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Sirsa News: रोड जाम करने की चेतावनी दी तो किसानों के धरने पर पहुंचे उपायुक्त, 15 मिनट तक सवालों के दिए जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Mar 2023 11:31 PM IST
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When warned of road jam, the Deputy Commissioner reached the protest of the farmers, answered the questions for 15 minutes
पुलिस अधीक्षक अपने कार्यालय में जनता दरबार के दौरान समस्याएं सुनते हुए।
सिरसा। ओलावृष्टि के बाद खराब हुई फसल की स्पेशल गिरदावरी करवाने, मेरी फसल मेरा ब्योरा व क्षतिपूर्ति पोर्टल दोबारा से खुलवाने की मांग को लेकर कई संगठनों के किसान लघु सचिवालय के समक्ष एकत्र हुए। किसान उपायुक्त को मांग पत्र सौंपने की जिद्द पर अड़ गए। करीब एक घंटे तक उपायुक्त धरना स्थल पर नहीं पहुंचे तो किसानों ने रोड जाम करने की चेतावनी दी। जिसके बाद किसान लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर धरना देकर बैठ गए। करीब 15 मिनट धरना देने के बाद उपायुक्त पार्थ गुप्ता किसानों के बीच पहुंचे और 15 मिनट तक किसानों के सवालों के जवाब देते रहे। करीब चार घंटे तक धरनारत रहे किसान उपायुक्त के आश्वासन पर 2 बजे वापस लौट गए।
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जिले में तीन दिन पहले ओलावृष्टि होने के बाद 65 गांवों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। सोमवार को स्पेशल गिरदावरी व पोर्टल दोबारा से खोलने की मांग को लेकर भारतीय किसान चढूनी ग्रुप, पगड़ी संभाल जट्टा, किसान संघर्ष समिति सहित अन्य संगठनों के किसान लघु सचिवालय में सुबह 10 बजे एकत्र हुए। प्रदर्शन की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के नेता भूपेंद्र सिंह वैदवाला ने की। किसान दोपहर 12 बजे तक यहां पर मांगों को लेकर धरने पर बैठे रहे। इसके पश्चात किसानों ने उपायुक्त को मांग पत्र सौंपने की बात कही। सुरक्षा अधिकारियों ने उपायुक्त के न होने की जानकारी दी और अन्य अधिकारी को मांग पत्र सौंपने के लिए कहा। लेकिन किसान नहीं माने। किसान करीब एक बजे तक उपायुक्त पार्थ गुप्ता के धरना स्थल पर आने की मांग को लेकर बैठे रहे। करीब डेढ़ बजे तक भी उपायुक्त नहीं पहुंचे तो कई किसान बिफर गए और लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। ऐसे में अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे किसानों से पांच मिनट का समय मांगा। जिसके पश्चात किसान फिर से शांत हो गए और वापस धरना स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद 20 मिनट तक भी उपायुक्त धरना स्थल पर नहीं पहुंचे तो किसानों ने रोड जाम करने की चेतावनी। जिसके चलते किसान नेताओं ने लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर धरना देने के लिए बात कह दी।
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किसान दोपहर एक बजकर 50 मिनट पर लघु सचिवालय के समक्ष धरने पर बैठ गए। सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की सूचना उपायुक्त को दी। करीब दो मिनट बाद ही उपायुक्त पार्थ गुप्ता धरना स्थल पर पहुंच गए और किसानों की समस्याएं सुनी। इस मौके पर जसवीर सिंह भाटी, जसविंद्र सिंह, जसकरण सिंह कंग, हरजिंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, लखविंद्र सिंह, राम प्रताप सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
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किसानों ने रखे उपायुक्त के सामने यह सवाल, उपायुक्त ने दिए जवाब
किसान : ओलावृष्टि के बाद खराब हुई फसल की जल्द गिरदावरी करवाई जाए
उपायुक्त : सरकार की ओर से स्पेशल गिरदावरी करवाने संबंधित आदेश जारी कर दिए गए हैं।
किसान : साहब एक पटवारी के पास 20 गांव हैं, किस तरह से होगी गिरदावरी
उपायुक्त : पटवारियों की ओर से मौके पर जाकर गिरदावरी की जाएगी, अगर कोई दिक्कत आती है तो शिकायत दें
किसान : क्षतिपूर्ति और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल बंद पड़ा है, किसान किस तरह से आवेदन करे
उपायुक्त : पोर्टल को लेकर पहले भी कई किसान शिकायत लेकर आए थे, इसके संबंध में मुख्यालय शिकायत भेज दी गई है।
किसान : साहब, हम अनपढ़ हैं, किसी को भी इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं है, सभी शर्तों से मुक्त किया जाए
उपायुक्त : जो बीमा और मुआवजे की शर्तें है वह तो पूरी करनी होगी।
किसान : दूसरे से जमीन काश्त पर लेकर काम कर रहे है, लेकिन मुआवजा किस तरह से ठेकेदार को देंगे
उपायुक्त : इसके संबंध में पटवारी को जानकारी दें, पटवारी अपने अनुसार मुआवजे संबंधित जानकारी दर्ज करेंगे, ठेकेदार तक ही मुआवजा पहुंचेगा।
किसान : ओलावृष्टि के कारण फसल के साथ-साथ, सब्जी, हरा चारा, पशु और मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। उसके लिए क्या प्रक्रिया रहेगी
उपायुक्त : सरकारी मूल्य के अनुसार ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।

किसान बोले: आग लगाने पर तो सेटेलाइट से होती है निगरानी, ओलावृष्टि की जानकारी दर्ज करने पर क्यों हुई बंद
धरने को संबोधित करते हुए किसानों ने कहा कि धान की पराली को आग लगाने पर तो सेटेलाइट व अन्य माध्यमों से जानकारी लेकर अधिकारी और पटवारी मौके पर पहुंच जाते हैं। लेकिन अब किसानों का नुकसान हुआ है तो उसकी स्पेशल गिरदावरी व नुकसान दर्ज करने में क्यों देरी की जा रही है। सेटेलाइट के अनुसार ही किसानों पर मौके पर ही जुर्माना लगाकर उसने राशि ले ली जाती है। लेकिन ओलावृष्टि से नुकसान होने पर मुआवजा व बीमा देने में क्यों देरी की जा रही है। अब भी उतनी तेजी से काम किया जाए।
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