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चैत्र नवरात्र : भक्तों ने मां शैलपुत्री का पूजन कर की सुख-समृद्धि की कामना

Wed, 10 Apr 2024 04:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Wed, 10 Apr 2024 04:00 AM IST
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Chaitra Navratri: Devotees prayed for happiness and prosperity by worshiping Mother Shailputri.
सोनीपत। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मंगलवार को भक्तों ने मां शैलपुत्री की पूजा पूरे विधि विधान से की। जिले के मंदिरों में दिन भर मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर मत्था टेका और घर-परिवार व समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने सुबह अपने घर पर शुभ मुहूर्त में घट स्थापना कर पूजा अर्चना की। मंदिरों में मां की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। भक्तों की लंबी कतारें लगी रही।
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नवरात्र के दूसरे दिन बुधवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन माता के भक्त अपने मन को भगवती मां के चरणों में एकाग्रचित करके मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ब्रह्मचारिणी देवी भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप है।
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पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है स्वरूप

आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है, इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम अपने जिन देवी-देवताओं एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है, उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन से पूजा करें। उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत व मधु से भोग कराएं और देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं, उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता की पूजा करें। इनकी पूजा के बाद माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें।
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पूजन की विधि

देवी की पूजा करते समय पहले पंचामृत का भोग लगाएं और फिर लाल फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदुर अर्पित करें। घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
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