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डेरामुखी ने फिर दिया जेल से बाहर आने का संकेत, बोले: मैं ही रहूंगा गुरु, बहकावे में ना आएं
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नामचर्चा में प्रवचन सुनते डेरा प्रमुख के दमाद।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। डेरा सच्चा सौदा का स्थापना दिवस शुक्रवार को मनाया गया। इस दौरान हत्या और दुष्कर्म के दोषी रोहतक जेल में बंद डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह की ओर से भेजा गया पत्र पढ़कर सुनाया गया। जेल से भेजे गए पत्र में डेरामुखी ने अनुयायियों के नाम कई संदेश दिए। जहां एक ओर एक बार फिर जेल से बाहर आने का संकेत दिया वहीं दूसरी ओर गद्दी पर बैठने को लेकर चली चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि वही गुरु गद्दी पर बने रहेंगे। इसके अलावा पंजाब चुनाव के दौरान दो फाड़ हुए डेरा अनुयायियों को लेकर भी आह्वान किया कि केवल गुरु के वचन मानो, किसी दूसरे के नहीं। स्थापना दिवस कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों में केवल दत्तक पुत्री हनीप्रीत और डेरामखी के दामाद ही नजर आए।
शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा में कार्यक्रम के दौरान डेरामुखी का पत्र पढ़कर सुनाया गया। डेरामुखी ने माता, अनुयायियों और ट्रस्ट प्रबंधकों, सेवादारों को संबोधित करते हुए पत्र में संदेश दिया। सबसे पहले स्थापना दिवस की बधाई दी। डेरे की गद्दी को लेकर पिछले दिनों चर्चाएं चलीं। कभी उनके पुत्र तो कभी हनीप्रीत को गद्दी पर बैठने की चर्चाएं चलीं। लेकिन अब डेरामुखी ने अपने संदेश में इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि परम पिता ने हमें गुरु बनाया था, गुरु हैं और हम ही गुरु रहेंगे। साथ ही अनुयायियों को कहा कि किसी के भी बहकावे में ना आएं। डेरामुखी ने कहा कि वचन सिर्फ और सिर्फ गुरु के ही होते हैं, बाकी सबकी तो सिर्फ बातें होती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि गुरु वचन, गुरु को सतगुरु जी हुक्म देकर करवाते हैं, ना कि गुरु किसी भी बंदे के कहने पर करते हैं।
फिर दिया जेल से बाहर आने और अनुयायियों से रूबरू होने का संकेत
डेरामुखी को 7 फरवरी को जेल से फरलो मिली तो शर्तें थी कि सार्वजनिक तौर पर किसी से नहीं मिल सकेंगे। इसलिए अनुयायी मिलने के लिए तरसते रहे। लेकिन इस बार भेजे पत्र में डेरामुखी ने न केवल एक बार फिर जेल से बाहर आने का संकेत दिया बल्कि अनुयायियों में उम्मीद जगा दी कि इस बार उनके रूबरू भी होंगे। पत्र में उन्होंने लिखा कि सेवादारों की जायज मांग सतगुरु जरूर पूरी करेंगे। सतगुरु जी से प्रार्थना करते हैं कि आप सबकी, सबसे बड़ी मांग भी जल्द से जल्द पूरी करें।
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कार्यक्रम से दूर रहा परिवार, केवल हनीप्रीत और दामाद आए नजर
डेरा का ये कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यक्रम से पहले कई राज्यों में कार्यक्रम हुए। लेकिन इतने बड़े कार्यक्रम में डेरामुखी के परिवार के सदस्य नजर नहीं आए। माता, पत्नी, पुत्रियां, पुत्र और बच्चे इस कार्यक्रम से दूर ही रहे। केवल दामाद डॉ. शान-ए-मीत और दत्तक पुत्री हनीप्रीत ही कार्यक्रम में नजर आए।
पंजाब चुनाव में दो फाड़ का दर्द छलका, बोले: जो निंदा करता है, उसकी बात न सुनो
फरवरी में हुए पंजाब चुनाव के दौरान इस बार डेरा अनुयायी दो फाड़ नजर आए। अनुयायियों एक गुट डेरा प्रबंधन की बात सुन रहा था जबकि दूसरा गुट इसका विरोध कर रहा था। इसका परिणाम भी चुनाव पर दिखाई दिया। यानी डेरा का वोट बैंक चुनाव परिणाम पर ज्यादा असर नहीं दिखा पाया। इसलिए डेरामुखी ने अपने पत्र में इस संबंध में भी संदेश दिया। डेरामुखी ने पत्र में लिखा कि केवल अपने गुरु के वचन सुनो, ताकि आप जीते जी गम, दुख, चिंता और रोगों से मोक्ष प्राप्त करें। जो किसी की भी निंदा करता है, न तो उसकी बात सुनो और न ही उसकी बातें में हां में हां मिलाओ।
नई मुहिम : अब बेसहारा बुजुर्गों का पालन करेगा डेरा
सिरसा। शुक्रवार को डेरे सच्चा सौदा का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान जहां एक ओर डेरा प्रमुख का सत्संग दिखाया गया, वहीं दूसरी ओर मानवता भलाई के कार्यों में एक नया काम भी जोड़ने की घोषणा की गई। जिसे तहत डेरा अब नहीं मुहिम के तहत बेसहारा बुजुर्गों का पालन करेगा। वहीं कार्यक्रम में डेरामुखी की ओर से जेल से भेजी गई चिट्ठी को पढ़कर सुनाया गया।
सत्संग हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डेरामुखी की ओर से भेजा पत्र पढ़कर सुनाया गया। चिट्ठी में लिखा कि परम पिता ने हमें आपका गुरु बनाया था। गुरु हैं व हम ही गुरु रहेंगे। किसी के भी बहकावे में आप मत आया करो। आत्मसम्मान मुहिम के तहत 29 महिलाओं को सिलाई मशीनें, फूड बैंक मुहिम के तहत 29 जरूरतमंद परिवारों को राशन, जननी सत्कार मुहिम के तहत 29 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार की किट, क्लॉथ बैंक से 29 जरूरतमंदों को वस्त्र, पक्षी उद्धार मुहिम के तहत छतों पर दाना-पानी की व्यवस्था के लिए 529 सकोरे और जरूरतमंद परिवारों को साध-संगत द्वारा बनाकर दिए मकानों की चाबियां दी गई। नई सुबह मुहिम के तहत दो जोड़े विवाह बंधन में बंधे। 29 आदिवासी युगलों की शादियां हुई। नामचर्चा की समाप्ति पर आई हुई साध-संगत ने लंगर भी ग्रहण किया।
जगह-जगह लगी पानी की छबील
कार्यक्रम में आए अनुयायियों के लिए गर्मी के मद्देनजर डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन समिति की ओर से पंडाल और मुख्य मार्गों पर पेयजल की पुख्ता व्यवस्था की गई। इस दौरान पानी समिति के सेवादार जहां पंडाल में घूम-घूम कर साध-संगत को पानी पिला रहे थे। वहीं अनेक स्थानों पर छबीलें लगाई थीं।
पुलिस रही तैनात, संभाले रखी यातायात व्यवस्था
डेरा के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस की ओर से भी व्यापक प्रबंध किए गए। डेरे की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात की गई। यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस के साथ-साथ डेरा के सेवादारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा में कार्यक्रम के दौरान डेरामुखी का पत्र पढ़कर सुनाया गया। डेरामुखी ने माता, अनुयायियों और ट्रस्ट प्रबंधकों, सेवादारों को संबोधित करते हुए पत्र में संदेश दिया। सबसे पहले स्थापना दिवस की बधाई दी। डेरे की गद्दी को लेकर पिछले दिनों चर्चाएं चलीं। कभी उनके पुत्र तो कभी हनीप्रीत को गद्दी पर बैठने की चर्चाएं चलीं। लेकिन अब डेरामुखी ने अपने संदेश में इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि परम पिता ने हमें गुरु बनाया था, गुरु हैं और हम ही गुरु रहेंगे। साथ ही अनुयायियों को कहा कि किसी के भी बहकावे में ना आएं। डेरामुखी ने कहा कि वचन सिर्फ और सिर्फ गुरु के ही होते हैं, बाकी सबकी तो सिर्फ बातें होती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि गुरु वचन, गुरु को सतगुरु जी हुक्म देकर करवाते हैं, ना कि गुरु किसी भी बंदे के कहने पर करते हैं।
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फिर दिया जेल से बाहर आने और अनुयायियों से रूबरू होने का संकेत
डेरामुखी को 7 फरवरी को जेल से फरलो मिली तो शर्तें थी कि सार्वजनिक तौर पर किसी से नहीं मिल सकेंगे। इसलिए अनुयायी मिलने के लिए तरसते रहे। लेकिन इस बार भेजे पत्र में डेरामुखी ने न केवल एक बार फिर जेल से बाहर आने का संकेत दिया बल्कि अनुयायियों में उम्मीद जगा दी कि इस बार उनके रूबरू भी होंगे। पत्र में उन्होंने लिखा कि सेवादारों की जायज मांग सतगुरु जरूर पूरी करेंगे। सतगुरु जी से प्रार्थना करते हैं कि आप सबकी, सबसे बड़ी मांग भी जल्द से जल्द पूरी करें।
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कार्यक्रम से दूर रहा परिवार, केवल हनीप्रीत और दामाद आए नजर
डेरा का ये कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यक्रम से पहले कई राज्यों में कार्यक्रम हुए। लेकिन इतने बड़े कार्यक्रम में डेरामुखी के परिवार के सदस्य नजर नहीं आए। माता, पत्नी, पुत्रियां, पुत्र और बच्चे इस कार्यक्रम से दूर ही रहे। केवल दामाद डॉ. शान-ए-मीत और दत्तक पुत्री हनीप्रीत ही कार्यक्रम में नजर आए।
पंजाब चुनाव में दो फाड़ का दर्द छलका, बोले: जो निंदा करता है, उसकी बात न सुनो
फरवरी में हुए पंजाब चुनाव के दौरान इस बार डेरा अनुयायी दो फाड़ नजर आए। अनुयायियों एक गुट डेरा प्रबंधन की बात सुन रहा था जबकि दूसरा गुट इसका विरोध कर रहा था। इसका परिणाम भी चुनाव पर दिखाई दिया। यानी डेरा का वोट बैंक चुनाव परिणाम पर ज्यादा असर नहीं दिखा पाया। इसलिए डेरामुखी ने अपने पत्र में इस संबंध में भी संदेश दिया। डेरामुखी ने पत्र में लिखा कि केवल अपने गुरु के वचन सुनो, ताकि आप जीते जी गम, दुख, चिंता और रोगों से मोक्ष प्राप्त करें। जो किसी की भी निंदा करता है, न तो उसकी बात सुनो और न ही उसकी बातें में हां में हां मिलाओ।
नई मुहिम : अब बेसहारा बुजुर्गों का पालन करेगा डेरा
सिरसा। शुक्रवार को डेरे सच्चा सौदा का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान जहां एक ओर डेरा प्रमुख का सत्संग दिखाया गया, वहीं दूसरी ओर मानवता भलाई के कार्यों में एक नया काम भी जोड़ने की घोषणा की गई। जिसे तहत डेरा अब नहीं मुहिम के तहत बेसहारा बुजुर्गों का पालन करेगा। वहीं कार्यक्रम में डेरामुखी की ओर से जेल से भेजी गई चिट्ठी को पढ़कर सुनाया गया।
सत्संग हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डेरामुखी की ओर से भेजा पत्र पढ़कर सुनाया गया। चिट्ठी में लिखा कि परम पिता ने हमें आपका गुरु बनाया था। गुरु हैं व हम ही गुरु रहेंगे। किसी के भी बहकावे में आप मत आया करो। आत्मसम्मान मुहिम के तहत 29 महिलाओं को सिलाई मशीनें, फूड बैंक मुहिम के तहत 29 जरूरतमंद परिवारों को राशन, जननी सत्कार मुहिम के तहत 29 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार की किट, क्लॉथ बैंक से 29 जरूरतमंदों को वस्त्र, पक्षी उद्धार मुहिम के तहत छतों पर दाना-पानी की व्यवस्था के लिए 529 सकोरे और जरूरतमंद परिवारों को साध-संगत द्वारा बनाकर दिए मकानों की चाबियां दी गई। नई सुबह मुहिम के तहत दो जोड़े विवाह बंधन में बंधे। 29 आदिवासी युगलों की शादियां हुई। नामचर्चा की समाप्ति पर आई हुई साध-संगत ने लंगर भी ग्रहण किया।
जगह-जगह लगी पानी की छबील
कार्यक्रम में आए अनुयायियों के लिए गर्मी के मद्देनजर डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन समिति की ओर से पंडाल और मुख्य मार्गों पर पेयजल की पुख्ता व्यवस्था की गई। इस दौरान पानी समिति के सेवादार जहां पंडाल में घूम-घूम कर साध-संगत को पानी पिला रहे थे। वहीं अनेक स्थानों पर छबीलें लगाई थीं।
पुलिस रही तैनात, संभाले रखी यातायात व्यवस्था
डेरा के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस की ओर से भी व्यापक प्रबंध किए गए। डेरे की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात की गई। यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस के साथ-साथ डेरा के सेवादारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नामचर्चा के दौरान डेरे के बाहर लगी अनुयायियों की भीड़।- फोटो : Sirsa

डेरा प्रमुख द्वारा जारी चिट्ठ। संवाद- फोटो : Sirsa

सत्संग में प्रवचन सुनती हनी प्रीत।- फोटो : Sirsa