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मौलवी की हत्या करने वाले दो को उम्रकैद की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:32 PM IST
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लगभग ढाई साल पहले मौलवी की हत्या करने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगदीप सिंह की अदालत ने दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की सूरत में अतिरिक्त सजा भी भुगतनी पड़ेगी। बता दें कि हत्या करने के बाद 50 हजार रुपये की नकदी भी लूटी गई थी।
पुलिस के अनुसार 3 नवंबर 2013 को मूलरूप से बुडाना, राजौरी, जम्मू फिलहाल आबाद पानीपत शफीर अहमद ने थाना गोहाना पुलिस को पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में उसने बताया था कि पानीपत के गांव परढाना में उसका भाई फरीद अहमद काफी समय से मौलवी के तौर पर रहता है। उसने गांव के ही जसबीर और मोनू के साथ मिलकर कारों की खरीद-फरोख्त का भी काम किया था। आरोप लगाया कि 2 नवंबर 2013 को वे तीनों कार से कार खरीदने गोहाना आए थे, फरीद अहमद के पास 50 हजार रुपए थे। मोनू और जसबीर ने फोन पर उसे सूचना दी कि मुंडलाना और ढुराना के बीच बाइक सवार तीन युवकों ने फरीद को गोली मार दी और 50 हजार रुपये की नकदी छीन ली। मोनू और जसबीर ने फरीद को अस्पताल में भर्ती कराया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो मोनू और जसबीर अस्पताल से फरार हो गए थे। इसी मामले में अदालत ने मोनू और जसबीर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मोनू को 14 हजार और जसबीर को 12 हजार रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है।
षड्यंत्र के तहत मारी गोली, बाद में बनाई झूठी कहानी
बता दें कि पहले तो मोनू और जसबीर ने झूठी कहानी बनाई थी। उन्होंने खुद ही पहले तो पुलिस को फोन कर सूचना दी कि तीन युवकों ने उनके साथी को गोली मार दी और पैसे लूट लिए, लेकिन जब अस्पताल में पुलिस पहुंची तो मोनू और जसबीर फरार हो गए थे। दो दिन में जांच के दौरान सामने आया कि इन दोनों ने ही मौलवी फरीद की हत्या की थी। पूछताछ में दोनों ने हत्या की वारदात कबूल ली थी।
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पुलिस के अनुसार 3 नवंबर 2013 को मूलरूप से बुडाना, राजौरी, जम्मू फिलहाल आबाद पानीपत शफीर अहमद ने थाना गोहाना पुलिस को पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में उसने बताया था कि पानीपत के गांव परढाना में उसका भाई फरीद अहमद काफी समय से मौलवी के तौर पर रहता है। उसने गांव के ही जसबीर और मोनू के साथ मिलकर कारों की खरीद-फरोख्त का भी काम किया था। आरोप लगाया कि 2 नवंबर 2013 को वे तीनों कार से कार खरीदने गोहाना आए थे, फरीद अहमद के पास 50 हजार रुपए थे। मोनू और जसबीर ने फोन पर उसे सूचना दी कि मुंडलाना और ढुराना के बीच बाइक सवार तीन युवकों ने फरीद को गोली मार दी और 50 हजार रुपये की नकदी छीन ली। मोनू और जसबीर ने फरीद को अस्पताल में भर्ती कराया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो मोनू और जसबीर अस्पताल से फरार हो गए थे। इसी मामले में अदालत ने मोनू और जसबीर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मोनू को 14 हजार और जसबीर को 12 हजार रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है।
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षड्यंत्र के तहत मारी गोली, बाद में बनाई झूठी कहानी
बता दें कि पहले तो मोनू और जसबीर ने झूठी कहानी बनाई थी। उन्होंने खुद ही पहले तो पुलिस को फोन कर सूचना दी कि तीन युवकों ने उनके साथी को गोली मार दी और पैसे लूट लिए, लेकिन जब अस्पताल में पुलिस पहुंची तो मोनू और जसबीर फरार हो गए थे। दो दिन में जांच के दौरान सामने आया कि इन दोनों ने ही मौलवी फरीद की हत्या की थी। पूछताछ में दोनों ने हत्या की वारदात कबूल ली थी।
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