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20 मिनट में 28 राउंड फायरिंग, चार एकड़ दूर तक पुलिस पर फायरिंग कर भागते रहे बदमाश
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत/गोहाना।
Updated Sat, 11 Feb 2017 12:31 AM IST
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गोहाना के बुसाना गांव में एनकाउंटर स्थल पर पहुंची एफएसएल की टीम।
- फोटो : bureau
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गोहाना के गांव बुसाना के पास खेतों में दोपहर अचानक फायरिंग शुरू हो गई। पुलिस पर फायरिंग करते हुए चार युवक खेतों में भाग रहे थे। पुलिस भी जवाबी कार्रवाई कर रही थी। करीब 20 मिनट तक दोनों तरफ से हुई फायरिंग में 28 राउंड फायर किए गए, जिसमें पुलिस की गोली लगने से रवींद्र पुगथला व उसका साथी गांव पुगथला का ही दीपक उर्फ काला ढेर हो गए। वहीं, एक अन्य जुआं निवासी सागर भी घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मौके से शहर मालपुर निवासी विक्की को दबोच लिया है। इस दौरान फायरिंग कर बदमाश करीब चार एकड़ दूर तक पुलिस को भगाते रहे।
पुलिस की चार टीमों ने की घेराबंदी
पुलिस को शुक्रवार दोपहर सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश स्वीफ्ट डिजायर कार में सवार होकर आ रहे हैं। पुलिस ने नाकाबंदी कर रोकने का प्रयास किया तो कार सवारों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। पुलिस ने भी उनका जवाब फायरिंग से ही दिया। रास्ता कच्चा होने के चलते और पुलिस की चार टीमों की घेराबंदी के बाद बदमाश कार से उतरकर खेतों में भाग रहे थे। वह साथ ही पुलिस पर गोलीबारी भी कर रहे थे। पुलिस की फायरिंग में सबसे पहले दीपक गोली लगने से नीचे गिर गया। बाद में रवींद्र पुगथला भी पुलिस की गोली लगने के बाद गिर गया। इसी दौरान सागर को भी गोली लगी। इसके बाद चौथे आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने तीनों घायलों को अस्पताल में पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने रवींद्र व दीपक को मृत घोषित कर दिया।
वर्ष 1999 में दर्ज हुआ पहला मामला
रवींद्र पुगथला के खिलाफ सबसे पहले वर्ष 1999 में मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया था। रवींद्र ने वर्ष, 2009 में पहली बार संगीन आपराधिक घटना को अंजाम दिया था। इसराना में खुबड़ू निवासी एक व्यक्ति हत्या के मामले में सुर्खियों में आने वाला रवींद्र पुगथला कई बार व्यापारियों से चौथ मांगने के मामलों में भी नामजद हो चुका था। व्यापारी से उसने तीन लाख उधार ले रखे थे। उसके बावजूद उससे चौथ की मांग कर डाली और चौथ न मिलने पर इसराना में उसकी हत्या कर दी थी। गांव में भी उसका खौफ कम नहीं था, गांव के लोगों खासकर व्यापारी और रुतबे वाले लोगों से रवींद्र उगाही कर चुका था। उस पर हत्या, लूट, डकैती, मारपीट सहित 19 मामले दर्ज हैं। इनमें ज्यादातर गन्नौर क्षेत्र में अंजाम दिया था। इसके अलावा सोनीपत व पानीपत जिले के इसराना में भी वारदातों को अंजाम दिया। सोनीपत पुलिस ने पांच हजार व पानीपत पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम रखा हुआ था।
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यह है आपराधिक रिकॉर्ड
-गन्नौर थाने में 25 जून, 1999 में मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 26 जून, 2006 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का केस दर्ज
-गन्नौर थाने में 1 अगस्त, 2008 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-इसराना थाना में 15 जुलाई, 2009 को हत्या व साजिश का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 25 मार्च, 2009 को मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा
-पानीपत जिले के इसराना थाना में 9 फरवरी, 2010 को हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ
-गन्नौर थाने में 13 अप्रैल, 2012 को डकैती का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 14 नवंबर, 2013 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-गन्नौर थाने में 17 दिसंबर, 2013 को एक और मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 20 जनवरी, 2014 को हत्या के प्रयास, मारपीट व जान से मारने की धमकी का केस
-गन्नौर थाने में 20 दिसंबर, 2014 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-गन्नौर थाने में 8 अगस्त, 2015 को जानलेवा हमले का केस
-गन्नौर थाने में 11 सितंबर, 2015 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 13 अप्रैल, 2015 को जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-सोनीपत सदर थाना में 2 मई, 2016 को हत्या के प्रयास का केस
-गन्नौर थाना में 1 सितंबर, 2016 को भगौड़े का मामला दर्ज
-सोनीपत सदर थाना में 26 अक्टूबर, 2016 को हत्या व साजिश का मामला दर्ज
दीपक इन मामलों में था नामजद
-गन्नौर में 13 अप्रैल, 2012 को लूट व मारपीट का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 24 अगस्त, 2013 को मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज
-गन्नौर थाना में 20 जनवरी, 2014 को हत्या प्रयास व मारपीट का मुकदमा दर्ज
-गन्नौर थाना में 1 जनवरी, 2015 को हुडदंग मचाने का केस दर्ज
-गन्नौर में 8 अगस्त, 2015 को मुठभेड़ व लूट का षड्यंत्र रचने का मामला दर्ज
-गन्नौर थाना में ही 13 जनवरी, 2017 को हत्या प्रयास व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज
सागर के खिलाफ ये मामले हैं दर्ज
-थाना मोहाना में 18 फरवरी, 2016 को रोड जाम करना व सरकारी संपत्ति का नुकसान करने का मामला दर्ज है।
-थाना मोहाना में ही 27 अप्रैल, 2016 को मारपीट, जान से मारने की धमकी देने व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम में मामला दर्ज किया गया।
अस्पताल बन गया पुलिस छावनी
पुलिस ने रवींद्र पुगथला व उसके साथी दीपक पुगथला के शवों को गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया गया है। शुक्रवार देर शाम तक परिजन अस्पताल नहीं पहुंचे थे। पुलिस ने अस्पताल को छावनी में बदल रखा है और मामले को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
परिवार के ज्यादातर सदस्य हैं जेल में
रवींद्र के परिवार में से अधिकतर लोग जेल में ही हैं। उसका पिता, छोटा भाई, चाचा और चचेरा भाई भी अलग-अलग मामलों में जेल में है। बताया जाता है कि गांव में मुखबिरी के लिए रविंद्र छोटे-छोटे बच्चों को रुपये देता था, ताकि पुलिस की किसी भी तरह की कार्रवाई होते ही उसे सूचना मिल जाए।
नाम कमाने के फेर में रवींद्र गैंग से जुड़ रहे थे युवा
रवींद्र पुगथला के गैंग से युवा नाम कमाने के फेर में जुड़ रहे थे। अपराध की दुनिया में बिना कुछ किए नाम कमाने के लिए कई युवा रवींद्र के जाल में फंस भी चुके थे। अक्तूबर 2016 में किलोहड़द में हुई हत्या के मामले में भी आरोपियों में वह युवक शामिल किए गए थे। पुगथला निवासी नरेंद्र की इस हत्या के मामले का मास्टरमाइंड रविंद्र पुगथला ही था।
दो माह पहले पुलिस से बचकर निकल गया था रवींद्र
बताया गया है कि रवींद्र दो माह पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ जाता, लेकिन उस समय वह अपने साथियों के साथ फरार हो गया था। पुलिस ने खुबडू़ गांव के पास नहरों के बीच में जाल बिछाया था, लेकिन रवींद्र को इसकी भनक लग गई थी। उसने गाड़ी को नहर किनारे छोड़ दिया था। बाद में वह नहर में छलांग लगाकर निकल भागे थे।
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पुलिस की चार टीमों ने की घेराबंदी
पुलिस को शुक्रवार दोपहर सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश स्वीफ्ट डिजायर कार में सवार होकर आ रहे हैं। पुलिस ने नाकाबंदी कर रोकने का प्रयास किया तो कार सवारों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। पुलिस ने भी उनका जवाब फायरिंग से ही दिया। रास्ता कच्चा होने के चलते और पुलिस की चार टीमों की घेराबंदी के बाद बदमाश कार से उतरकर खेतों में भाग रहे थे। वह साथ ही पुलिस पर गोलीबारी भी कर रहे थे। पुलिस की फायरिंग में सबसे पहले दीपक गोली लगने से नीचे गिर गया। बाद में रवींद्र पुगथला भी पुलिस की गोली लगने के बाद गिर गया। इसी दौरान सागर को भी गोली लगी। इसके बाद चौथे आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने तीनों घायलों को अस्पताल में पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने रवींद्र व दीपक को मृत घोषित कर दिया।
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वर्ष 1999 में दर्ज हुआ पहला मामला
रवींद्र पुगथला के खिलाफ सबसे पहले वर्ष 1999 में मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया था। रवींद्र ने वर्ष, 2009 में पहली बार संगीन आपराधिक घटना को अंजाम दिया था। इसराना में खुबड़ू निवासी एक व्यक्ति हत्या के मामले में सुर्खियों में आने वाला रवींद्र पुगथला कई बार व्यापारियों से चौथ मांगने के मामलों में भी नामजद हो चुका था। व्यापारी से उसने तीन लाख उधार ले रखे थे। उसके बावजूद उससे चौथ की मांग कर डाली और चौथ न मिलने पर इसराना में उसकी हत्या कर दी थी। गांव में भी उसका खौफ कम नहीं था, गांव के लोगों खासकर व्यापारी और रुतबे वाले लोगों से रवींद्र उगाही कर चुका था। उस पर हत्या, लूट, डकैती, मारपीट सहित 19 मामले दर्ज हैं। इनमें ज्यादातर गन्नौर क्षेत्र में अंजाम दिया था। इसके अलावा सोनीपत व पानीपत जिले के इसराना में भी वारदातों को अंजाम दिया। सोनीपत पुलिस ने पांच हजार व पानीपत पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम रखा हुआ था।
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यह है आपराधिक रिकॉर्ड
-गन्नौर थाने में 25 जून, 1999 में मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 26 जून, 2006 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का केस दर्ज
-गन्नौर थाने में 1 अगस्त, 2008 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-इसराना थाना में 15 जुलाई, 2009 को हत्या व साजिश का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 25 मार्च, 2009 को मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा
-पानीपत जिले के इसराना थाना में 9 फरवरी, 2010 को हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ
-गन्नौर थाने में 13 अप्रैल, 2012 को डकैती का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 14 नवंबर, 2013 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-गन्नौर थाने में 17 दिसंबर, 2013 को एक और मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 20 जनवरी, 2014 को हत्या के प्रयास, मारपीट व जान से मारने की धमकी का केस
-गन्नौर थाने में 20 दिसंबर, 2014 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-गन्नौर थाने में 8 अगस्त, 2015 को जानलेवा हमले का केस
-गन्नौर थाने में 11 सितंबर, 2015 को मारपीट व जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 13 अप्रैल, 2015 को जान से मारने की धमकी का मुकदमा
-सोनीपत सदर थाना में 2 मई, 2016 को हत्या के प्रयास का केस
-गन्नौर थाना में 1 सितंबर, 2016 को भगौड़े का मामला दर्ज
-सोनीपत सदर थाना में 26 अक्टूबर, 2016 को हत्या व साजिश का मामला दर्ज
दीपक इन मामलों में था नामजद
-गन्नौर में 13 अप्रैल, 2012 को लूट व मारपीट का मामला दर्ज
-गन्नौर थाने में 24 अगस्त, 2013 को मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज
-गन्नौर थाना में 20 जनवरी, 2014 को हत्या प्रयास व मारपीट का मुकदमा दर्ज
-गन्नौर थाना में 1 जनवरी, 2015 को हुडदंग मचाने का केस दर्ज
-गन्नौर में 8 अगस्त, 2015 को मुठभेड़ व लूट का षड्यंत्र रचने का मामला दर्ज
-गन्नौर थाना में ही 13 जनवरी, 2017 को हत्या प्रयास व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज
सागर के खिलाफ ये मामले हैं दर्ज
-थाना मोहाना में 18 फरवरी, 2016 को रोड जाम करना व सरकारी संपत्ति का नुकसान करने का मामला दर्ज है।
-थाना मोहाना में ही 27 अप्रैल, 2016 को मारपीट, जान से मारने की धमकी देने व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम में मामला दर्ज किया गया।
अस्पताल बन गया पुलिस छावनी
पुलिस ने रवींद्र पुगथला व उसके साथी दीपक पुगथला के शवों को गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया गया है। शुक्रवार देर शाम तक परिजन अस्पताल नहीं पहुंचे थे। पुलिस ने अस्पताल को छावनी में बदल रखा है और मामले को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
परिवार के ज्यादातर सदस्य हैं जेल में
रवींद्र के परिवार में से अधिकतर लोग जेल में ही हैं। उसका पिता, छोटा भाई, चाचा और चचेरा भाई भी अलग-अलग मामलों में जेल में है। बताया जाता है कि गांव में मुखबिरी के लिए रविंद्र छोटे-छोटे बच्चों को रुपये देता था, ताकि पुलिस की किसी भी तरह की कार्रवाई होते ही उसे सूचना मिल जाए।
नाम कमाने के फेर में रवींद्र गैंग से जुड़ रहे थे युवा
रवींद्र पुगथला के गैंग से युवा नाम कमाने के फेर में जुड़ रहे थे। अपराध की दुनिया में बिना कुछ किए नाम कमाने के लिए कई युवा रवींद्र के जाल में फंस भी चुके थे। अक्तूबर 2016 में किलोहड़द में हुई हत्या के मामले में भी आरोपियों में वह युवक शामिल किए गए थे। पुगथला निवासी नरेंद्र की इस हत्या के मामले का मास्टरमाइंड रविंद्र पुगथला ही था।
दो माह पहले पुलिस से बचकर निकल गया था रवींद्र
बताया गया है कि रवींद्र दो माह पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ जाता, लेकिन उस समय वह अपने साथियों के साथ फरार हो गया था। पुलिस ने खुबडू़ गांव के पास नहरों के बीच में जाल बिछाया था, लेकिन रवींद्र को इसकी भनक लग गई थी। उसने गाड़ी को नहर किनारे छोड़ दिया था। बाद में वह नहर में छलांग लगाकर निकल भागे थे।