फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   The country shines in the light of light, three medals won in Thailand with the help of artificial leg

Sirsa News: ज्योति की रोशनी में चमका देश, कृत्रिम पैर के सहारे थाइलैंड में जीते तीन मेडल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Dec 2023 10:32 PM IST
विज्ञापन
The country shines in the light of light, three medals won in Thailand with the help of artificial leg
मेडल दिखाती ज्योति।
ओढां। अगर इरादों में जान हो तो सफलता पैर चूमती नजर आती है। इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण गांव ओढां के जवाहर नवोदय विद्यालय की कक्षा 9वीं की छात्रा ज्योति के रूप में है। ज्योति ने सफलता की ऐसी छलांग लगाई कि पूरे देश को उस पर नाज है। ज्योति ने थाइलैंड में हुए वर्ल्ड एबिलिटी गेम्स में तीन मेडल हासिल किए।
विज्ञापन

ऐलनाबाद निवासी 15 वर्षीय ज्योति जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग है। ज्योति की खेलों में रुचि को देखते हुए नवोदय विद्यालय समिति जयपुर संभाग ने प्रशिक्षण के लिए उसे जवाहर नवोदय विद्यालय गचीबोली रंगारेड्डी (आंध्रप्रदेश) में भेजा था। यहां आदित्य मेहता फाउंडेशन ने ज्योति सहित अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों को खेलों का विशेष प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ज्योति हौसले के साथ कृत्रिम पैर के सहारे खेल के मैदान में उतरी। ज्योति ने 1 से 9 दिसंबर तक थाइलैंड में आयोजित वर्ल्ड एबिलिटी गेम्स में भाग लिया। इसमें ज्योति ने डिस्कस थ्रो में रजत, भाला फेंक तथा शॉटपुट में कांस्य पदक जीते।
विज्ञापन



डेढ़ माह पूर्व गुजरात में जीते थे 2 गोल्ड मेडल

ज्योति ने करीब डेढ़ माह पूर्व गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथेलिटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। इसमें उसने स्टिंग जैवलिन थ्रो व शॉटपुट दोनों गेमों में स्वर्ण पदक जीते। ज्योति इस समय 10 से 13 दिसंबर तक नई दिल्ली में चल रहे खेलो इंडिया पैरा गेम्स में भाग ले रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




पिता बोले : बेटी पर है गर्व

ज्योति के पिता विजयपाल पेशे ड्राइवर हैं। उनके एक बेटा और तीन बेटियां हैं। इनमें ज्योति दो बहनों से छोटी है। ज्योति जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग है। विजयपाल ने बताया कि उसकी बेटी का बचपन से ही खेलों से काफी लगाव था। वह कभी किसी पर आश्रित नहीं रही। उसमें बचपन से ही बहुत आत्मविश्वास था। उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी ने उनका ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि बच्चा चाहे दिव्यांग क्यों न हो उसको भी सामान्य बच्चों की भांति अवसर देना चाहिए।


ज्योति पर हमें नाज है : प्राचार्य
हमें नाज है कि ज्योति हमारे विद्यालय की छात्रा है। वह 4 वर्षों से जवाहर नवोदय विद्यालय में है। उसकी खेलों की तरफ रुचि को देखते हुए उसे विशेष प्रशिक्षण के लिए आंध्रप्रदेश भेजा गया था। ज्योति ने एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद भी कृत्रिम पैर का सहारा लेकर वो कर दिखाया जो शायद सामान्य छात्र भी नहीं कर सकते। पूरा विद्यालय प्रशासन ज्योति की प्रतिभा को सलाम करता है। ज्योति ने साबित कर दिखाया कि अगर हौसले मजबूत हो और कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।

-- ललित कालड़ा, प्राचार्य (जेएनवी ओढां)।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article