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सजा: दिल्ली पुलिस के जवान व उनके पिता की हत्या में पांच दोषियों को उम्रकैद, जमीन के विवाद में की थी वारदात
Sat, 26 Feb 2022 08:13 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 26 Feb 2022 08:13 PM IST
सार
सगे भाई व भांजा हत्या और उनका पिता को शरण देने का दोषी करार दिया गया है। गांव गोरड़ में 1 जुलाई, 2017 को हत्या की गई थी। जमीन के लिए एक ही परिवार में विवाद चल रहा था। पिता-पुत्र खेत में सिंचाई व धान की रोपाई करने गए थे।
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विस्तार
हरियाणा के सोनीपत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देविंद्र सिंह की अदालत ने जमीन के विवाद में दिल्ली पुलिस के जवान व उनके पिता की हत्या के मामले में छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सगे भाइयों व उनके भांजे समेत पांच को उम्रकैद व एक को शरण देने में तीन साल कैद की सजा सुनाई है। पांचों दोषियों पर 75-75 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है।
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गांव गोरड़ के रहने वाले शोभराम ने 1 जुलाई, 2017 को खरखौदा थाना पुलिस को बताया था कि परिवार में उसके रिश्ते के चाचा सोमबीर व परशुराम के परिवार संग उनका जमीन के लिए विवाद चला आ रहा है। वह 1 जुलाई 2017 को पिता ईश्वर व भाई प्रविंद्र और कुलदीप के साथ खेत में सिंचाई करने व धान की रोपाई करने गए थे।
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उसका भाई प्रविंद्र दिल्ली पुलिस का जवान था। इसी दौरान रास्ते की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में परशुराम का बेटा स्वर्ण सिंह, देवेंद्र व उनका भांजा गांव आहुलाना निवासी नवीन, चाचा सोमबीर, ओमबीर और उनके परिवार के अन्य सदस्य खेत में आ गए थे। उन्होंने जमीन के विवाद में उस पर गोली चलाई थी, जिसमें वह बच गया था। बाद में स्वर्ण व देवेंद्र ने उसके पिता ईश्वर व भाई प्रविंद्र को गोलियां मार दी थीं। नवीन ने उसके पिता के सिर में कस्सी से वार किया था। अन्य ने भी उन पर वार किए थे।
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कुलदीप मौके से जान बचाकर भाग गया था। गोली मारने व अन्य हथियारों से हमला करने के चलते उसके भाई प्रविंद्र व पिता ईश्वर की मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में शोभराम के बयान पर स्वर्ण, उसके भाई देवेंद्र, भांजे नवीन, परिवार के सोमबीर व राजबीर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
पुलिस ने मामले में आरोपी गांव गोरड़ निवासी राजबीर व उसके भाई सोमबीर, स्वर्ण व उसके भांजे नवीन को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही परशुराम को आरोपियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मामले में स्वर्ण का भाई देवेंद्र लंबे समय तक फरार रहा था।
उसकी गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। बाद में उसे साथियों सहित पकड़ा गया था। वह उस समय दोहरे हत्याकांड में गवाह शोभाराम की हत्या का षड्यंत्र रच रहा था।
एएसजे देविंद्र सिंह की अदालत ने मामले में छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले में सोमबीर व उसके भाई राजबीर, उनके परिवार के ही स्वर्ण व उसके भाई देवेंद्र और भांजे को हत्या में दोषी करार दिया है।
उन्हें भादंसं की धारा 302 में उम्रकैद व 50 हजार रुपये जुर्माना, 307 में सात साल कैद व 20 हजार रुपये जुर्माना और 148 व 149 में दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर एक साल, पांच माह की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। वहीं स्वर्ण व देवेंद्र के पिता परशुराम को शरण देने के मामले में दोषी करार दिया है। उसे तीन साल कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।