{"_id":"5c15527dbdec22553e4fa4e4","slug":"151544901245-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा के चेयरमैन ने 1.12 करोड़ के घपले का खुलासा कराया, सरकार ने जांच कराकर दो साल से दबाई फाइल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा के चेयरमैन ने 1.12 करोड़ के घपले का खुलासा कराया, सरकार ने जांच कराकर दो साल से दबाई फाइल
Updated Sun, 16 Dec 2018 01:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के चेयरमैन ने 1.12 करोड़ के घपले का खुलासा कराया, सरकार ने जांच कराकर दो साल से फाइल दबाई
अंकित चौहान
सोनीपत। सीएम मनोहर लाल भले ही अपनी सरकार में भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म होने का दावा करते हों। लेकिन सीएम के यह दावे पूरी तरह से हवाई साबित हो रहे हैं। भाजपा सरकार में उनके ही पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने पंचायतों के लिए वाटर कूलर व डस्टबिन खरीद में 1.12 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा कराया और उसकी जांच रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई। लेकिन पिछले दो साल से सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को दबाया हुआ है, जिसमें खुद चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा भी कई बार कार्रवाई के लिए चक्कर काट चुके हैं। वहीं मामला पीएमओ तक पहुंचा और वहां से संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन दोबारा रिपोर्ट देने के बाद उसे भी दबा दिया गया है।
यह था पूरा मामला
हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने वर्ष 2016 में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में घपले का मामला उठाया था। जांगड़ा ने आरोप लगाए थे कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटर कूलर, डस्टबिन, आरओ सिस्टम तथा स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था। वित्त आयोग की ओर से 209 करोड़ रुपये पूरे हरियाणा में पंचायतों के खाते में आए थे, जिसमें से सोनीपत जिले को छह करोड़ रुपये मिले थे। प्रदेश में 2015 के आखिर में सरपंचों का कार्यकाल खत्म होने पर गांवों में बीडीपीओ को प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिनके पास 2016 में चुनाव होकर शपथ लेने तक उनके पास ही पंचायतों की जिम्मेदारी रही थी। इस दौरान ही पांच ब्लॉक के बीडीपीओ ने पंचायतों के खातों में जमा करोड़ों रुपये निकालकर डस्टबिन व वाटर कूलर खरीदे थे। इनकी कीमत लाखों में दिखाई गई थी, लेकिन वास्तव में कीमत काफी कम थी। बाजार में उस समय प्रति डस्टबिन की कीमत 900 रुपये थी, जबकि खरीद कीमत 3500 रुपये दिखाई गई थी। वहीं बाजार में प्रति वाटर कूलर की कीमत 35 हजार रुपये है, जबकि अधिकारियों द्वारा इसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये बताई गई थी। इसकी जांच डीसी केएम पांडुरंग को सौंपी गई थी।
डीसी की रिपोर्ट में 1.12 करोड़ का घपला मिला
डीसी केएम पांडुरंग की जांच में गन्नौर, खरखौदा, गोहाना, सोनीपत, राई के बीडीपीओ दोषी मिले थे। जिनपर 1.12 करोड़ रुपये के घपले का आरोप था और इसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व शासन को भेजी गई थी। लेकिन दो साल होने के बाद भी मामले में कुछ नहीं किया गया। इसमें भोगीपुर राजलू गांव के नरेंद्र राठी की ओर से एक शिकायत पीएम नरेंद्र मोदी के नाम भेजी गई, जिसमें पूरे मामले को बताते हुए सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया। जिसमें पीएमओ से शासन को पत्र भेजा गया और उसके आधार पर डीसी से 2017 में दोबारा रिपोर्ट मांगी। उस रिपोर्ट को दोबारा भेजा गया, लेकिन उसके बावजूद अभी तक सरकार ने फाइल दबाई हुई है।
विज्ञापन
इस तरह हुआ खुलासा
-गन्नौर ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आरओ सिस्टम, वाटर कूलर व स्टेबलाइजर के सेट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए। ये सामान 99 लाख 78 हजार 255 रुपये में खरीदा गया बताया गया है। इस कीमत में टैक्स भी शामिल है, जबकि जांच में पाया गया इस सामान की बाजार में कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपये है।
-खरखौदा ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों के लिए एक वाटर कूलर सैट व 833 डस्टबिन खरीदे थे। इनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए बताई गई थी, जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए मिली है।
-गोहाना की 31 पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सैट व 1871 डस्टबिनों की खरीद की। इनकी कीमत एक करोड़ आठ लाख 45 हजार 340 रुपये बताई गई थी, जबकि इनका बाजार भाव जांच में 72 लाख 14 हजार 27 रुपये मिला है।
-सोनीपत ब्लॉक की 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीद थे। इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपये पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार रुपये में बताई गई थी।
-राई की एक पंचायत के लिए 70 डस्टबिन खरीदे और इनकी कीमत पांच लाख 74 हजार 700 रुपये बताई गई थी। इनकी वास्तविक कीमत पांच लाख 45 हजार रुपये मिली है।
--
मेरी शिकायत पर डीसी ने जांच करके पांच बीडीपीओ को दोषी ठहराया था और उसकी रिपोर्ट शासन में भेजी थी। वह फाइल अभी तक दबी हुई है, जबकि मैने कई बार इस मामले में वहां जाकर कार्रवाई की मांग की। -रामचंद्र जांगड़ा, चेयरमैन पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम
विज्ञापन
अंकित चौहान
सोनीपत। सीएम मनोहर लाल भले ही अपनी सरकार में भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म होने का दावा करते हों। लेकिन सीएम के यह दावे पूरी तरह से हवाई साबित हो रहे हैं। भाजपा सरकार में उनके ही पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने पंचायतों के लिए वाटर कूलर व डस्टबिन खरीद में 1.12 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा कराया और उसकी जांच रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई। लेकिन पिछले दो साल से सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को दबाया हुआ है, जिसमें खुद चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा भी कई बार कार्रवाई के लिए चक्कर काट चुके हैं। वहीं मामला पीएमओ तक पहुंचा और वहां से संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन दोबारा रिपोर्ट देने के बाद उसे भी दबा दिया गया है।
यह था पूरा मामला
हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने वर्ष 2016 में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में घपले का मामला उठाया था। जांगड़ा ने आरोप लगाए थे कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटर कूलर, डस्टबिन, आरओ सिस्टम तथा स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था। वित्त आयोग की ओर से 209 करोड़ रुपये पूरे हरियाणा में पंचायतों के खाते में आए थे, जिसमें से सोनीपत जिले को छह करोड़ रुपये मिले थे। प्रदेश में 2015 के आखिर में सरपंचों का कार्यकाल खत्म होने पर गांवों में बीडीपीओ को प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिनके पास 2016 में चुनाव होकर शपथ लेने तक उनके पास ही पंचायतों की जिम्मेदारी रही थी। इस दौरान ही पांच ब्लॉक के बीडीपीओ ने पंचायतों के खातों में जमा करोड़ों रुपये निकालकर डस्टबिन व वाटर कूलर खरीदे थे। इनकी कीमत लाखों में दिखाई गई थी, लेकिन वास्तव में कीमत काफी कम थी। बाजार में उस समय प्रति डस्टबिन की कीमत 900 रुपये थी, जबकि खरीद कीमत 3500 रुपये दिखाई गई थी। वहीं बाजार में प्रति वाटर कूलर की कीमत 35 हजार रुपये है, जबकि अधिकारियों द्वारा इसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये बताई गई थी। इसकी जांच डीसी केएम पांडुरंग को सौंपी गई थी।
विज्ञापन
डीसी की रिपोर्ट में 1.12 करोड़ का घपला मिला
डीसी केएम पांडुरंग की जांच में गन्नौर, खरखौदा, गोहाना, सोनीपत, राई के बीडीपीओ दोषी मिले थे। जिनपर 1.12 करोड़ रुपये के घपले का आरोप था और इसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व शासन को भेजी गई थी। लेकिन दो साल होने के बाद भी मामले में कुछ नहीं किया गया। इसमें भोगीपुर राजलू गांव के नरेंद्र राठी की ओर से एक शिकायत पीएम नरेंद्र मोदी के नाम भेजी गई, जिसमें पूरे मामले को बताते हुए सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया। जिसमें पीएमओ से शासन को पत्र भेजा गया और उसके आधार पर डीसी से 2017 में दोबारा रिपोर्ट मांगी। उस रिपोर्ट को दोबारा भेजा गया, लेकिन उसके बावजूद अभी तक सरकार ने फाइल दबाई हुई है।
विज्ञापन
इस तरह हुआ खुलासा
-गन्नौर ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आरओ सिस्टम, वाटर कूलर व स्टेबलाइजर के सेट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए। ये सामान 99 लाख 78 हजार 255 रुपये में खरीदा गया बताया गया है। इस कीमत में टैक्स भी शामिल है, जबकि जांच में पाया गया इस सामान की बाजार में कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपये है।
-खरखौदा ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों के लिए एक वाटर कूलर सैट व 833 डस्टबिन खरीदे थे। इनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए बताई गई थी, जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए मिली है।
-गोहाना की 31 पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सैट व 1871 डस्टबिनों की खरीद की। इनकी कीमत एक करोड़ आठ लाख 45 हजार 340 रुपये बताई गई थी, जबकि इनका बाजार भाव जांच में 72 लाख 14 हजार 27 रुपये मिला है।
-सोनीपत ब्लॉक की 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीद थे। इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपये पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार रुपये में बताई गई थी।
-राई की एक पंचायत के लिए 70 डस्टबिन खरीदे और इनकी कीमत पांच लाख 74 हजार 700 रुपये बताई गई थी। इनकी वास्तविक कीमत पांच लाख 45 हजार रुपये मिली है।
--
मेरी शिकायत पर डीसी ने जांच करके पांच बीडीपीओ को दोषी ठहराया था और उसकी रिपोर्ट शासन में भेजी थी। वह फाइल अभी तक दबी हुई है, जबकि मैने कई बार इस मामले में वहां जाकर कार्रवाई की मांग की। -रामचंद्र जांगड़ा, चेयरमैन पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम