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Sonipat News: जंगरोधी फाॅर्मूला बढ़ाएगा स्टील की उम्र, लंबे समय तक नहीं लगेगा जंग

Thu, 06 Mar 2025 02:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 06 Mar 2025 02:17 AM IST
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Anti-rust formula will increase the life of steel, it will not rust for a long time
फोटो 06- सोनीपत के मुरथल स्थित डीसीआरयूएसटी में कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह व अन्य के साथ शोध
सोनीपत। दीनबंधू छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल के रसायन विज्ञान विभाग ने माइल्ड स्टील की उम्र बढ़ाने वाला फॉर्मूला विकसित किया है। इसके इस्तेमाल से स्टील को लंबे समय तक जंग से बचाया जा सकेगा। यह नवाचार लोहे के रख रखाव की लागत में कमी लाएगा और पुलों, इमारतों व माइल्ड स्टील से बने उपकरणों की मजबूती व टिकाऊपन में सुधार करेगा। इस फॉर्मूले को भारतीय पेटेंट कार्यालय की तरफ से आधिकारिक मान्यता मिल गई है।
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रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. प्रीति पाहुजा सतीजा, प्रो. सुमन लता व डॉ. सुमित कुमार की टीम के प्रयोगों व परीक्षणों के बाद शोधकर्ताओं ने यह फाॅर्मूला तैयार किया है। इसमें तेल, हैलाइड आयन व सर्फेक्टेंट को एक सटीक अनुपात में मिलाया गया। यह मिश्रण माइल्ड स्टील की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जो उसे हवा, पानी व नमी के संपर्क में आने पर भी जंग से बचाता है। यह फाॅर्मूला सामान्य वातावरण ही नहीं, बल्कि हल्के अम्लीय परिस्थितियों में भी माइल्ड स्टील को दो से तीन दिन तक सुरक्षित रख सकता है।
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उद्योगों के लिए उपयोगी है शोध
माइल्ड स्टील का उपयोग पुल निर्माण, रेलवे ट्रैक, इमारतों के ढांचे, बॉयलर व भारी मशीनरी में बड़े पैमाने पर किया जाता है। नए फाॅर्मूले से माइल्ड स्टील की उम्र तो बढ़ेगी ही, खर्च भी कम होगा। साथ ही आधारभूत संरचना की सुरक्षा में भी सुधार होगा। इसे सीधे माइल्ड स्टील की सतह पर लगाया जा सकता है। इसे लगाने के लिए किसी विशेष उपकरण या महंगी मशीनरी की जरूरत नहीं है। छोटे व मध्यम स्तर के उद्योग भी इस तकनीक को अपना सकते हैं।
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फरवरी 2025 को मिली पेटेंट को मंजूरी
शोध दल का नेतृत्व करने वाली डॉ. प्रीति पाहुजा सतीजा ने बताया कि प्रो. सुमन लता और डॉ. सुमित कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने काम किया। इस नवाचार का पेटेंट पहली बार 7 अगस्त 2020 को प्रकाशित हुआ था। जांच व मूल्यांकन के बाद 27 फरवरी 2025 को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने इसे आधिकारिक मंजूरी दे दी। यह पेटेंट इस आविष्कार की नवीनता, औद्योगिक उपयोगिता और तकनीकी महत्व को प्रमाणित करता है।
मेक इन इंडिया पहल में बड़ी उपलब्धि
यह नवाचार मेक इन इंडिया अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो दर्शाता है कि स्वदेशी शोध कैसे विश्व स्तरीय समाधान दे सकता है। फॉर्मूले का व्यावसायिक उत्पादन होने पर यह उद्योगों में मानक जंगरोधी उपाय बन सकता है, जिससे देश को करोड़ों रुपये की बचत होगी व संरचनाएं ज्यादा सुरक्षित व टिकाऊ बनेंगी।

वर्जन-
-माइल्ड स्टील को जंग से बचाने के लिए विवि के रसायन विज्ञान विभाग की टीम ने किफायती व इस्तेमाल में आसान फाॅर्मूला विकसित किया है। जिसे भारतीय पेटेंट कार्यालय की तरफ से आधिकारिक मान्यता दी गई है। यह औद्योगिक नवाचार व देश की आर्थिक बचत में प्रत्यक्ष योगदान देगा।
- प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, कुलपति, डीसीआरयूएसटी, सोनीपत
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