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832 रोडवेज कर्मी काम पर लौटे, 167 आउटसोर्स कर्मियों को हटाया
Updated Sun, 04 Nov 2018 01:32 AM IST
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832 रोडवेज कर्मी काम पर लौटे, 167 आउटसोर्स कर्मियों को हटाया
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार की ओर से निजी बसों को परमिट जारी करने के विरोध में 18 दिन तक चली हड़ताल के बाद शनिवार को 832 कर्मचारी काम पर लौटे। वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद हड़ताल खत्म होते ही विभाग ने आउटसोर्स के तौर पर भर्ती किए गए 167 कर्मियों को हटा दिया। इस पर हटाए गए कर्मियों ने पुलिस लाइन में हंगामा किया, इसके बाद डीसी कार्यालय में ड्यूटी पर वापस लेने की मांग की। हड़ताल के दौरान दो बसों को टूटे हुए मिले। 18 दिन तक चली हड़ताल के चलते अनट्रेंड चालकों को स्टेयरिंग थमाए जाने से करीब 87 बसें खराब हो गईं। वहीं डिपो में करीब 4 करोड़ रुपये तक नुकसान हुआ। हड़ताल खत्म होने पर सभी रूटों पर रोडवेज बसें चलने से यात्रियों की दिक्कतें कम हुई है।
रोडवेज कर्मचारी 16 अक्टूबर को अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए थे। प्रदेश में 18 दिन तक चली कर्मचारियों की हड़ताल अब तक की सबसे लंबी हड़ताल रही। सरकार ने यात्रियों की सुविधा के लिए आउटसोर्स पर 167 कर्मचारियों को भर्ती किया था। विभाग ने 55 टूरिस्ट व स्कूल बसों को चलाया था। परिचालक के तौर पर होमगार्ड को तैनात किया गया। हड़ताल खत्म होने के बाद शनिवार को विभाग ने सोनीपत व गोहाना में आउटसोर्स पर लगे कर्मियों को हटा दिया। शनिवार सुबह पुलिस लाइन में बसों को लेने पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिकारियों ने बस चलाने से मना किया तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इसके बाद डीसी कार्यालय में हंगामा कर वेतन व नौकरी की मांग की।
कंप्यूटर खराब होने से 40 लाख टिकटों घपला, दो बसों के शीशे टूटे मिले
हड़ताल के दौरान होमगार्ड व कच्चे कंडेक्टरों को दी गई टिकटों का अधिकारी हिसाब नहीं लगा पा रहे हैं। कंप्यूटर खराब होने के कारण टिकटों का मिलान नहीं हो पा रहा है। करीब 40 लाख की टिकटों को कर्मचारियों को दिया गया, लेकिन उनका रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। अनट्रेंड चालकों को स्टेयरिंग थमाए जाने से बसों में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। वहीं 20 लाख रुपये प्रतिदिन सरकार को देने वाले सोनीपत डिपो में 18 दिन में करीब चार करोड़ का नुकसान हो चुका है। वहीं दो बसों के शीशे भी टूटे मिले हैं।
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हड़ताल के दौरान रोडवेज जीएम ने कर्मियों के खिलाफ कराया था मुकदमा
हड़ताल के दौरान रोडवेज जीएम जोगेंद्र सिंह रावल ने सिटी थाने में शिकायत देकर छह कर्मियों के खिलाफ मुकदमा कराया गया। उनमें सोनीपत बस अड्डे के स्टैंड ईंचार्ज समेत छह कर्मियों के खिलाफ एस्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब कर्मियों पर लगे मुकदमे हटवाने की तैयारी सरकार करेगी।
वर्जन
हड़ताल के दौरान यात्रियों को सुविधा देने का हरसंभव प्रयास किया गया। कर्मचारियों की हड़ताल से विभाग को करीब चार करोड़ का नुकसान हो चुका है। अनट्रेंड चालकों से बसों में हुई खराबी, टिकटों को लेकर बताई जा रही गड़बड़ी का आंकलन किया जा रहा है। पुलिस लाइन में दो बसों के शीशे भी टूटे हुए मिले हैं। वहीं हड़ताल से कर्मचारियों के वापस आने से आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों को हटा दिया गया है। -जोगिंद्र सिंह, जीएम रोडवेज
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार की ओर से निजी बसों को परमिट जारी करने के विरोध में 18 दिन तक चली हड़ताल के बाद शनिवार को 832 कर्मचारी काम पर लौटे। वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद हड़ताल खत्म होते ही विभाग ने आउटसोर्स के तौर पर भर्ती किए गए 167 कर्मियों को हटा दिया। इस पर हटाए गए कर्मियों ने पुलिस लाइन में हंगामा किया, इसके बाद डीसी कार्यालय में ड्यूटी पर वापस लेने की मांग की। हड़ताल के दौरान दो बसों को टूटे हुए मिले। 18 दिन तक चली हड़ताल के चलते अनट्रेंड चालकों को स्टेयरिंग थमाए जाने से करीब 87 बसें खराब हो गईं। वहीं डिपो में करीब 4 करोड़ रुपये तक नुकसान हुआ। हड़ताल खत्म होने पर सभी रूटों पर रोडवेज बसें चलने से यात्रियों की दिक्कतें कम हुई है।
रोडवेज कर्मचारी 16 अक्टूबर को अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए थे। प्रदेश में 18 दिन तक चली कर्मचारियों की हड़ताल अब तक की सबसे लंबी हड़ताल रही। सरकार ने यात्रियों की सुविधा के लिए आउटसोर्स पर 167 कर्मचारियों को भर्ती किया था। विभाग ने 55 टूरिस्ट व स्कूल बसों को चलाया था। परिचालक के तौर पर होमगार्ड को तैनात किया गया। हड़ताल खत्म होने के बाद शनिवार को विभाग ने सोनीपत व गोहाना में आउटसोर्स पर लगे कर्मियों को हटा दिया। शनिवार सुबह पुलिस लाइन में बसों को लेने पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिकारियों ने बस चलाने से मना किया तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इसके बाद डीसी कार्यालय में हंगामा कर वेतन व नौकरी की मांग की।
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कंप्यूटर खराब होने से 40 लाख टिकटों घपला, दो बसों के शीशे टूटे मिले
हड़ताल के दौरान होमगार्ड व कच्चे कंडेक्टरों को दी गई टिकटों का अधिकारी हिसाब नहीं लगा पा रहे हैं। कंप्यूटर खराब होने के कारण टिकटों का मिलान नहीं हो पा रहा है। करीब 40 लाख की टिकटों को कर्मचारियों को दिया गया, लेकिन उनका रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। अनट्रेंड चालकों को स्टेयरिंग थमाए जाने से बसों में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। वहीं 20 लाख रुपये प्रतिदिन सरकार को देने वाले सोनीपत डिपो में 18 दिन में करीब चार करोड़ का नुकसान हो चुका है। वहीं दो बसों के शीशे भी टूटे मिले हैं।
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हड़ताल के दौरान रोडवेज जीएम ने कर्मियों के खिलाफ कराया था मुकदमा
हड़ताल के दौरान रोडवेज जीएम जोगेंद्र सिंह रावल ने सिटी थाने में शिकायत देकर छह कर्मियों के खिलाफ मुकदमा कराया गया। उनमें सोनीपत बस अड्डे के स्टैंड ईंचार्ज समेत छह कर्मियों के खिलाफ एस्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब कर्मियों पर लगे मुकदमे हटवाने की तैयारी सरकार करेगी।
वर्जन
हड़ताल के दौरान यात्रियों को सुविधा देने का हरसंभव प्रयास किया गया। कर्मचारियों की हड़ताल से विभाग को करीब चार करोड़ का नुकसान हो चुका है। अनट्रेंड चालकों से बसों में हुई खराबी, टिकटों को लेकर बताई जा रही गड़बड़ी का आंकलन किया जा रहा है। पुलिस लाइन में दो बसों के शीशे भी टूटे हुए मिले हैं। वहीं हड़ताल से कर्मचारियों के वापस आने से आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों को हटा दिया गया है। -जोगिंद्र सिंह, जीएम रोडवेज