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थेहड़ : सर्वे ऑफ इंडिया ने ड्रोन से 120 मीटर की ऊंचाई से की मैपिंग
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Thehad: maping has been done with the height of 120mtr by the survey of india team
- फोटो : Sirsa
थेहड़ की डिजिटल पैमाइश को लेकर सिरसा पहुंची सर्वे ऑफ इंडिया की चार सदस्यीय टीम ने ड्रोन से पैमाइश की। सर्वे की टीम ने शुक्रवार सुबह ड्रोन उड़ाने की मंजूरी लेकर थेहड़ पर पहुंची। टीम ने 25 मिनट के आपरेशन में थेहड़ के चारों ओर दो किलोमीटर तक के दायरे की पैमाइश कर फोटो ली। पैमाइश के दौरान प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम जयवीर यादव, कानूनगो धर्मपाल मौजूद थे। सर्वे की टीम ने डिजिटल पैमाइश के लिए लघु सचिवालय में एक जीपीएस भी लगाया था। थेहड़ की करीब 85 एकड़ भूमि का डिजिटल मैपिंग से सर्वे किया गया है। सर्वे के उपरांत टीम अपने मुख्यालय की ओर रवाना हो गई।
थेहड़ की डिजिटल पैमाइश के लिए सर्वे ऑफ इंडिया की टीम बीते बुधवार शाम को ही शहर में पहुंच गई थी। बीते दिन टीम को वायु सेना से ड्रोन उड़ाने की मंजूरी नहीं मिली थी, जिस कारण सर्वे की टीम डिजिटल पैैमाइश नहीं कर पाई। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम शुक्रवार सुबह ही वायु सेना के अधिकारियों के पास पूरे कागजात के साथ पहुंच चुकी थी। जहां पर जाने के बाद लगभग 25 मिनट टीम को थेहड़ पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति दे दी गई थी।
दो किलोमीटर के दायरे में हुई पैमाइश
सर्वे ऑफ इंडिया टीम के सर्वेक्षक विजय कुमार ने बताया कि ड्रोन में 25 मिनट का मिशन डाला गया था, जो लगभग 120 मीटर ऊंचाई से करीब दो किलोमीटर के दायरे की फोटोग्राफी करके आया है। विजय कुमार ने बताया कि उनकी टीम में उनके साथ कमलजीत, एमटीएस बाल गोबिंद और जीपीएस नियंत्रक सेक्रेटरी रामकलास शामिल हैं। शहर के लघु सचिवालय में एक जीपीएस भी लगाया गया था जिसको रामकलास नियंत्रण कर रहे थे।
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थेहड़ की डिजिटल पैमाइश के चलते थेहड़ की अपना घर बचाव समिति के सदस्य भी पहुंचे हुए थे। थेहड़ निवासी दीपक फुटेला ने बताया कि पुराने रिकॉर्ड के अनुसार थेहड़ में पुरातत्व विभाग की केवल 35 एकड़ जमीन आती है जिसको लेकर कोर्ट ने अदालत की अवहेलना मानी थी। अब कोर्ट ने प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 85 एकड़ को खाली करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इसके उन्होंने पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट में आपत्ति दायर की थी जिसको लेकर कोर्ट ने जिला प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाने के लिए निर्देश दिए थे, उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से सिरसा के उपायुक्त को आपत्ति दर्ज करवाई जा चुकी है और प्रशासन द्वारा रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी 25 फरवरी को इसको लेकर सुनवाई हो सकती है।
गौरतलब है कि थेहड़ को खाली कराने के लिए हाईकोर्ट में केस चल रहा है। पुरातत्व विभाग थेहड़ की करीब 85.5 एकड़ भूमि पर अपना कब्जा बता रहा है, जबकि थेहड़ संघर्ष समिति का कहना है कि थेहड़ के अधीन सिर्फ 31.5 एकड़ भूमि आती है जिसे खाली कराया जा चुका है। बाकी की भूमि थेहड़ की नहीं बल्कि थेहड़ के आसपास आबाद कॉलोनियों हैं। इसी मामले के तहत थेहड़ की दोबारा से निशानदेही कराने का कार्य किया जा रहा है। सटीक निशानदेही और डिजिटल आधारित नक्शा तैयार करने के लिए ही थेहड़ की फोटोग्राफी के साथ ड्रोन कैमरे से सर्वे का काम किया गया है। थेहड़ की कुल 85 एकड़ के करीब भूमि में से 31. 5 एकड़ खाली करवाया जा चूका है। थेहड़ पर बसने वाले कुल करीब तीन हजार परिवारों में से अभी तक 735 परिवारों को विस्थापित किया जा चूका है। अब अगर थेहड़ वासियों को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो बाकि जमीन को खाली करवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
मेरे निरीक्षण में डिजिटल मैपिंग की गई है। हमें यह डाटा मुख्यालय को जमा करवाना होगा। जिले के प्रशासनिक अधिकारी हमसे लिखित में जानकारी लेंगे कि उनको इस सर्वे में किस डाटा की जरूरत है। वही उनको भेजा जाएगा। - विजय कुमार, सर्वेक्षक, सर्वे ऑफ इंडिया।
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थेहड़ की डिजिटल पैमाइश के लिए सर्वे ऑफ इंडिया की टीम बीते बुधवार शाम को ही शहर में पहुंच गई थी। बीते दिन टीम को वायु सेना से ड्रोन उड़ाने की मंजूरी नहीं मिली थी, जिस कारण सर्वे की टीम डिजिटल पैैमाइश नहीं कर पाई। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम शुक्रवार सुबह ही वायु सेना के अधिकारियों के पास पूरे कागजात के साथ पहुंच चुकी थी। जहां पर जाने के बाद लगभग 25 मिनट टीम को थेहड़ पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति दे दी गई थी।
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दो किलोमीटर के दायरे में हुई पैमाइश
सर्वे ऑफ इंडिया टीम के सर्वेक्षक विजय कुमार ने बताया कि ड्रोन में 25 मिनट का मिशन डाला गया था, जो लगभग 120 मीटर ऊंचाई से करीब दो किलोमीटर के दायरे की फोटोग्राफी करके आया है। विजय कुमार ने बताया कि उनकी टीम में उनके साथ कमलजीत, एमटीएस बाल गोबिंद और जीपीएस नियंत्रक सेक्रेटरी रामकलास शामिल हैं। शहर के लघु सचिवालय में एक जीपीएस भी लगाया गया था जिसको रामकलास नियंत्रण कर रहे थे।
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थेहड़ की डिजिटल पैमाइश के चलते थेहड़ की अपना घर बचाव समिति के सदस्य भी पहुंचे हुए थे। थेहड़ निवासी दीपक फुटेला ने बताया कि पुराने रिकॉर्ड के अनुसार थेहड़ में पुरातत्व विभाग की केवल 35 एकड़ जमीन आती है जिसको लेकर कोर्ट ने अदालत की अवहेलना मानी थी। अब कोर्ट ने प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 85 एकड़ को खाली करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इसके उन्होंने पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट में आपत्ति दायर की थी जिसको लेकर कोर्ट ने जिला प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाने के लिए निर्देश दिए थे, उन्होंने बताया कि उनकी तरफ से सिरसा के उपायुक्त को आपत्ति दर्ज करवाई जा चुकी है और प्रशासन द्वारा रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी 25 फरवरी को इसको लेकर सुनवाई हो सकती है।
गौरतलब है कि थेहड़ को खाली कराने के लिए हाईकोर्ट में केस चल रहा है। पुरातत्व विभाग थेहड़ की करीब 85.5 एकड़ भूमि पर अपना कब्जा बता रहा है, जबकि थेहड़ संघर्ष समिति का कहना है कि थेहड़ के अधीन सिर्फ 31.5 एकड़ भूमि आती है जिसे खाली कराया जा चुका है। बाकी की भूमि थेहड़ की नहीं बल्कि थेहड़ के आसपास आबाद कॉलोनियों हैं। इसी मामले के तहत थेहड़ की दोबारा से निशानदेही कराने का कार्य किया जा रहा है। सटीक निशानदेही और डिजिटल आधारित नक्शा तैयार करने के लिए ही थेहड़ की फोटोग्राफी के साथ ड्रोन कैमरे से सर्वे का काम किया गया है। थेहड़ की कुल 85 एकड़ के करीब भूमि में से 31. 5 एकड़ खाली करवाया जा चूका है। थेहड़ पर बसने वाले कुल करीब तीन हजार परिवारों में से अभी तक 735 परिवारों को विस्थापित किया जा चूका है। अब अगर थेहड़ वासियों को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो बाकि जमीन को खाली करवाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
मेरे निरीक्षण में डिजिटल मैपिंग की गई है। हमें यह डाटा मुख्यालय को जमा करवाना होगा। जिले के प्रशासनिक अधिकारी हमसे लिखित में जानकारी लेंगे कि उनको इस सर्वे में किस डाटा की जरूरत है। वही उनको भेजा जाएगा। - विजय कुमार, सर्वेक्षक, सर्वे ऑफ इंडिया।