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Sirsa News: शारदा ने संवारा भविष्य, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
Wed, 23 Sep 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:07 AM IST
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सिरसा। सिलाई करते हुए शारदा देवी। विभाग
10 हजार के शुरुआती ऋण से शुरू किया सिलाई का काम, मनिहारी की दुकान और पशुपालन से बढ़ाई आमदनी
फोटो - 27
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चोपटा क्षेत्र के गांव जमाल की शारदा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपना भविष्य संवारा है। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं। वर्ष 2019 में बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं थी।
शारदा को समूह के माध्यम से शुरुआत में 10 हजार रुपये का ऋण मिला। इस आर्थिक सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया। वर्ष 2021 में उन्होंने करीब 50 हजार रुपये की पूंजी लगाकर मनिहारी की दुकान खोली।
इसके बाद समूह से उन्हें एक लाख रुपये का और ऋण प्राप्त हुआ। इस ऋण का उपयोग उन्होंने मनिहारी की दुकान और सिलाई के काम को बढ़ाने में किया। उन्होंने बैंक से ऋण लेकर भैंस खरीदी और पशुपालन का काम भी शुरू किया।
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शारदा ने स्वरोजगार के लिए भेड़-बकरी पालन और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण भी लिया। आज वह विभिन्न गतिविधियों से प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
प्रेरणा का स्रोत
शारदा की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है। वह स्वयं सहायता समूह के साथ ग्राम संगठन और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति टीम से जुड़ी हैं। वह समूह की अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। शारदा का कहना है कि समूह से उन्हें आर्थिक सहयोग और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।
कौशल का उपयोग
शारदा ने बताया कि प्रशिक्षण और ऋण सुविधा का सही उपयोग कर महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदल सकती हैं। उनकी कहानी बताती है कि उचित मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है। महिलाएं अपने कौशल से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में प्रेरणा बन रही है।
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फोटो - 27
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सिरसा। चोपटा क्षेत्र के गांव जमाल की शारदा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपना भविष्य संवारा है। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं। वर्ष 2019 में बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं थी।
शारदा को समूह के माध्यम से शुरुआत में 10 हजार रुपये का ऋण मिला। इस आर्थिक सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया। वर्ष 2021 में उन्होंने करीब 50 हजार रुपये की पूंजी लगाकर मनिहारी की दुकान खोली।
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इसके बाद समूह से उन्हें एक लाख रुपये का और ऋण प्राप्त हुआ। इस ऋण का उपयोग उन्होंने मनिहारी की दुकान और सिलाई के काम को बढ़ाने में किया। उन्होंने बैंक से ऋण लेकर भैंस खरीदी और पशुपालन का काम भी शुरू किया।
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शारदा ने स्वरोजगार के लिए भेड़-बकरी पालन और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण भी लिया। आज वह विभिन्न गतिविधियों से प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
प्रेरणा का स्रोत
शारदा की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है। वह स्वयं सहायता समूह के साथ ग्राम संगठन और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति टीम से जुड़ी हैं। वह समूह की अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। शारदा का कहना है कि समूह से उन्हें आर्थिक सहयोग और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।
कौशल का उपयोग
शारदा ने बताया कि प्रशिक्षण और ऋण सुविधा का सही उपयोग कर महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदल सकती हैं। उनकी कहानी बताती है कि उचित मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है। महिलाएं अपने कौशल से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में प्रेरणा बन रही है।