हैं तो उनके भाषणों में सबसे ज्यादा यही रहता है कि यह किसी एक प्रदेश का नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन है। जिसमें सभी को एकजुट होकर रहना है। इसके साथ ही यह कहा जा रहा है कि किसान जबतक एकजुट रहेेंगे, तबतक यह लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी और सरकार को किसानों की बात माननी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
अभी तक के आंदोलन का विश्लेषण किया और उससे यह साफ है कि यह आंदोलन बढ़ रहा है। यहां कई राज्यों के किसान पहुंचे हुए हैं तो ऐसे भी राज्य हैं, जहां किसान अपने यहां विरोध जता रहे हैं। केंद्र सरकार कह रही है कि कुछ संगठन उनके पास आ रहे हैं, ऐसा नहीं है। सभी आंदोलन में बॉर्डर पर बैठे हुए हैं और सभी एकजुटता के साथ केवल कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे है।
- चरणजीत सिंह, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed