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समाज, अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर पड़ रहा जलवायु परिवर्तन का प्रभाव : कुलपति
Tue, 23 Jun 2026 08:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 23 Jun 2026 08:52 PM IST
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बीपीएसएमवी में राष्ट्रीय वर्चुअल रिफ्रेशर कोर्स में शामिल शिक्षक, शोधार्थी और शिक्षाविद।
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स सतत विकास लक्ष्य : इंटिग्रेटिंग क्लाइमेट एक्शन इंटो एवरी डिसिप्लिन का शुभारंभ किया गया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से 90 शिक्षकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसका प्रभाव समाज, अर्थव्यवस्था और शिक्षा के सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखकर सभी शैक्षणिक विषयों के अध्यापन और अनुसंधान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
मुख्य अतिथि गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जलवायु कार्रवाई को बहुविषयक दृष्टिकोण से जोड़ने और अनुसंधान व नवाचार के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर जोर दिया।
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केंद्र की निदेशक डॉ. शैफाली नागपाल ने कोर्स की रूपरेखा प्रस्तुत की। कुलसचिव प्रो. डॉ. शिवालिक यादव ने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताया।
कोर्स समन्वयक डॉ. रेनू ने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन, हरित नवाचार और पर्यावरणीय नीतियों जैसे विषयों पर व्याख्यान देंगे।
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गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स सतत विकास लक्ष्य : इंटिग्रेटिंग क्लाइमेट एक्शन इंटो एवरी डिसिप्लिन का शुभारंभ किया गया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से 90 शिक्षकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसका प्रभाव समाज, अर्थव्यवस्था और शिक्षा के सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
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उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखकर सभी शैक्षणिक विषयों के अध्यापन और अनुसंधान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
मुख्य अतिथि गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जलवायु कार्रवाई को बहुविषयक दृष्टिकोण से जोड़ने और अनुसंधान व नवाचार के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर जोर दिया।
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केंद्र की निदेशक डॉ. शैफाली नागपाल ने कोर्स की रूपरेखा प्रस्तुत की। कुलसचिव प्रो. डॉ. शिवालिक यादव ने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताया।
कोर्स समन्वयक डॉ. रेनू ने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन, हरित नवाचार और पर्यावरणीय नीतियों जैसे विषयों पर व्याख्यान देंगे।