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रिश्वतखोर पटवारी को चार साल की कैद
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रिश्वतखोर पटवारी को चार साल की कैद
-इंतकाल चढ़ाने के नाम पर तीन हजार रुपये की रिश्वत के साथ हुआ था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता की अदालत ने इंतकाल चढ़ाने के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किए गए आरोपी पटवारी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे चार साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
विदित रहे कि रोहतक के गांव सांघी निवासी कृष्ण ने विजिलेंस को बताया था कि उसका गोहाना शहर की चोपड़ा कालोनी में प्लाट है। यह प्लाट उसकी मां के नाम पर है। कृष्ण को इस प्लाट को बेचना था, जिसके इंतकाल के लिए पटवारी रोशन लाल उसे परेशान कर रहा था। कृष्ण ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया था कि पटवारी रोशनलाल इंतकाल करने के नाम पर 12 सौ रुपये पहले ही ले चुका था। अब तीन हजार रुपये की मांग कर रहा था। कृष्ण का कहना था कि उसने इस संबंध में तहसीलदार से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस पर कृष्ण ने विजिलेंस को शिकायत की थी। मामले में 9 सितंबर, 2016 को रोशनलाल को रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई की गई। इसके लिए सोनीपत के तत्कालीन बीडीपीओ राकेश वोहरा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। विजिलेंस सोनीपत की टीम में तत्कालीन इंस्पेक्टर राजीव सोनी, सब इंस्पेक्टर राम मेहर, एएसआई कटार सिंह और ईएचसी अनिल कुमार को शामिल किया गया था। टीम ने शिकायतकर्ता कृष्ण को तीन हजार रुपये देकर पटवारी के पास भेजा था। पटवारी ने कार्यालय के बाहर जैसे ही पैसे लिए विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया था। मामले में सुनवाई करते हुए अब अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता की अदालत ने रोशनलाल को दोषी करार दिया है। उसे चार साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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-इंतकाल चढ़ाने के नाम पर तीन हजार रुपये की रिश्वत के साथ हुआ था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता की अदालत ने इंतकाल चढ़ाने के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किए गए आरोपी पटवारी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे चार साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
विदित रहे कि रोहतक के गांव सांघी निवासी कृष्ण ने विजिलेंस को बताया था कि उसका गोहाना शहर की चोपड़ा कालोनी में प्लाट है। यह प्लाट उसकी मां के नाम पर है। कृष्ण को इस प्लाट को बेचना था, जिसके इंतकाल के लिए पटवारी रोशन लाल उसे परेशान कर रहा था। कृष्ण ने विजिलेंस को दी शिकायत में बताया था कि पटवारी रोशनलाल इंतकाल करने के नाम पर 12 सौ रुपये पहले ही ले चुका था। अब तीन हजार रुपये की मांग कर रहा था। कृष्ण का कहना था कि उसने इस संबंध में तहसीलदार से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस पर कृष्ण ने विजिलेंस को शिकायत की थी। मामले में 9 सितंबर, 2016 को रोशनलाल को रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई की गई। इसके लिए सोनीपत के तत्कालीन बीडीपीओ राकेश वोहरा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। विजिलेंस सोनीपत की टीम में तत्कालीन इंस्पेक्टर राजीव सोनी, सब इंस्पेक्टर राम मेहर, एएसआई कटार सिंह और ईएचसी अनिल कुमार को शामिल किया गया था। टीम ने शिकायतकर्ता कृष्ण को तीन हजार रुपये देकर पटवारी के पास भेजा था। पटवारी ने कार्यालय के बाहर जैसे ही पैसे लिए विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया था। मामले में सुनवाई करते हुए अब अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता की अदालत ने रोशनलाल को दोषी करार दिया है। उसे चार साल कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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