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प्राचीन पांडुलिपियां समृद्ध सांस्कृतिक विरासत : डाॅ. ओपी परूथी
Sat, 09 May 2026 07:23 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 09 May 2026 07:23 PM IST
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फोटो: जीवीएम गर्ल्स कॉलेज में जागरूकता व्याख्यान के दौरान मौजूद छात्राएं व स्टाफ। स्रोत: कॉलेज
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। जीवीएम गर्ल्स कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत ज्ञानभारतम् पहल विषय पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया।
संस्था के प्रधान डाॅ. ओपी परूथी ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनमें इतिहास, दर्शन, विज्ञान, साहित्य, आयुर्वेद, ज्योतिष, धर्म व सामाजिक जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित हैं।
ये पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं हैं बल्कि भारत की बौद्धिक परंपरा और सभ्यता की पहचान भी हैं। आज आवश्यकता है कि इन धरोहरों का संरक्षण आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली इतिहास और ज्ञान से परिचित हो सकें।
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प्राचार्य डाॅ. मंजुला स्पाह ने कहा कि पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। डिजिटलीकरण आज के समय में संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। पांडुलिपियों को स्कैन करके डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
इससे उनके नष्ट होने का खतरा कम हो जाता है। डिजिटल संग्रह तैयार होने से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को घर बैठे दुर्लभ पांडुलिपियों तक पहुंच मिल सकती है।
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सोनीपत। जीवीएम गर्ल्स कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत ज्ञानभारतम् पहल विषय पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया।
संस्था के प्रधान डाॅ. ओपी परूथी ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनमें इतिहास, दर्शन, विज्ञान, साहित्य, आयुर्वेद, ज्योतिष, धर्म व सामाजिक जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित हैं।
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ये पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं हैं बल्कि भारत की बौद्धिक परंपरा और सभ्यता की पहचान भी हैं। आज आवश्यकता है कि इन धरोहरों का संरक्षण आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली इतिहास और ज्ञान से परिचित हो सकें।
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प्राचार्य डाॅ. मंजुला स्पाह ने कहा कि पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। डिजिटलीकरण आज के समय में संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। पांडुलिपियों को स्कैन करके डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
इससे उनके नष्ट होने का खतरा कम हो जाता है। डिजिटल संग्रह तैयार होने से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को घर बैठे दुर्लभ पांडुलिपियों तक पहुंच मिल सकती है।