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जीएसटी बचत उत्सव मनाने के बजाय किसानों की सुने सरकार : सिहाग
Mon, 29 Sep 2025 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 29 Sep 2025 12:03 AM IST
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डबवाली। हलका डबवाली के पूर्व विधायक अमित सिहाग ने कहा कि आपदा से परेशान जनता को उसके हाल पर छोड़कर सरकार जीएसटी महोत्सव मना रही है। महिलाएं डीएपी के लिए और किसान गेट पास के लिए लाइन में खड़े हैं। भाखड़ा जलाशय लबालब होने के बावजूद नहरें खाली होने पर भी उन्होंने चिंता जताई।
यहां जारी बयान में पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार सेवा पखवाड़ा मनाने का केवल ढोंग कर रही है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी फसल खराब होने पर उचित मुआवजा देगी लेकिन सरकार ने खराबे की गिरदावरी भी नहीं करवाई है।
पूर्व विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री को मंडियों में आकर किसानों का हाल देखना चाहिए। चुनाव से पहले किए गए वायदे अनुसार धान का मूल्य 3,100 रुपये देने के बजाय पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये और बाजरे का 2,785 रुपये घोषित किया लेकिन धान 1,900 रुपये और बाजरा 2,150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है।
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पूर्व विधायक सिहाग ने कहा कि सरकार ने ड्रोन के माध्यम से पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज करने की तैयारी की है लेकिन पराली प्रबंधन के लिए केवल 1,200 रुपये प्रति एकड़ देना किसानों से अन्याय है। यह राशि 5,000 रुपये प्रति एकड़ होनी चाहिए।
पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार जिस ड्रोन से पराली जलाने पर केस दर्ज करवा रही है अगर उसी ड्रोन से मंडियों का हाल देखती तो उन्हें सच्चाई का पता चलता। इसी अनदेखी के कारण भाखड़ा जलाशय लबालब होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं है। हलका डबवाली के चौटाला और आसाखेड़ा माइनर में पानी चलाने के लिए किसान मजबूरन धरना, प्रदर्शन कर रहे हैं।
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यहां जारी बयान में पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार सेवा पखवाड़ा मनाने का केवल ढोंग कर रही है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी फसल खराब होने पर उचित मुआवजा देगी लेकिन सरकार ने खराबे की गिरदावरी भी नहीं करवाई है।
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पूर्व विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री को मंडियों में आकर किसानों का हाल देखना चाहिए। चुनाव से पहले किए गए वायदे अनुसार धान का मूल्य 3,100 रुपये देने के बजाय पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये और बाजरे का 2,785 रुपये घोषित किया लेकिन धान 1,900 रुपये और बाजरा 2,150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है।
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पूर्व विधायक सिहाग ने कहा कि सरकार ने ड्रोन के माध्यम से पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज करने की तैयारी की है लेकिन पराली प्रबंधन के लिए केवल 1,200 रुपये प्रति एकड़ देना किसानों से अन्याय है। यह राशि 5,000 रुपये प्रति एकड़ होनी चाहिए।
पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार जिस ड्रोन से पराली जलाने पर केस दर्ज करवा रही है अगर उसी ड्रोन से मंडियों का हाल देखती तो उन्हें सच्चाई का पता चलता। इसी अनदेखी के कारण भाखड़ा जलाशय लबालब होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं है। हलका डबवाली के चौटाला और आसाखेड़ा माइनर में पानी चलाने के लिए किसान मजबूरन धरना, प्रदर्शन कर रहे हैं।