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युवा पीढ़ी को नशे से बचाने को 44 गांव नहीं चाहते शराब का ठेका

Fri, 05 Jan 2018 01:25 AM IST
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:25 AM IST
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युवा पीढ़ी को नशे से बचाने को 44 गांव नहीं चाहते शराब का ठेका
अमर उजाला ब्यूरो
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गोहाना/खरखौदा/राई। सरकार को जहां शराब से बड़ा रेवन्यू मिलता है और उसको देखते हुए गांवों में शराब के ठेके खोले जा रहे हैं। वहीं जिले के 44 गांव युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के साथ ही गांव में शांति बनाए रखने के लिए अपने यहां शराब का ठेका नहीं चाहते हैं। इन 44 पंचायतों ने अपने यहां शराब के ठेके बंद कराने के लिए आवेदन किया है। जिनमें से 18 पंचायतों में ठेके नहीं खोलने का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है तो 26 के लिए अभी फैसला होना बाकी है। पंचायतों ने युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के साथ ही गांव में शराब के ठेके से माहौल बिगड़ने व महिलाओं को परेशानी होने का तर्क दिया है।

महिलाओं को होती है परेशानी
गढ़ी सिसाना के सरपंच शीशपाल ने कहा कि उनके गांव में शराब का ठेका उस रास्ते पर पड़ता है, जहां से महिलाओं का आना-जाना है। वहां से महिलाएं गोबर डालने व खेतों में जाती हैं। जिससे महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा रात को लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो जाता है। शराबी शराब पीकर हंगामा करते है। इस कारण ही शराब का ठेका गांव से हटवाना चाहते है।
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शीशपाल, सरपंच

युवा पीढ़ी को नशे से बचाने को बंद हो ठेका
गांव थाना कलां के सरपंच बलराम कहते है कि उनके गांव में ठेके पर असामाजिक तत्व बैठे रहते हैं और वह स्कूल के नजदीक है। इसके अलावा वहां गाडिय़ों में शराब लाई जाती है, जिनपर बाहरी लोग आते है और वह लोगों को परेशान करते है। ठेके के पास ही महिलाओं से चैन व कुंडल छीन लिए गए थे। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या है कि युवा पीढ़ी भी नशे में अपना जीवन घोल रही है। इस कारण गांव से शराब का ठेका हटना चाहिए।
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बलराम, सरपंच

युवा पीढ़ी पर पड़ रहा बुरा असर
रोहणा गांव की सरपंच सरोज का कहना है कि शराब के ठेके से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिससे युवा पीढ़ी पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा गांव की महिलाएं भी यहां ठेका होने से परेशान है, क्योंकि शराबी आए दिन शराब पीकर हंगामा करते है। इसलिए गांव से शराब का ठेका हटवाने का बीड़ा महिलाओं ने उठाया हुआ है।
सरोज, सरपंच

युवाओं का भविष्य बचाने को ठेका हटवाना जरूरी
ककाना भादरी गांव के सरपंच प्रवीन कुमार कहते है कि गांव में शांति कायम करने व आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए शराब को बंद कराना जरूरी है। इसके लिए पंचायत की ओर से पहल की गई है और गांव में बना ठेका हटवाने के लिए प्रस्ताव पास कर सरकार के पास भेजा गया है। गांव के लोग विशेषकर युवा वर्ग शराब का आदि होकर अपना भविष्य खराब कर रहा है। युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए ठेका हटाना जरूरी है।
प्रवीन, सरपंच

बेटियों के साथ होता है अभद्र व्यवहार
गांव खानपुर कलां की सरपंच पूनम ने कहा कि पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर गांव में बने शराब के ठेके हटाने की मांग की है। गांव में शराब का ठेका होने से रात भर हुडदंग मचा रहता है। शराब के नशे में धुत होकर बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। गांव के अंदर ठेका होने से आपसी विवाद भी बढ़ रहे हैं।
पूनम, सरपंच

शराब के ठेके के कारण होते हैं झगड़े
जौली गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह कहते है कि गांव में जहां शराब का ठेका बना हुआ है। वहां हर समय गांव के दर्जनों लोग जमघट बनाकर बैठे रहते हैं। इससे गांव का माहौल भी खराब हो रहा है। गांव के बिगड़ते माहौल व भाईचारे को बनाए रखने के लिए पंचायत से गांव से शराब का ठेका हटवाने का फैसला लिया है। शराब के नशे में धुत होकर लोग गांव में झगड़ा करते हैं। इसलिए पंचायत ने सरकार से ठेका हटाने की मांग की है।

राजेंद्र सिंह, सरपंच

भाईचारा के लिए ठेका हटना जरूरी
जैनपुर गांव की सरपंच निर्मला कहती है कि गांव में शराब का ठेका होने से युवा पीढ़ी अपने रास्ते से भटक जाती है और वह नशे की जद में आने से उसका भविष्य खराब हो जाता है। इसके अलावा गांव में शांति व्यवस्था भी बिगड़ती है और उससे भाईचारा खराब होता है। इस कारण ही गांव से शराब का ठेका हटवाना चाहते है और उसके लिए ही आवेदन किया है।
निर्मला, सरपंच
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