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Sonipat News: जेलर की धुनाई कर अंग्रेजों में पैदा कर दिया था खौफ
Thu, 10 Aug 2023 12:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 10 Aug 2023 12:46 AM IST
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स्वतंत्रता सेनानी बाबू महावीर प्रसाद जैन के चित्र पर दीप प्रज्वलित करती उनकी पत्नी शांता जैन। फ
विष्णु कुमार
सोनीपत। देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिकारियों का खून उबाल मार रहा था। वहीं अंग्रेज आजादी के लिए उठने वाली हर आवाज को कुचलने के प्रयास में जुटे हुए थे। इसके लिए वह अपने अचूक हथियार मुल्तान की जेल के कालिया जेलर और काला पानी का डर दिखाकर भारतीयों के दिलों में दहशत पैदा कर रहे थे। सोनीपत के स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की आवाज बुलंद रखने के लिए कालिया जेलर का फन कुचलने की योजना तैयार की और मुल्तान की जेल में जाकर कालिया जेलर की लाठियों से इस कदर पिटाई कर दी कि वह दोबारा मुल्तान की जेल में नहीं आया।
सन् 1940 के दशक में भारतीयों की आजादी की आवाज कुचलने के लिए मुल्तान के जेलर कालिया पूरे उत्तर भारत में बदनाम था। मुल्तान की जेल में जाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को कठोर यातनाएं दी जाती थीं। जिले के स्वतंत्रता सेनानियों में उठी आजादी की ज्वाला को दबाने और भारतीयों में अंग्रेजों की दहशत कायम रखने के लिए अंग्रेजों ने बाबू महावीर प्रसाद जैन, पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता चौ. रणबीर सिंह हुड्डा सहित दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को मुल्तान जेल में डाल दिया था। लेकिन इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने मुल्तान की जेल के जेलर कालिया के आगे अपने घुटने नहीं टेके।
ड्यूटी बदलने के समय किया हमला
अंग्रेजों ने रणबीर सिंह हुड्डा, देवीलाल, सोनीपत के महावीर प्रसाद जैन व राम प्रसाद पालीवाल सहित कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को मुल्तान जेल में डाल दिया था। जेलर कालिया ने जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर अत्यधिक जुल्म ढहाए। सोनीपत के स्वतंत्रता सेनानियों ने कालिया जेलर को सबक सिखाने और उसके खौफ को खत्म करने की योजना तैयार की। जब ड्यूटी पर तैनात वर्दीधारी अपने लठ व वर्दी उतार कर अलग हो गए और जेलर भी निजी काम से जेल के गेट के पास ही खड़ा था तो दर्जनभर स्वतंत्रता सेनानियों ने लाठियां उठाकर जेलर पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि सुरक्षाकर्मियों को जब तक कुछ समझ में आता, जेलर खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर चुका था। जेलर को मरा समझ स्वतंत्रता सेनानियों ने अन्य सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया। हालांकि जेलर इस हमले में बच गया पर वह लौटकर कई वर्षों तक मुल्तान की जेल में नहीं आया।
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एकता तोड़ने के लिए अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिए स्वतंत्रता सेनानी
जेलर पर हमले के बाद अंग्रेजों में खौफ पैदा हो गया था। तत्कालीन जिला रोहतक के स्वतंत्रता सेनानियों रणबीर सिंह हुड्डा, देवीलाल, बाबू महावीर प्रसाद जैन, राम प्रसाद पालीवाल, टेका, दलीप, चौ. हरिसिंह, सूरजभान, श्रीराम, मांगेराम, गिरधारी, चंद्रभान को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने इनकी एकता तोड़ने के लिए अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया। फिर भी अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के मतवालों का जज्बा कम नहीं हुआ था।
मुल्तान जेल में ढहाए जाते थे जुल्म
मुल्तान की जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर असहनीय जुल्म ढहाए जाते थे। हवालात की चौड़ाई चार फुट व ऊंचाई साढ़े चार फुट होती थी। जिसमें हवालाती न तो ठीक से लेट पाते थे, न ही खड़े हो पाते थे। जेल में विशेष सुरक्षाकर्मियों की टीम बनाई गई थी, जो जेलर के एक इशारे पर स्वतंत्रता सेनानियों पर जुल्म ढहाते और लाठियां बरसाना शुरू कर देते थे। बावजूद इसके जिले के स्वतंत्रता सेनानी अपने जज्बे व हिम्मत के बल पर अंग्रेजों के लिए सदा खौफ बना रहे।
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सोनीपत। देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिकारियों का खून उबाल मार रहा था। वहीं अंग्रेज आजादी के लिए उठने वाली हर आवाज को कुचलने के प्रयास में जुटे हुए थे। इसके लिए वह अपने अचूक हथियार मुल्तान की जेल के कालिया जेलर और काला पानी का डर दिखाकर भारतीयों के दिलों में दहशत पैदा कर रहे थे। सोनीपत के स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की आवाज बुलंद रखने के लिए कालिया जेलर का फन कुचलने की योजना तैयार की और मुल्तान की जेल में जाकर कालिया जेलर की लाठियों से इस कदर पिटाई कर दी कि वह दोबारा मुल्तान की जेल में नहीं आया।
सन् 1940 के दशक में भारतीयों की आजादी की आवाज कुचलने के लिए मुल्तान के जेलर कालिया पूरे उत्तर भारत में बदनाम था। मुल्तान की जेल में जाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को कठोर यातनाएं दी जाती थीं। जिले के स्वतंत्रता सेनानियों में उठी आजादी की ज्वाला को दबाने और भारतीयों में अंग्रेजों की दहशत कायम रखने के लिए अंग्रेजों ने बाबू महावीर प्रसाद जैन, पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता चौ. रणबीर सिंह हुड्डा सहित दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को मुल्तान जेल में डाल दिया था। लेकिन इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने मुल्तान की जेल के जेलर कालिया के आगे अपने घुटने नहीं टेके।
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ड्यूटी बदलने के समय किया हमला
अंग्रेजों ने रणबीर सिंह हुड्डा, देवीलाल, सोनीपत के महावीर प्रसाद जैन व राम प्रसाद पालीवाल सहित कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को मुल्तान जेल में डाल दिया था। जेलर कालिया ने जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर अत्यधिक जुल्म ढहाए। सोनीपत के स्वतंत्रता सेनानियों ने कालिया जेलर को सबक सिखाने और उसके खौफ को खत्म करने की योजना तैयार की। जब ड्यूटी पर तैनात वर्दीधारी अपने लठ व वर्दी उतार कर अलग हो गए और जेलर भी निजी काम से जेल के गेट के पास ही खड़ा था तो दर्जनभर स्वतंत्रता सेनानियों ने लाठियां उठाकर जेलर पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि सुरक्षाकर्मियों को जब तक कुछ समझ में आता, जेलर खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर चुका था। जेलर को मरा समझ स्वतंत्रता सेनानियों ने अन्य सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया। हालांकि जेलर इस हमले में बच गया पर वह लौटकर कई वर्षों तक मुल्तान की जेल में नहीं आया।
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एकता तोड़ने के लिए अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिए स्वतंत्रता सेनानी
जेलर पर हमले के बाद अंग्रेजों में खौफ पैदा हो गया था। तत्कालीन जिला रोहतक के स्वतंत्रता सेनानियों रणबीर सिंह हुड्डा, देवीलाल, बाबू महावीर प्रसाद जैन, राम प्रसाद पालीवाल, टेका, दलीप, चौ. हरिसिंह, सूरजभान, श्रीराम, मांगेराम, गिरधारी, चंद्रभान को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने इनकी एकता तोड़ने के लिए अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया। फिर भी अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के मतवालों का जज्बा कम नहीं हुआ था।
मुल्तान जेल में ढहाए जाते थे जुल्म
मुल्तान की जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर असहनीय जुल्म ढहाए जाते थे। हवालात की चौड़ाई चार फुट व ऊंचाई साढ़े चार फुट होती थी। जिसमें हवालाती न तो ठीक से लेट पाते थे, न ही खड़े हो पाते थे। जेल में विशेष सुरक्षाकर्मियों की टीम बनाई गई थी, जो जेलर के एक इशारे पर स्वतंत्रता सेनानियों पर जुल्म ढहाते और लाठियां बरसाना शुरू कर देते थे। बावजूद इसके जिले के स्वतंत्रता सेनानी अपने जज्बे व हिम्मत के बल पर अंग्रेजों के लिए सदा खौफ बना रहे।