{"_id":"61e85da4991768602c166fb5","slug":"crushing-remained-closed-in-sugar-mill-for-five-hours-farmers-demonstrated-sonipat-news-rtk6361844124","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीनी मिल में पांच घंटे तक बंद रही पेराई, किसानों ने किया प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीनी मिल में पांच घंटे तक बंद रही पेराई, किसानों ने किया प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनीपत। सहकारी चीनी मिल में पांच घंटे तक पेराई बंद होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मिल नहीं चलाए जाने के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि मिल प्रबंधन की ओर से ठीक ढंग से मिल नहीं चलाया जा रहा। उनका आरोप है कि जब मिल प्रबंधन से मिल बंद होने के बारे में पूछते है तो सही से जवाब नहीं मिलता। ऐसे में कई घंटों तक मिल चलने का इंतजार करना पड़ता है।
भारतीय किसान पंचायत के जिला प्रधान रविंद्र कुमार ने बताया कि मिल को ठीक से नहीं चलाया जा रहा है। जिसके कारण गन्ना पेराई का कार्य बाधित हो रहा है। बुधवार सुबह पांच बजे मिले में परोई का कार्य बंद हो गया था। उसके बाद सुबह 10 बजे दोबारा मिल में पेराई का चालू किया गया। मिल के बार-बार बंद होने के कारणस किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। इस समस्या से समाधान के लिए मिल प्रबंधन की ओर से बेहतर कदम नहीं उठाए जाए रहे हैं। उनका कहना है कि मिल की मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसके बावजूद मिल को रोक-रोक चलाया जाता है। जिससे किसानों का गन्ना भी समय पर नहीं लिया जाता। मिल प्रबंधन की लापरवाही किसानों को झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन
भारतीय किसान पंचायत के जिला प्रधान रविंद्र कुमार ने बताया कि मिल को ठीक से नहीं चलाया जा रहा है। जिसके कारण गन्ना पेराई का कार्य बाधित हो रहा है। बुधवार सुबह पांच बजे मिले में परोई का कार्य बंद हो गया था। उसके बाद सुबह 10 बजे दोबारा मिल में पेराई का चालू किया गया। मिल के बार-बार बंद होने के कारणस किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। इस समस्या से समाधान के लिए मिल प्रबंधन की ओर से बेहतर कदम नहीं उठाए जाए रहे हैं। उनका कहना है कि मिल की मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसके बावजूद मिल को रोक-रोक चलाया जाता है। जिससे किसानों का गन्ना भी समय पर नहीं लिया जाता। मिल प्रबंधन की लापरवाही किसानों को झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन