{"_id":"607dd2ca8ebc3e8dba090748","slug":"corona-death-funeral-space-sonipat-news-rtk605182668","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना से मौत बढ़ी तो जवाब दे गईं व्यवस्थाएं, शमशान घाट में आधी रात तक होते रहे अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना से मौत बढ़ी तो जवाब दे गईं व्यवस्थाएं, शमशान घाट में आधी रात तक होते रहे अंतिम संस्कार
विज्ञापन
सोनीपत। जिले में कोरोना संक्रमण कहर बरपाने लगा है। इससे मौत बढ़ने के साथ ही व्यवस्थाएं तक जवाब देने लगी हैं। इस कारण ही यहां शमशान घाट में आधी रात तक अंतिम संस्कार होते रहे। कोविड मुक्ति धाम में बनाए सीएनजी शवदाह गृह में कोरोना संक्रमित व कोरोना संदिग्ध के शव बढ़ने से सभी का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। सोमवार को 11 शव पहुंचने के बाद मुक्तिधाम प्रबंधन की अपील पर सीएमओ और नगर आयुक्त ने शमशान घाट में लकड़ी से अंतिम संस्कार करने की अनुमति प्रदान कर दी। जिससे वहां अधिकतर शव का अंतिम संस्कार लकड़ी में किया गया और वहां दिनभर अंतिम संस्कार होता रहा।
कोरोना संक्रमण व संदिग्ध अवस्था में मरने वालों के अंतिम संस्कार में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। संक्रमण के डर से पीपीई किट पहनकर स्पेशल स्टाफ उनका अंतिम संस्कार सीएनजी या विद्युत शवदाह गृह में करता है। जिले में सीएनजी शवदाह गृह केवल सेक्टर-15 के शिव मुक्तिधाम में है। ऐसे में जिले के सभी कोरोना मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार यहां पर किया जाता है। मुक्तिधाम प्रबंधन के अनुसार रविवार तक 106 कोरोना संक्रमितों के शवों का अंतिम संस्कार सीएनजी शवदाह गृह में किया गया। वहीं 60 संदिग्धों का अंतिम संस्कार भी कोविड मानकों के अनुसार किया गया। वहीं अप्रैल में कोरोना संक्रमितों के 28 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि सामान्य रूप से मरने वाले 62 शवों का अंतिम संस्कार मुक्तिधाम में किया गया। उधर, सीएनजी शवदाह गृह के लगातार चलने से इसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। मुक्तिधाम में कोविड वारियर्स की टीम ने रविवार की रात को दो बजे तक कोविड संक्रमित के शवों का अंतिम संस्कार किया।
सीएनजी शवदाह गृह में एक शव के अंतिम संस्कार में लगते है दो घंटे
प्रबंधन के अनुसार सीएनजी से एक शव का अंतिम संस्कार होने में दो घंटे का समय लगता है। मशीन को ठंडा होने और अस्थियां संग्रहित करने के लिए 30 मिनट का समय चाहिए। सबसे पहले कोविड रोगी की सूचना उनके परिजन मुक्तिधाम पर देते हैं। उसके बाद सीएमओ से ऑनलाइन उसकी रिपोर्ट मुक्तिधाम को प्राप्त होती है। उसको नगर आयुक्त को भेजा जाता है। नगर आयुक्त की स्वीकृति के बाद स्पेशल टीम अंतिम संस्कार कराती है।
विज्ञापन
रविवार को पहुंचे पांच कोविड से मरने वालों के शव
रविवार को मुक्तिधाम पर कोविड से मरने वालों के पांच शव पहुंचे थे। मुक्तिधाम के रिकॉर्ड के अनुसार सेक्टर 14 के राजेंद्र ठक्कर, सुदामापुरी के बीसेखा, बहालगढ़ के शिवचरन, लाखू बुआना की सावित्री देवी और लाल दरवाजा के कौशल चंद्र की मौत कोरोना संक्रमण से हुई थी। इनके अंतिम संस्कार रविवार को किए गए। इसमें स्पेशल स्टाफ रात में दो बजे तक लगा रहा। वहीं मुक्तिधाम में सोमवार को खानपुर मेडिकल कॉलेज से चार, भगवानदास अस्पताल से चार और आस्कर अस्पताल से वाया सामान्य अस्पताल तीन शव पहुंचे।
वर्जन
कोरोना संक्रमित व संदिग्ध शवों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ऐसे में प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार सीएनजी सिस्टम से इनका अंतिम संस्कार कराना संभव नहीं है। इसके चलते उनको शमशान घाट में लकड़ी से अंतिम संस्कार की स्वीकृति मिल गई है। पीपीई किट में सुरक्षा के साथ शवों के अंतिम संस्कार कराए जा रहे हैं।
- डॉ. डीएन मल्होत्रा, सचिव शिव मुक्तिधाम, सेक्टर-15
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण व संदिग्ध अवस्था में मरने वालों के अंतिम संस्कार में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। संक्रमण के डर से पीपीई किट पहनकर स्पेशल स्टाफ उनका अंतिम संस्कार सीएनजी या विद्युत शवदाह गृह में करता है। जिले में सीएनजी शवदाह गृह केवल सेक्टर-15 के शिव मुक्तिधाम में है। ऐसे में जिले के सभी कोरोना मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार यहां पर किया जाता है। मुक्तिधाम प्रबंधन के अनुसार रविवार तक 106 कोरोना संक्रमितों के शवों का अंतिम संस्कार सीएनजी शवदाह गृह में किया गया। वहीं 60 संदिग्धों का अंतिम संस्कार भी कोविड मानकों के अनुसार किया गया। वहीं अप्रैल में कोरोना संक्रमितों के 28 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। जबकि सामान्य रूप से मरने वाले 62 शवों का अंतिम संस्कार मुक्तिधाम में किया गया। उधर, सीएनजी शवदाह गृह के लगातार चलने से इसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। मुक्तिधाम में कोविड वारियर्स की टीम ने रविवार की रात को दो बजे तक कोविड संक्रमित के शवों का अंतिम संस्कार किया।
विज्ञापन
सीएनजी शवदाह गृह में एक शव के अंतिम संस्कार में लगते है दो घंटे
प्रबंधन के अनुसार सीएनजी से एक शव का अंतिम संस्कार होने में दो घंटे का समय लगता है। मशीन को ठंडा होने और अस्थियां संग्रहित करने के लिए 30 मिनट का समय चाहिए। सबसे पहले कोविड रोगी की सूचना उनके परिजन मुक्तिधाम पर देते हैं। उसके बाद सीएमओ से ऑनलाइन उसकी रिपोर्ट मुक्तिधाम को प्राप्त होती है। उसको नगर आयुक्त को भेजा जाता है। नगर आयुक्त की स्वीकृति के बाद स्पेशल टीम अंतिम संस्कार कराती है।
विज्ञापन
रविवार को पहुंचे पांच कोविड से मरने वालों के शव
रविवार को मुक्तिधाम पर कोविड से मरने वालों के पांच शव पहुंचे थे। मुक्तिधाम के रिकॉर्ड के अनुसार सेक्टर 14 के राजेंद्र ठक्कर, सुदामापुरी के बीसेखा, बहालगढ़ के शिवचरन, लाखू बुआना की सावित्री देवी और लाल दरवाजा के कौशल चंद्र की मौत कोरोना संक्रमण से हुई थी। इनके अंतिम संस्कार रविवार को किए गए। इसमें स्पेशल स्टाफ रात में दो बजे तक लगा रहा। वहीं मुक्तिधाम में सोमवार को खानपुर मेडिकल कॉलेज से चार, भगवानदास अस्पताल से चार और आस्कर अस्पताल से वाया सामान्य अस्पताल तीन शव पहुंचे।
वर्जन
कोरोना संक्रमित व संदिग्ध शवों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ऐसे में प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार सीएनजी सिस्टम से इनका अंतिम संस्कार कराना संभव नहीं है। इसके चलते उनको शमशान घाट में लकड़ी से अंतिम संस्कार की स्वीकृति मिल गई है। पीपीई किट में सुरक्षा के साथ शवों के अंतिम संस्कार कराए जा रहे हैं।
- डॉ. डीएन मल्होत्रा, सचिव शिव मुक्तिधाम, सेक्टर-15