{"_id":"6ac294c446bfaa4b260d9b29","slug":"molestation-increased-in-district-sirsa-news-c-128-1-svns1027-166129-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: जिले में बढ़ रहीं यौन शोषण की घटनाएं, 14 साल में 1025 मामले पहुंचे कोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: जिले में बढ़ रहीं यौन शोषण की घटनाएं, 14 साल में 1025 मामले पहुंचे कोर्ट
Sun, 04 Oct 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:32 PM IST
विज्ञापन
ज्यादातर में परिचित या रिश्तेदार ही आरोपी, 2026 में सामने जा चुके हैं 66 मामले
स्पेशल कोर्ट इस वर्ष अब तक सुना चुकी है करीब 18 दोषियों को सजा
किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगाने के बाद दुष्कर्म के मामले अधिक
सिरसा। जिले में यौन शोषण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले 14 वर्षों में यौन शोषण से संबंधित 1025 मामले अदालत में आ चुके हैं। 2026 में भी अब तक दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट से जुड़े 66 केस अदालत में पहुंचे हैं।
फिलहाल, फास्ट ट्रैक कोर्ट में दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के करीब 613 केस लंबित हैं। इस वर्ष 18 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य अधिवक्ता भावना शर्मा ने बताया कि यौन शोषण से जुड़े अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित, रिश्तेदार या आसपास के लोग होते हैं।
भावना ने बताया कि कई मामलों में शिकायत मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती है लेकिन सामाजिक बदनामी व लोकलाज के कारण अनेक घटनाएं पुलिस तक पहुंच ही नहीं पातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि बाल यौन शोषण की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में पॉक्सो एक्ट लागू किया था। यह कानून नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, उत्पीड़न, छेड़छाड़ व अश्लील सामग्री से जुड़े अपराधों पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है।
इन मामलों की सुनवाई के लिए जिले में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में अगस्त 2026 तक 18 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है।
शातिरों की नीयत नहीं समझ पातीं युवतियां व किशोरियां
महिला अधिवक्ता संजू बाला ने बताया कि बहला-फुसलाकर युवतियों व किशोरियों को भगाकर ले जाने और फिर उनसे दुष्कर्म करने के मामले अधिक हैं। जागरूकता के अभाव में किशोरियां कई बार आरोपियों की गलत मंशा को समझ नहीं पातीं और उनके झांसे में आ जाती हैं।
किशोर भी पाए गए हैं दोषी, कराई जाती है सामुदायिक सेवा
संजू बाला ने बताया कि यौन शोषण के मामलों में किशोर भी आरोपी पाए गए हैं। वर्ष 2012 से अगस्त 2026 तक किशोर न्यायालय में करीब 186 मामलों में आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है। दोषी किशोरों को सजा के साथ सुधारात्मक प्रक्रिया से भी जोड़ा जाता है। इसके तहत उनसे एक से तीन वर्ष तक सामुदायिक सेवा करवाई जाती है ताकि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझ सकें। दोषी किशोर नागरिक अस्पतालों और गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बागवानी, पानी पिलाने व सफाई जैसे कार्य करते हैं।
दोषी को मिलती है 10 साल से उम्रकैद तक की सजा
महिला अधिवक्ता ज्योति वर्मा ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध में दोषी को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। संरक्षक, लोक सेवक, पुलिसकर्मी या शैक्षणिक संस्था से जुड़े व्यक्ति द्वारा अपराध करने पर सजा और कठोर हो जाती है। अपराध की जानकारी छिपाना या सूचना नहीं देना भी अपराध है। इसमें छह माह से एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
स्पेशल कोर्ट में होती है सुनवाई
बाल संरक्षण अधिकारी अंजना डूडी ने बताया कि 18 साल से कम उम्र के नाबालिग के साथ किसी भी तरह का यौन व्यवहार पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है। यह कानून नाबालिग लड़के-लड़कियों को समान सुरक्षा देता है। मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है। संवाद
कोट्स
यौन शोषण की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं। सख्त कानून के बावजूद कमी नहीं आ रही है। कानून की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान जरूरी है। लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तो ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है।
-अधिवक्ता केवल कंबोज, पूर्व उपप्रधान, जिला बार एसोसिएशन सिरसा।
विज्ञापन
स्पेशल कोर्ट इस वर्ष अब तक सुना चुकी है करीब 18 दोषियों को सजा
किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगाने के बाद दुष्कर्म के मामले अधिक
सिरसा। जिले में यौन शोषण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले 14 वर्षों में यौन शोषण से संबंधित 1025 मामले अदालत में आ चुके हैं। 2026 में भी अब तक दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट से जुड़े 66 केस अदालत में पहुंचे हैं।
फिलहाल, फास्ट ट्रैक कोर्ट में दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के करीब 613 केस लंबित हैं। इस वर्ष 18 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य अधिवक्ता भावना शर्मा ने बताया कि यौन शोषण से जुड़े अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित, रिश्तेदार या आसपास के लोग होते हैं।
विज्ञापन
भावना ने बताया कि कई मामलों में शिकायत मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती है लेकिन सामाजिक बदनामी व लोकलाज के कारण अनेक घटनाएं पुलिस तक पहुंच ही नहीं पातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि बाल यौन शोषण की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में पॉक्सो एक्ट लागू किया था। यह कानून नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, उत्पीड़न, छेड़छाड़ व अश्लील सामग्री से जुड़े अपराधों पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है।
इन मामलों की सुनवाई के लिए जिले में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में अगस्त 2026 तक 18 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है।
शातिरों की नीयत नहीं समझ पातीं युवतियां व किशोरियां
महिला अधिवक्ता संजू बाला ने बताया कि बहला-फुसलाकर युवतियों व किशोरियों को भगाकर ले जाने और फिर उनसे दुष्कर्म करने के मामले अधिक हैं। जागरूकता के अभाव में किशोरियां कई बार आरोपियों की गलत मंशा को समझ नहीं पातीं और उनके झांसे में आ जाती हैं।
किशोर भी पाए गए हैं दोषी, कराई जाती है सामुदायिक सेवा
संजू बाला ने बताया कि यौन शोषण के मामलों में किशोर भी आरोपी पाए गए हैं। वर्ष 2012 से अगस्त 2026 तक किशोर न्यायालय में करीब 186 मामलों में आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है। दोषी किशोरों को सजा के साथ सुधारात्मक प्रक्रिया से भी जोड़ा जाता है। इसके तहत उनसे एक से तीन वर्ष तक सामुदायिक सेवा करवाई जाती है ताकि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझ सकें। दोषी किशोर नागरिक अस्पतालों और गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बागवानी, पानी पिलाने व सफाई जैसे कार्य करते हैं।
दोषी को मिलती है 10 साल से उम्रकैद तक की सजा
महिला अधिवक्ता ज्योति वर्मा ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध में दोषी को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। संरक्षक, लोक सेवक, पुलिसकर्मी या शैक्षणिक संस्था से जुड़े व्यक्ति द्वारा अपराध करने पर सजा और कठोर हो जाती है। अपराध की जानकारी छिपाना या सूचना नहीं देना भी अपराध है। इसमें छह माह से एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
स्पेशल कोर्ट में होती है सुनवाई
बाल संरक्षण अधिकारी अंजना डूडी ने बताया कि 18 साल से कम उम्र के नाबालिग के साथ किसी भी तरह का यौन व्यवहार पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है। यह कानून नाबालिग लड़के-लड़कियों को समान सुरक्षा देता है। मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है। संवाद
कोट्स
यौन शोषण की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं। सख्त कानून के बावजूद कमी नहीं आ रही है। कानून की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान जरूरी है। लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तो ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है।
-अधिवक्ता केवल कंबोज, पूर्व उपप्रधान, जिला बार एसोसिएशन सिरसा।