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छात्रों के पैसे से लगे कर्मचारी, अधिकारियों के घर में कर रहे काम
Updated Tue, 13 Jun 2017 05:31 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में जिम्मेदार लोगों की कारगुजारी कम नहीं हो रही है। वहां ऐसी ही एक नई कारगुजारी सामने आई है, जिसमें छात्रों के पैसे से लगे कर्मचारियों से अधिकारी अपने घरों में काम करा रहे हैं। यह कर्मचारी हॉस्टल में काम करने के लिए लगे हुए हैं और उनमें से कई ऐसे कर्मचारी हैं, जिनसे हॉस्टल की जगह अधिकारी अपने घरों के काम करा रहे हैं। यह काम कोई अभी शुरू नहीं हुआ है, बल्कि कई महीने से चल रहा है। अब यह मामला वीसी के सामने आया तो उन्होंने इसकी जांच कराने की बात कही है। इससे हॉस्टल के जिम्मेदारों तक भी जांच की आंच पहुंच सकती है।
केवल हॉस्टल का काम करने को बाध्य
यूनिवर्सिटी फीस के अलावा हॉस्टल के लिए छात्र-छात्राओं से अलग से पैसे लिए जाते हैं, जिसके सहारे ही उनके खाने से लेकर वहां काम करने वाले कर्मचारियों तक का खर्चा होता है। छात्रों के उस पैसे से जिन कर्मचारियों को रखा जाता है, वह केवल हॉस्टल में काम करने के लिए बाध्य हैं। उनसे हॉस्टल में सफाई से लेकर ऐसे अन्य कार्य कराए जा सकते हैं, लेकिन मुरथल विवि में कुछ अलग ही नियम दिख रहे हैं। वहां इन कर्मचारियों से अधिकारियों के घरों में काम कराया जा रहा है। उन कर्मचारियों को केवल यूनिवर्सिटी के काम करने होते हैं और उनको हॉस्टल की जिम्मेदारी से दूर रखा जाता है।
गेस्ट हाउस के बिगड़े हालात, अधिकारी भी भूखे
यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस के हालात भी काफी बिगड़ चुके हैं, जहां नाश्ता बनाने से लेकर खाने तक के लिए रुपया जारी नहीं किया जा रहा है। वहां के पिछले एक महीने के सभी बिल रोक दिए गए हैं, जिससे सरकारी व अन्य अधिकारियों को वहां रुककर भूखा रहना पड़ता है या बाहर जाकर भूख मिटानी पड़ती है। वहां किसी अधिकारी को रोका जाता है तो केयर टेकर की ओर से साफ कह दिया जाता है कि वहां किसी को खाना नहीं मिलेगा क्योंकि गेस्ट हाउस में खाने के सभी बिल पेंडिंग पड़े हैं। इस तरह यूनिवर्सिटी में मेहमानों के साथ भी इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
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वर्जन
हॉस्टल में छात्रों के पैसे से कर्मचारी लगाए जाते हैं और वह केवल हॉस्टल में काम कर सकते हैं। वे किसी अधिकारी के घर काम कर रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं जहां तक गेस्ट हाउस में नाश्ते व खाने की बात है तो यह मामला अभी तक मेरे सामने नहीं आया था। अब इसमें दिखवाया जाएगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। जब कोई गेस्ट आता है तो उसको खाने की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी की होती है और ऐसा नहीं होने पर गलत मेसेज जाता है।
-प्रो. टंकेश्वर कुमार, वीसी, मुरथल विवि
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में जिम्मेदार लोगों की कारगुजारी कम नहीं हो रही है। वहां ऐसी ही एक नई कारगुजारी सामने आई है, जिसमें छात्रों के पैसे से लगे कर्मचारियों से अधिकारी अपने घरों में काम करा रहे हैं। यह कर्मचारी हॉस्टल में काम करने के लिए लगे हुए हैं और उनमें से कई ऐसे कर्मचारी हैं, जिनसे हॉस्टल की जगह अधिकारी अपने घरों के काम करा रहे हैं। यह काम कोई अभी शुरू नहीं हुआ है, बल्कि कई महीने से चल रहा है। अब यह मामला वीसी के सामने आया तो उन्होंने इसकी जांच कराने की बात कही है। इससे हॉस्टल के जिम्मेदारों तक भी जांच की आंच पहुंच सकती है।
केवल हॉस्टल का काम करने को बाध्य
यूनिवर्सिटी फीस के अलावा हॉस्टल के लिए छात्र-छात्राओं से अलग से पैसे लिए जाते हैं, जिसके सहारे ही उनके खाने से लेकर वहां काम करने वाले कर्मचारियों तक का खर्चा होता है। छात्रों के उस पैसे से जिन कर्मचारियों को रखा जाता है, वह केवल हॉस्टल में काम करने के लिए बाध्य हैं। उनसे हॉस्टल में सफाई से लेकर ऐसे अन्य कार्य कराए जा सकते हैं, लेकिन मुरथल विवि में कुछ अलग ही नियम दिख रहे हैं। वहां इन कर्मचारियों से अधिकारियों के घरों में काम कराया जा रहा है। उन कर्मचारियों को केवल यूनिवर्सिटी के काम करने होते हैं और उनको हॉस्टल की जिम्मेदारी से दूर रखा जाता है।
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गेस्ट हाउस के बिगड़े हालात, अधिकारी भी भूखे
यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस के हालात भी काफी बिगड़ चुके हैं, जहां नाश्ता बनाने से लेकर खाने तक के लिए रुपया जारी नहीं किया जा रहा है। वहां के पिछले एक महीने के सभी बिल रोक दिए गए हैं, जिससे सरकारी व अन्य अधिकारियों को वहां रुककर भूखा रहना पड़ता है या बाहर जाकर भूख मिटानी पड़ती है। वहां किसी अधिकारी को रोका जाता है तो केयर टेकर की ओर से साफ कह दिया जाता है कि वहां किसी को खाना नहीं मिलेगा क्योंकि गेस्ट हाउस में खाने के सभी बिल पेंडिंग पड़े हैं। इस तरह यूनिवर्सिटी में मेहमानों के साथ भी इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।
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हॉस्टल में छात्रों के पैसे से कर्मचारी लगाए जाते हैं और वह केवल हॉस्टल में काम कर सकते हैं। वे किसी अधिकारी के घर काम कर रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं जहां तक गेस्ट हाउस में नाश्ते व खाने की बात है तो यह मामला अभी तक मेरे सामने नहीं आया था। अब इसमें दिखवाया जाएगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। जब कोई गेस्ट आता है तो उसको खाने की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी की होती है और ऐसा नहीं होने पर गलत मेसेज जाता है।
-प्रो. टंकेश्वर कुमार, वीसी, मुरथल विवि