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देशभर के प्रेम पुजारी लेते सिरसा की शरण
हितेश चतुर्वेदी/अमर उजाला, सिरसा
Updated Thu, 29 Jan 2015 12:21 AM IST
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प्रदेश में प्रेमी जोड़ों के लिए सिरसा जिला महफूज ठिकाना बन गया है।
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विभिन्न राज्यों से 450 प्रेमी जोडे़ सिरसा पहुंचकर जिला एंव सत्र अदालत से पुलिस प्रोटेक्शन प्राप्त कर चुके हैं। बुधवार को मंदिर में प्रेम विवाह रचाकर एक ओर प्रेमी जोडे़ ने अदालत से प्रोटेक्शन ली।
इस प्रोटेक्शन के साथ ही सिरसा राज्य में सबसे अधिक प्रेम पुजारियों को सुरक्षा प्रदान करने वाला जिला बन गया। वर्ष 2011 तक सिरसा सेशन कोर्ट में 150 प्रेमी जोड़ों ने पुलिस सुरक्षा प्राप्त की थी।
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गौरतलब है कि कि प्रदेश में हुए मनोज-बबली हत्याकांड के बाद हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट ने जिला लेवल पर जिला एंव सत्र न्यायाधीशों को सुरक्षा प्रदान करने की शक्तियां दे दी थी।
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इससे पूर्व अप्रैल 2010 तक हाईकोर्ट के पास ही सुरक्षा देने की शक्ति थी। हरियाणा प्रदेश में सिरसा सेशन कोर्ट ही प्रथम कोर्ट बनी जिसने सर्व प्रथम शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन मई 2010 को प्रेमी जोडे़ को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए। उस समय सेशन जज डॉ. शिवा शर्मा थे।
देशभर से आते हैं प्रेमी जोडे़
सिरसा में देशभर से प्रेमी जोडे़ पहुंचकर प्रेम विवाह के बाद प्रोटेक्शन प्राप्त करते हैं। प्रेम विवाह करने वालों के लिए सिरसा जिला सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है।
महाराष्ट्र्र, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व केरल आदि प्रदेशों से प्रेमी जोडे़ भागकर सिरसा आए और यहां पर मंदिर या गुरुद्वारों में प्रेम विवाह करके कोर्ट से पुलिस प्रोटेक्शन ली।
सभी प्रेमी जोड़ों की प्रेम कहानी भी विभिन्न व अजीम रही। किसी कहानी में लड़के के परिजन जान के दुश्मन बन बैठे तो किसी में लड़की के घरवाले।
पुलिस सुरक्षा पाने वाले जोड़ों में यह बात खास रही कि अधिकतर प्रेमी जोड़ों ने जाति अलग-अलग होने के कारण जब परिवार वाले नहीं मानें तब जाकर भागकर प्रेम विवाह करने का फैसला किया।
सिरसा में प्रोटेक्शन पाने वाले 85 प्रतिशत ऐसे प्रेमी जोडे़ रहे जिनकी जाति विभिन्न थी और जिन्होंने जात-पात से ऊपर उठकर जिंदगी बिताने का अहम फैसला लिया।
पहले थी परेशानी, अब राहत
प्रेमी जोडों को सुरक्षा देने का सिलसिला जब शुरू हुआ तो पुलिस कर्मचारियों के लिए प्रोटेक्शन एक मुसीबत बन गई।
सिरसा में पुलिस बल की कमी थी और प्रेमी जोडे़ को उसके रहने वाले ठिकाने पर सुरक्षा के लिए एक महिला पुलिस कर्मचारी और एक से दो पुरुष कर्मी की तैनाती करना जरूरी हो गया।
अधिकतर पुलिस कर्मचारी प्रोटेक्शन की ड्यूटी से बचने का उपाय तलाशने में रहते। इसके बाद प्रशासन ने प्रोटेक्शन हाउस बनाकर पुलिस वालों को राहत पहुंचाई।
सर्वप्रथम 2010 में पुलिस लाइन में फिर कामकाजी महिला आवास। इसके बाद शहीद भगत सिंह स्टेडियम परिसर के अंदर यूथ हॉस्टल और अब लोक निर्माण विश्राम गृह में प्रोटेक्शन हाउस बनाया गया है।
अंतरजातीय विवाह वाले को मिली सुरक्षा
बुधवार को अदालत ने फतेहाबाद से सिरसा आकर प्रेम विवाह करने वाले एक प्रेमी जोडे़ को सुरक्षा दी।
जानकारी के अनुसार जिला फतेहाबाद के गांव धारनियां निवासी विकास दो महीने पहले अंबाला स्थित धागा मिल में काम करने गया।
वहां पंजाब के बरनाला निवासी एक युवती भी नौकरी कर रही थी। दोनों में दोस्ती के बाद यह रिश्ता प्यार में तब्दील हो गया। दोनों की जाति अलग होने पर परिजन इस रिश्ते के खिलाफ हो गए।
इसके बाद उक्त प्रेमी जोडे़ ने सिरसा पहुंचकर लघु सचिवालय स्थित शिव मंदिर में प्रेम विवाह रचा लिया। बुधवार को दोनों को अपनी जान खतरे में लगी तो उन्होंने कोर्ट से पुलिस सुरक्षा मांग ली।
अदालत ने खतरे को भांपते हुए नवविवाहित जोडे़े को पुलिस प्रोटेक्शन दे दी।