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Sirsa News: यूसीएस 7 की जांच फाइल, अब यूसीएस 0 की जांच करवाएंगे पार्षद
Wed, 23 Sep 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:20 AM IST
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- जांच में जुटे दो विभाग के अधिकारी, 35 प्रतिशत माइनस तक किए गए कामों की सामने आने लगी सच्चाई
- एक माह तक जांच करने वाली ऑडिट को भी दस्तावेज में गुमराह करते रहे अधिकारी
- एक ठेकेदार ने लिखित में जांच कमेटी को दी शिकायत, उसकी बनाई गली के भी दोबारा बनाए गए बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर की नई बनीं कॉलोनियों में विकास कार्य में माइनस के खेल ने कई चीजें सामने लाकर रख दी हैं। जांच कमेटी के सामने आए तथ्यों को झुठलाना अब संभव नहीं है। यूसीएस सात के बाद अब यूसीएस 0 की जांच करवाने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
धीरे-धीरे सभी कॉलोनियों की सड़कों की जांच पार्षद करवाएंगे और एक मजबूत रिकॉर्ड भ्रष्टाचार का तैयार करेंगे ताकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष पेश कर सकें। इसी आधार पर वे साबित करेंगे कि सरकार के कुछ नुमाइंदे अधिकारियों को शह देकर कितने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये विकास कार्य के लिए भेजती है। धरातल पर उसका 50 प्रतिशत भी पूरी तरह से नहीं लगता है। यूसीएस 7 की जांच में यह खुलकर सामने आ चुका है। वहीं, माइनस में टेंडर लेने वाले ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठ गए हैं। कैसे माइनस में टेंडर लेने वाले ठेकेदार आधा काम कर पूरे कार्य का भुगतान लेता है।
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इस संबंध में मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ सुरेश ने बताया कि हमारी ओर से लगभग जांच हो चुकी है। तत्कालीन जेई को बुलाने की कार्रवाई नगर परिषद की ओर से की जानी है। वह हमें सूचित करेंगे तभी कोई पुन: मौका मुआयना होगा अन्यथा जांच पूरी हो चुकी हैं।
यह बताया ठेकेदार ने
नगर परिषद के एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नगर परिषद में बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चलता है। 30 से 35 प्रतिशत तक कई ठेकेदार माइनस में टेंडर लेते हैं। 18 प्रतिशत के आसपास कमीशन अलग-अलग तरीके से देते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि कितना प्रतिशत वह काम सड़कों पर करते हैं।
ऑडिट को गुमराह करने का किया गया काम
नगर परिषद में इसी साल एक माह तक स्टेट ऑडिट टीम ने चार साल के विकास कार्यों का ऑडिट किया था। ऑडिट के दौरान दस्तावेज को पूरा किया गया और ऑडिट अधिकारियों को गुमराह किया। उन्होंने फाइलों को सही ठहराया और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का ऑडिट कर दिया। अब ऑडिट की गई उन्हीं फाइलों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिल रही है।
सरकार की इन गाइडलाइनों का नहीं किया गया पालन
गलियों के साइन बोर्ड नहीं लगाए गए
गलियों के यदि साइन बोर्ड लगाए गए होते तो पार्षद से लेकर आमजन को पता होता कि वार्ड में कौन-कौन सी गलियां बनी हैं। अधिकारी लगातार यह कहकर टालते रहे कि लोहे के बोर्ड चोरी हो जाएंगे और हर गली के लिए बोर्ड संभव नहीं है।
सैटेलाइट लोकेशन फोटो फाइलों की जांच में सामने आया है कि सड़क निर्माण से पहले कोई सैटेलाइट लोकेशन के आधार पर फोटो नहीं लिया गया। कई गलियों का फोटो तक नहीं लगाया गया है। यही कारण है कि गड़बड़ी की आशंका और प्रबल हो जाती है।
- अनुमान के आधार पर लगाए गए टेंडर
जांच में सामने आया है कि गलियों को लेकर अनुमान के आधार पर टेंडर तैयार किए गए हैं। जैसे-जैसे मौअजिज लोग व राजनीतिक लोगों ने मांग की फोन या अन्य माध्यमों से सड़क का अनुमानित एस्टीमेट बना दिया गया। यही अनुमान बाद में परेशानी बन गया।
अधिकारियों के स्वीकृति पत्र जांच में सामने आया है कि टेंडर किसी अन्य क्षेत्र का लगाया गया और सड़क कहीं और बना दी गई। इस संबंध में किसी भी प्रकार का पत्राचार या नोटिंग नहीं चलाई गई। खासतौर पर मौखिक आदेशों की पालन की गई है जो नियमानुसार गलत है।
एक्सईएन बुलाएं पत्र भेजकर जेई को
बीएंडआर और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की जांच लगभग पूर्ण हो चुकी है। इसमें 50 प्रतिशत ही यूसीएस 7 में काम हुआ पाया गया है। इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ है। हालांकि, जेई ने तत्कालीन जेई को जानकारी होने का हवाला दिया था। ऐसे में अधिकारियों ने उन्हें बुलाने पर सहमति जताई थी। अब नगर परिषद एक्सईएन अपने स्तर पर तत्कालीन जेई प्रवीण कुमार को पत्र लिखकर बुलाएंगे और उस बारे में जांच अधिकारियों को सूचित करेंगे। ऐसा तभी संभव है जब एक्सईएन चाहेंगे, अन्यथा मौजूदा जांच फाइनल हो चुकी हैं।
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- एक माह तक जांच करने वाली ऑडिट को भी दस्तावेज में गुमराह करते रहे अधिकारी
- एक ठेकेदार ने लिखित में जांच कमेटी को दी शिकायत, उसकी बनाई गली के भी दोबारा बनाए गए बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर की नई बनीं कॉलोनियों में विकास कार्य में माइनस के खेल ने कई चीजें सामने लाकर रख दी हैं। जांच कमेटी के सामने आए तथ्यों को झुठलाना अब संभव नहीं है। यूसीएस सात के बाद अब यूसीएस 0 की जांच करवाने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
धीरे-धीरे सभी कॉलोनियों की सड़कों की जांच पार्षद करवाएंगे और एक मजबूत रिकॉर्ड भ्रष्टाचार का तैयार करेंगे ताकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष पेश कर सकें। इसी आधार पर वे साबित करेंगे कि सरकार के कुछ नुमाइंदे अधिकारियों को शह देकर कितने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
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प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये विकास कार्य के लिए भेजती है। धरातल पर उसका 50 प्रतिशत भी पूरी तरह से नहीं लगता है। यूसीएस 7 की जांच में यह खुलकर सामने आ चुका है। वहीं, माइनस में टेंडर लेने वाले ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल उठ गए हैं। कैसे माइनस में टेंडर लेने वाले ठेकेदार आधा काम कर पूरे कार्य का भुगतान लेता है।
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इस संबंध में मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ सुरेश ने बताया कि हमारी ओर से लगभग जांच हो चुकी है। तत्कालीन जेई को बुलाने की कार्रवाई नगर परिषद की ओर से की जानी है। वह हमें सूचित करेंगे तभी कोई पुन: मौका मुआयना होगा अन्यथा जांच पूरी हो चुकी हैं।
यह बताया ठेकेदार ने
नगर परिषद के एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नगर परिषद में बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चलता है। 30 से 35 प्रतिशत तक कई ठेकेदार माइनस में टेंडर लेते हैं। 18 प्रतिशत के आसपास कमीशन अलग-अलग तरीके से देते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि कितना प्रतिशत वह काम सड़कों पर करते हैं।
ऑडिट को गुमराह करने का किया गया काम
नगर परिषद में इसी साल एक माह तक स्टेट ऑडिट टीम ने चार साल के विकास कार्यों का ऑडिट किया था। ऑडिट के दौरान दस्तावेज को पूरा किया गया और ऑडिट अधिकारियों को गुमराह किया। उन्होंने फाइलों को सही ठहराया और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का ऑडिट कर दिया। अब ऑडिट की गई उन्हीं फाइलों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिल रही है।
सरकार की इन गाइडलाइनों का नहीं किया गया पालन
गलियों के साइन बोर्ड नहीं लगाए गए
गलियों के यदि साइन बोर्ड लगाए गए होते तो पार्षद से लेकर आमजन को पता होता कि वार्ड में कौन-कौन सी गलियां बनी हैं। अधिकारी लगातार यह कहकर टालते रहे कि लोहे के बोर्ड चोरी हो जाएंगे और हर गली के लिए बोर्ड संभव नहीं है।
सैटेलाइट लोकेशन फोटो फाइलों की जांच में सामने आया है कि सड़क निर्माण से पहले कोई सैटेलाइट लोकेशन के आधार पर फोटो नहीं लिया गया। कई गलियों का फोटो तक नहीं लगाया गया है। यही कारण है कि गड़बड़ी की आशंका और प्रबल हो जाती है।
- अनुमान के आधार पर लगाए गए टेंडर
जांच में सामने आया है कि गलियों को लेकर अनुमान के आधार पर टेंडर तैयार किए गए हैं। जैसे-जैसे मौअजिज लोग व राजनीतिक लोगों ने मांग की फोन या अन्य माध्यमों से सड़क का अनुमानित एस्टीमेट बना दिया गया। यही अनुमान बाद में परेशानी बन गया।
अधिकारियों के स्वीकृति पत्र जांच में सामने आया है कि टेंडर किसी अन्य क्षेत्र का लगाया गया और सड़क कहीं और बना दी गई। इस संबंध में किसी भी प्रकार का पत्राचार या नोटिंग नहीं चलाई गई। खासतौर पर मौखिक आदेशों की पालन की गई है जो नियमानुसार गलत है।
एक्सईएन बुलाएं पत्र भेजकर जेई को
बीएंडआर और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की जांच लगभग पूर्ण हो चुकी है। इसमें 50 प्रतिशत ही यूसीएस 7 में काम हुआ पाया गया है। इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ है। हालांकि, जेई ने तत्कालीन जेई को जानकारी होने का हवाला दिया था। ऐसे में अधिकारियों ने उन्हें बुलाने पर सहमति जताई थी। अब नगर परिषद एक्सईएन अपने स्तर पर तत्कालीन जेई प्रवीण कुमार को पत्र लिखकर बुलाएंगे और उस बारे में जांच अधिकारियों को सूचित करेंगे। ऐसा तभी संभव है जब एक्सईएन चाहेंगे, अन्यथा मौजूदा जांच फाइनल हो चुकी हैं।