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26 जून के बाद जला ट्रांसफार्मर तो बढ़ेगी मुसीबत
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
ट्रांसफार्मर बदलने के दौरान लगने वाले सामान की कमी होने पर उसकी रिकवरी कनिष्ठ अभियंता (जेई) के वेतन से करने के निर्णय पर निगम कर्मियों में रोष है। कनिष्ठ अभियंता इसे लेकर 26 जून को नया ट्रांसफार्मर इश्यू कराने से मना चुके हैं। ऐसे में अगर अब ट्रांसफार्मर खराब होगा तो क्षेत्र में बिजली संकट गहरा जाएगा। कर्मियों का आरोप है कि वह इसे लेकर विधायक से लेकर मुख्यमंत्री व आला अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिससे अब उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
बिजली निगम के कनिष्ठ अभियंता एचएसईबी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर तले एक माह से रोष जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें नए एवं पुराने सामान का इंचार्ज बनाया गया है। साथ ही उनके अधिकार क्षेत्र में सार्वजनिक व खेतों में ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं। इनकी सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। जब उस ट्रांसफार्मर की समय अवधि समाप्त हो जाती है तो वह स्टोर में वापस चला जाता है। उस ट्रांसफार्मर में जो भी सामान या तेल कम पाया जाता है तो वह नए रेट के आधार पर जेई के वेतन से काटने काला कानून बना दिया गया है। इसके लिए किसी अन्य कर्मचारी व अधिकारी को दोषी नहीं माना जाता। विभाग की इस नीति से कनिष्ठ अभियंताओं में रोष है।
अब कनिष्ठ अभियंता इसके खिलाफ 26 जून से पूरे प्रदेश में कोई ट्रांसफार्मर स्टोर से निकलवाने का ऐलान कर चुके है। साथ ही मांगें पूरी नहीं होती तो 10 जुलाई को सभी काम बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं।
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कनिष्ठ अभियंता पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। अगर सामान की रिकवरी के ही आदेश देने हैं तो इसे जेई के साथ एसडीओ, एक्सईएन, एसई व अन्य अधिकारियों पर लागू किया जाए। यह काला कानून सिर्फ हरियाणा में बनाया गया है।
प्रदीप खोखर, महासचिव, एचएसईबी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन
26 जून के बाद जला ट्रांसफार्मर तो बढ़ेगी मुसीबत
कनिष्ठ अभियंता ट्रांसफार्मर इश्यू कराने से कर चुके हैं मना
सैलरी से ट्रांसफार्मर बदलने में लगने वाले सामान की रिकवरी के आदेश से हैं खफा
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सोनीपत।
ट्रांसफार्मर बदलने के दौरान लगने वाले सामान की कमी होने पर उसकी रिकवरी कनिष्ठ अभियंता (जेई) के वेतन से करने के निर्णय पर निगम कर्मियों में रोष है। कनिष्ठ अभियंता इसे लेकर 26 जून को नया ट्रांसफार्मर इश्यू कराने से मना चुके हैं। ऐसे में अगर अब ट्रांसफार्मर खराब होगा तो क्षेत्र में बिजली संकट गहरा जाएगा। कर्मियों का आरोप है कि वह इसे लेकर विधायक से लेकर मुख्यमंत्री व आला अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिससे अब उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
बिजली निगम के कनिष्ठ अभियंता एचएसईबी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर तले एक माह से रोष जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें नए एवं पुराने सामान का इंचार्ज बनाया गया है। साथ ही उनके अधिकार क्षेत्र में सार्वजनिक व खेतों में ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं। इनकी सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। जब उस ट्रांसफार्मर की समय अवधि समाप्त हो जाती है तो वह स्टोर में वापस चला जाता है। उस ट्रांसफार्मर में जो भी सामान या तेल कम पाया जाता है तो वह नए रेट के आधार पर जेई के वेतन से काटने काला कानून बना दिया गया है। इसके लिए किसी अन्य कर्मचारी व अधिकारी को दोषी नहीं माना जाता। विभाग की इस नीति से कनिष्ठ अभियंताओं में रोष है।
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अब कनिष्ठ अभियंता इसके खिलाफ 26 जून से पूरे प्रदेश में कोई ट्रांसफार्मर स्टोर से निकलवाने का ऐलान कर चुके है। साथ ही मांगें पूरी नहीं होती तो 10 जुलाई को सभी काम बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं।
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कनिष्ठ अभियंता पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है। अगर सामान की रिकवरी के ही आदेश देने हैं तो इसे जेई के साथ एसडीओ, एक्सईएन, एसई व अन्य अधिकारियों पर लागू किया जाए। यह काला कानून सिर्फ हरियाणा में बनाया गया है।
प्रदीप खोखर, महासचिव, एचएसईबी डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन
26 जून के बाद जला ट्रांसफार्मर तो बढ़ेगी मुसीबत
कनिष्ठ अभियंता ट्रांसफार्मर इश्यू कराने से कर चुके हैं मना
सैलरी से ट्रांसफार्मर बदलने में लगने वाले सामान की रिकवरी के आदेश से हैं खफा