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नायब तहसीलदार, जमीन मालिक और बिचौलिया गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 15 Dec 2015 12:05 AM IST
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अदालत के स्टे आर्डर के बावजूद डिवाइन सिटी के पास नौ एकड़ विवादित जमीन की रजिस्ट्री करने के मामले में पुलिस ने गन्नौर के तत्कालीन नायब तहसीलदार जयवीर मलिक, जमीन मालिक नरेंद्रजीत और बिचौलिए की भूमिका निभाने के आरोपी हरिसिंह को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को इन्हें अदालत में पेश कर वहां से एक दिन पर रिमांड पर लिया गया है। फिलहाल नायब तहसीलदार जयबीर मलिक गोहाना में तैनात था, लेकिन जिस समय यह पूरा फर्जीवाड़ा हुआ, उस दौरान उसके पास गन्नौर का अतिरिक्त कार्यभार था।
डीएसपी गन्नौर सतीश शर्मा ने बताया कि दिल्ली स्थित रोहिणी निवासी कंवलजीत ने आरोप लगाया था कि डिवाइन सिटी के सामने स्थित 5 एकड़ 7 कनाल 9 मरले जमीन है, जिसको लेकर विवाद चल रहा है। इसके चलते न केवल सोनीपत, बल्कि हाईकोर्ट ने भी स्टे आर्डर जारी कर रखा है। इसके बावजूद गन्नौर तहसील में जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। विवादित जमीन में अपना निवेश करने वाले कंवलजीत ने जिला उपायुक्त के समक्ष न्याय की गुहार लगाई थी। कंवलजीत द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच के बाद जिला उपायुक्त ने गन्नौर पुलिस को नायब तहसीलदार सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया था।
40 लाख में सौदा, चार लाख लिए नकद
डीएसपी ने बताया कि मामले की अब तक की जांच में पता चला है कि बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले हरिसिंह ने नरेंद्रजीत की तरफ से 40 लाख में सौदा तय किया। सौदे के तहत चार लाख रजिस्ट्री के साथ देने की बात उभरी है, जबकि बाकी रकम बाद में देने की बात हुई। उक्त एंगल से पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस की फाइल पर यह फैक्ट आ गए हैं, जिनकी तह में जाने का प्रयास किया जा रहा है।
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डीसी के आदेश पर सीटीएम ने की थी जांच
उपायुक्त राजीव रतन ने इस मामले में नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां गत 20 नवंबर को छीन ली थी। सरकार द्वारा जारी हिदायतों की अनदेखी करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक ने दिनांक 12-06-2014 को दस्तावेज नंबर 1578/1580 पंजीकृत किया था। इसी पर कार्रवाई करते हुए जिला उपायुक्त ने भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा-68 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां छीनी थी और विभागीय जांच के बाद जिला उपायुक्त ने पुलिस को नायब तहसीलदार सहित, पटवारी और रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश भी दिए थे।
पटवारी और रजिस्ट्री क्लर्क भी हैं नामजद
फर्जी रजिस्ट्री के मामले में पटवारी कुलदीप और रजिस्ट्री क्लर्क सुमन के खिलाफ भी जिला उपायुक्त की तरफ से मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। जिस पर पुलिस ने नायब तहसीलदार के साथ पटवारी व रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। बताया जा रहा है कि पटवारी कुलदीप के पास यहां का चार्ज ही नहीं था जबकि रजिस्ट्री क्लर्क भी जांच के दौरान उन दिनों छुट्टी पर पाई गईं। एसडीएम कार्यालय से रजिस्ट्री क्लर्क के छुट्टी पर होने की पुष्टी कर दी गई है। अब पुलिस मामले में दोनों के खिलाफ कैसे जांच आगे बढ़ती है या क्लीन चिट देती है, यह तो समय ही बताएगा।
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डीएसपी गन्नौर सतीश शर्मा ने बताया कि दिल्ली स्थित रोहिणी निवासी कंवलजीत ने आरोप लगाया था कि डिवाइन सिटी के सामने स्थित 5 एकड़ 7 कनाल 9 मरले जमीन है, जिसको लेकर विवाद चल रहा है। इसके चलते न केवल सोनीपत, बल्कि हाईकोर्ट ने भी स्टे आर्डर जारी कर रखा है। इसके बावजूद गन्नौर तहसील में जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। विवादित जमीन में अपना निवेश करने वाले कंवलजीत ने जिला उपायुक्त के समक्ष न्याय की गुहार लगाई थी। कंवलजीत द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच के बाद जिला उपायुक्त ने गन्नौर पुलिस को नायब तहसीलदार सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया था।
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40 लाख में सौदा, चार लाख लिए नकद
डीएसपी ने बताया कि मामले की अब तक की जांच में पता चला है कि बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले हरिसिंह ने नरेंद्रजीत की तरफ से 40 लाख में सौदा तय किया। सौदे के तहत चार लाख रजिस्ट्री के साथ देने की बात उभरी है, जबकि बाकी रकम बाद में देने की बात हुई। उक्त एंगल से पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस की फाइल पर यह फैक्ट आ गए हैं, जिनकी तह में जाने का प्रयास किया जा रहा है।
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डीसी के आदेश पर सीटीएम ने की थी जांच
उपायुक्त राजीव रतन ने इस मामले में नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां गत 20 नवंबर को छीन ली थी। सरकार द्वारा जारी हिदायतों की अनदेखी करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक ने दिनांक 12-06-2014 को दस्तावेज नंबर 1578/1580 पंजीकृत किया था। इसी पर कार्रवाई करते हुए जिला उपायुक्त ने भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा-68 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां छीनी थी और विभागीय जांच के बाद जिला उपायुक्त ने पुलिस को नायब तहसीलदार सहित, पटवारी और रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश भी दिए थे।
पटवारी और रजिस्ट्री क्लर्क भी हैं नामजद
फर्जी रजिस्ट्री के मामले में पटवारी कुलदीप और रजिस्ट्री क्लर्क सुमन के खिलाफ भी जिला उपायुक्त की तरफ से मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। जिस पर पुलिस ने नायब तहसीलदार के साथ पटवारी व रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। बताया जा रहा है कि पटवारी कुलदीप के पास यहां का चार्ज ही नहीं था जबकि रजिस्ट्री क्लर्क भी जांच के दौरान उन दिनों छुट्टी पर पाई गईं। एसडीएम कार्यालय से रजिस्ट्री क्लर्क के छुट्टी पर होने की पुष्टी कर दी गई है। अब पुलिस मामले में दोनों के खिलाफ कैसे जांच आगे बढ़ती है या क्लीन चिट देती है, यह तो समय ही बताएगा।