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परिवार पहचान पत्र से जुड़ेगा जाति प्रमाणपत्र, सरल पोर्टल पर ऑनलाइन मिलेगा
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अब जाति प्रमाणपत्र को परिवार पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं। अब तहसीलदार के बजाय अतिरिक्त उपायुक्त एवं नागरिक संसाधन सूचना अधिकारी की ओर से यह प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। लोगों को अब अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, टपरीवास, विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति से संबंधित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नंबरदार, पटवारी और न ही तहसील में चक्कर काटने पड़ेंगे।
उपायुक्त ललित सिवाच ने बताया कि अब आवेदक सिर्फ अपने परिवार पहचान पत्र नंबर के माध्यम से सरल पोर्टल पर आवेदन करेगा और उसे ऑनलाइन ही जाति प्रमाणपत्र मिल जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र बनाते समय आय भी देखी जाएगी। आय वही मान्य होगी जो परिवार पहचान पत्र में दर्ज होगी। आय इसलिए देखी जाएगी कि यदि कोई क्रीमीलेयर में आता है तो उसका प्रमाणपत्र प्रत्येक वर्ष 31 मार्च तक मान्य होगा। उन्होंने बताया कि जो क्रीमीलेयर में नहीं आते उनका प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जाति सत्यापित करने के लिए सक्षम अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले निवासी की जाति का सत्यापन नागरिक संसाधन सूचना विभाग की ओर से अधिकृत सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जबकि हरियाणा राज्य के विभाग, विश्वविद्यालय में कार्यरत स्थायी कर्मचारी की जाति का सत्यापन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगा।
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उपायुक्त ललित सिवाच ने बताया कि अब आवेदक सिर्फ अपने परिवार पहचान पत्र नंबर के माध्यम से सरल पोर्टल पर आवेदन करेगा और उसे ऑनलाइन ही जाति प्रमाणपत्र मिल जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र बनाते समय आय भी देखी जाएगी। आय वही मान्य होगी जो परिवार पहचान पत्र में दर्ज होगी। आय इसलिए देखी जाएगी कि यदि कोई क्रीमीलेयर में आता है तो उसका प्रमाणपत्र प्रत्येक वर्ष 31 मार्च तक मान्य होगा। उन्होंने बताया कि जो क्रीमीलेयर में नहीं आते उनका प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होगा। उपायुक्त ने बताया कि जाति सत्यापित करने के लिए सक्षम अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले निवासी की जाति का सत्यापन नागरिक संसाधन सूचना विभाग की ओर से अधिकृत सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जबकि हरियाणा राज्य के विभाग, विश्वविद्यालय में कार्यरत स्थायी कर्मचारी की जाति का सत्यापन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगा।
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