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Sirsa News: महिला के हत्यारे को आजीवन कारावास
Mon, 10 Jul 2023 08:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 10 Jul 2023 08:50 PM IST
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सिरसा। महिला की हत्या कर शव कुएं में फेंकने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अभियुक्त संदीप कुमार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मृतका का सोने का लॉकेट खरीदने वाले सुनार जगत सिंह को 3 साल कैद की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना राशि मृतका के बच्चों को दी जाएगी।
इस मामले के मुख्य आरोपी पवन कुमार की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। पवन और संदीप दोनों नशे के आदि थे। इसलिए दोनों ने खेत में काम कर रही मैना देवी की हत्या कर उसके गले से सोने का लॉकेट छीन लिया और उसे सात हजार में बेचकर उक्त पैसों ने नशा खरीदा। आरोपियों के खिलाफ थाना नाथूसरी चोपटा पुलिस ने जनवरी 2021 में अभियोग दर्ज किया था।
गांव कुम्हारिया निवासी पवन व संदीप उर्फ रमन ने 7 जनवरी 2021 को नशा खरीदने के लिए खेड़ी रोड पर राहगीर को लूटने की साजिश रची। शाम तक कोई अकेला व्यक्ति रोड पर नहीं आया। इसके बाद दोनों खेतों में जाने लगे। इसी दौरान दोनों जगदीश के खेत के पास पहुंचे। यहां पर पवन को अपनी चाची मैना देवी अकेली खेत में काम करती हुई दिखाई दी। उसके गले में सोने का लॉकेट लटक रहा था। इसके बाद पवन व संदीप ने मोटी लकड़ी से चाची मैना देवी के सिर पर वार किया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद संदीप ने उसकी गर्दन दबा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके गले से संदीप ने सोने का लॉकेट निकाल लिया और लाश का कुएं में फेंक दिया।
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7 हजार में सुनार को बेचा था लॉकेट
इसके बाद संदीप लॉकेट लेकर गांव कागदाना स्थित जय मां ज्वेलर्स दुकान में गया और उसके मालिक जगत सिंह को सात हजार में बेच दिया। संदीप ने इसमें से 3500 रुपये पवन को देने थे। एक हजार रुपये संदीप ने खाने-पीने में खर्च कर दिए और 6 हजार रुपये बेड में छिपाकर रख दिए।
दोषी बोले-मां-बाप बूढ़े हैं रहम करो
दोषी संदीप व जगत सिंह ने न्यायाधीश प्रवीण कुमार से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। संदीप ने न्यायाधीश से कहा कि उसके माता-पिता वृद्ध हैं और वह अकेला ही कमाने वाला है। वह नाई की दुकान में काम करता था। जगत सिंह ने कहा कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है।
सजा ए मौत की श्रेणी में नहीं आता यह मामला
दोषियों की गुहार सुनने के बाद न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने कहा कि महिला की बेरहमी से हत्या की गई थी। इसलिए संदीप किसी भी दया का पात्र नहीं है। आईपीसी की धारा 302 में केवल दो ही सजा का प्रावधान है। एक तो आजीवन कारावास व दूसरा मृत्युदंड के साथ-साथ जुर्माना। सजा ए मौत दुर्लभतम मामलों में ही दी सजा सकती है,वर्तमान मामला उस श्रेणी में नहीं आता।
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इस मामले के मुख्य आरोपी पवन कुमार की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। पवन और संदीप दोनों नशे के आदि थे। इसलिए दोनों ने खेत में काम कर रही मैना देवी की हत्या कर उसके गले से सोने का लॉकेट छीन लिया और उसे सात हजार में बेचकर उक्त पैसों ने नशा खरीदा। आरोपियों के खिलाफ थाना नाथूसरी चोपटा पुलिस ने जनवरी 2021 में अभियोग दर्ज किया था।
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गांव कुम्हारिया निवासी पवन व संदीप उर्फ रमन ने 7 जनवरी 2021 को नशा खरीदने के लिए खेड़ी रोड पर राहगीर को लूटने की साजिश रची। शाम तक कोई अकेला व्यक्ति रोड पर नहीं आया। इसके बाद दोनों खेतों में जाने लगे। इसी दौरान दोनों जगदीश के खेत के पास पहुंचे। यहां पर पवन को अपनी चाची मैना देवी अकेली खेत में काम करती हुई दिखाई दी। उसके गले में सोने का लॉकेट लटक रहा था। इसके बाद पवन व संदीप ने मोटी लकड़ी से चाची मैना देवी के सिर पर वार किया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद संदीप ने उसकी गर्दन दबा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके गले से संदीप ने सोने का लॉकेट निकाल लिया और लाश का कुएं में फेंक दिया।
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7 हजार में सुनार को बेचा था लॉकेट
इसके बाद संदीप लॉकेट लेकर गांव कागदाना स्थित जय मां ज्वेलर्स दुकान में गया और उसके मालिक जगत सिंह को सात हजार में बेच दिया। संदीप ने इसमें से 3500 रुपये पवन को देने थे। एक हजार रुपये संदीप ने खाने-पीने में खर्च कर दिए और 6 हजार रुपये बेड में छिपाकर रख दिए।
दोषी बोले-मां-बाप बूढ़े हैं रहम करो
दोषी संदीप व जगत सिंह ने न्यायाधीश प्रवीण कुमार से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। संदीप ने न्यायाधीश से कहा कि उसके माता-पिता वृद्ध हैं और वह अकेला ही कमाने वाला है। वह नाई की दुकान में काम करता था। जगत सिंह ने कहा कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है।
सजा ए मौत की श्रेणी में नहीं आता यह मामला
दोषियों की गुहार सुनने के बाद न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने कहा कि महिला की बेरहमी से हत्या की गई थी। इसलिए संदीप किसी भी दया का पात्र नहीं है। आईपीसी की धारा 302 में केवल दो ही सजा का प्रावधान है। एक तो आजीवन कारावास व दूसरा मृत्युदंड के साथ-साथ जुर्माना। सजा ए मौत दुर्लभतम मामलों में ही दी सजा सकती है,वर्तमान मामला उस श्रेणी में नहीं आता।