फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   exclusive

सिद्धार्थ कालोनी के स्टांप ड्यूटी घोटाले में तहसीलदार, सब रजिस्ट्रार व तत्कालीन पटवारी दोषी

Fri, 11 Sep 2020 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2020 12:30 AM IST
विज्ञापन
exclusive
सोनीपत। पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे सोनीपत तहसील के अधिकारी नए घपले में फंसते दिख रहे हैं। उनको अब जांच रिपोर्ट के आधार पर सिद्धार्थ कॉलोनी के स्टांप ड्यूटी घोटाले में दोषी ठहराया गया है। सिद्धार्थ कालोनी के रिहायशी होने के बावजूद वर्ष 2015 में वहां जमीन को कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री कर दी गई और उसमें कम स्टांप लगाकर सरकार को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया। इसकी शिकायत डीसी के पास होने के बाद जांच डीआरओ को सौंपी गई तो डीआरओ ने अपनी जांच रिपोर्ट डीसी के पास भेजी है, जिसमें तहसीलदार, सब रजिस्ट्रार व तत्कालीन पटवारी को दोषी ठहराया गया है। डीआरओ ने जांच रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति तक कर डाली है। लेकिन अब यह देखना होगा कि आखिर जांच में दोषी ठहराए गए अधिकारियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, क्योंकि अभी तक इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं होने की बात कहकर मामला दबा दिया जाता था।
विज्ञापन

सिद्धार्थ कालोनी के रहने वाले अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने आरटीआई से जानकारी मिलने के बाद आरोप लगाया था कि फाजिलपुर पावर हाउस के पास सिद्धार्थ कालोनी के किला नंबर 26 के 7/1 हिस्से की रजिस्ट्री में स्टांप की चोरी हुई है। 3 सितंबर 2015 को इस रजिस्ट्री में स्टांप ड्यूटी नहीं ली गई और रजिस्ट्री फीस भी नहीं ली गई। जबकि उस किला की अन्य रजिस्ट्रियों में स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्री फीस का भुगतान किया गया है। इससे 4 साल पहले भी रजिस्ट्री में करीब 25 हजार रुपये स्टांप ड्यूटी जमा कराई गई है, जबकि उस रजिस्ट्री में अधिकारियों ने खूब मेहरबानी दिखाई है। इसमें पूरा खेल इस तरह से किया गया है कि सिद्धार्थ कालोनी की जमीन को 2004 में शहरी रिहायशी घोषित कर दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद 2015 में उसे कृषि भूमि दिखाया गया। डीआरओ राजकुमार भौरिया की जांच में सभी आरोप सही मिले और इसकी जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2008, 2009 व 2011 के दौरान भी करीब 4 रजिस्ट्रियों में इस तरह स्टांप ड्यूटी का बड़ा घपला किया गया है। इस तरह तहसील अधिकारियों ने सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचाया है। डीआरओ ने जांच पूरी करके रिपोर्ट डीसी को भेजी है, जिसमें तहसीलदार, तत्कालीन सब रजिस्ट्रार, तत्कालीन पटवारी को दोषी बताते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
विज्ञापन

वर्जन
स्टांप ड्यूटी चोरी मामले की जांच मुझे सौंपी गई थी। उसकी जांच करके मैंने रिपोर्ट डीसी के पास भेजी है। यह जांच सभी कागजातों को आधार मानते हुए उनको देखकर की गई है। इस मामले में जितने लोग मुझे दोषी लगे है, उनके बारे में लिखा गया है और उनपर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- राजकुमार भौरिया, डीआरओ सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed