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पीएचसी में सात घंटे के बाद गर्भवती को किया रेफर, मृत बच्चे को दिया जन्म
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सोनीपत। पीएचसी मुरथल में गर्भवती महिला को परिजन लेकर पहुंचे तो उसे वहां सात घंटे तक भर्ती रखा गया। महिला के पति का आरोप है कि स्टाफ कर्मी ने पहले दर्द बढ़ाने की गोली दी और उसके बाद बच्चे को उल्टा बताकर दर्द बढ़ाने का इंजेक्शन लगा दिया। जिससे गर्भ से बच्चे का हाथ बाहर निकल आया तो स्टाफ कर्मी ने उसे गंभीर बताकर नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया। वह उसे नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचा तो वहां से चिकित्सकों ने उसे खानपुर कलां रेफर कर दिया। जहां ऑपरेशन के बाद गर्भ से मृत बच्चे को निकाला गया।
मूलरूप से बिहार व हाल में गांव हसनपुर निवासी संजीव कुमार बुधवार शाम को अपनी पत्नी अंजू देवी को लेकर पीएचसी मुरथल पहुंचा। संजीव ने आरोप लगाया कि पत्नी को दर्द कम होने पर पीएचसी पर तैनात महिला स्टाफ कर्मी ने उसे गोली दी। उसके कुछ देर बाद दर्द नहीं बढ़े तो स्टाफ कर्मी ने गर्भ में बच्चा उल्टा होने की बात कही। उसके बाद गर्भवती को इंजेक्शन लगाकर डिलीवरी करवाने की बात कही। संजीव ने बताया कि उसके बाद दर्द शुरू हुआ और गर्भ से बच्चे का हाथ बाहर निकल आया। उसके बाद स्टाफ कर्मी ने अंजू को नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया। एंबुलेंस में गर्भवती को नागरिक अस्पताल में लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल खानपुर रेफर कर दिया। वहां वीरवार सुबह महिला का ऑपरेशन कर गर्भ से मृत बच्चे को निकाला। महिला का उपचार मेडिकल अस्पताल में चल रहा है। संजीव ने आरोप लगाया कि गर्भ में बच्चा उल्टा होने की जानकारी होने के बाद भी उसकी पत्नी को करीब सात घंटे तक पीएचसी में रखा गया। समय रहते महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल या निजी अस्पताल में लेकर चला जाता तो ऑपरेशन से बच्चे की डिलीवरी कराकर जान बचा लेता।
जेल ड्यूटी होने के कारण कारागार में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही थी। मामले को लेकर स्टाफ कर्मियों से जानकारी की जाएगी। - डॉ. संजीव, इंचार्ज, पीएचसी मुरथल।
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स्टाफ कर्मी को गर्भ में बच्चा उल्टा होने की जानकारी थी तो उसे हायर सेंटर भेजा जाना चाहिए था। मामले को लेकर पीएचसी अधिकारी से बातचीत की जा रही है। मामले की जांच की जाएगी। लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - डॉ. जसंवत सिंह पूनिया, सिविल सर्जन।
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मूलरूप से बिहार व हाल में गांव हसनपुर निवासी संजीव कुमार बुधवार शाम को अपनी पत्नी अंजू देवी को लेकर पीएचसी मुरथल पहुंचा। संजीव ने आरोप लगाया कि पत्नी को दर्द कम होने पर पीएचसी पर तैनात महिला स्टाफ कर्मी ने उसे गोली दी। उसके कुछ देर बाद दर्द नहीं बढ़े तो स्टाफ कर्मी ने गर्भ में बच्चा उल्टा होने की बात कही। उसके बाद गर्भवती को इंजेक्शन लगाकर डिलीवरी करवाने की बात कही। संजीव ने बताया कि उसके बाद दर्द शुरू हुआ और गर्भ से बच्चे का हाथ बाहर निकल आया। उसके बाद स्टाफ कर्मी ने अंजू को नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया। एंबुलेंस में गर्भवती को नागरिक अस्पताल में लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल खानपुर रेफर कर दिया। वहां वीरवार सुबह महिला का ऑपरेशन कर गर्भ से मृत बच्चे को निकाला। महिला का उपचार मेडिकल अस्पताल में चल रहा है। संजीव ने आरोप लगाया कि गर्भ में बच्चा उल्टा होने की जानकारी होने के बाद भी उसकी पत्नी को करीब सात घंटे तक पीएचसी में रखा गया। समय रहते महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल या निजी अस्पताल में लेकर चला जाता तो ऑपरेशन से बच्चे की डिलीवरी कराकर जान बचा लेता।
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जेल ड्यूटी होने के कारण कारागार में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही थी। मामले को लेकर स्टाफ कर्मियों से जानकारी की जाएगी। - डॉ. संजीव, इंचार्ज, पीएचसी मुरथल।
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स्टाफ कर्मी को गर्भ में बच्चा उल्टा होने की जानकारी थी तो उसे हायर सेंटर भेजा जाना चाहिए था। मामले को लेकर पीएचसी अधिकारी से बातचीत की जा रही है। मामले की जांच की जाएगी। लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - डॉ. जसंवत सिंह पूनिया, सिविल सर्जन।