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स्कूलों के पास नहीं पर्याप्त कमरे, विद्यार्थी खुले में कक्षाएं लगाने को मजबूर
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प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हुए।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। जिले के राजकीय स्कूलों में पढ़ने वालों विद्यार्थियों को इस सर्दी में भी ठंड के थपेड़े सहने पड़ेंगे। स्कूलों में कमरों की कमी के चलते विद्यार्थी कक्षाएं बाहर खुले मैदानों में लगा रहे हैं तो कही दो शिफ्टों में स्कूल चल रहे हैं। सातों खंडों से हर वर्ष स्कूल में कमरे बनाने को लेकर डिमांड भेजी जाती है। जिस पर निदेशालय के उच्च अधिकारियों की बैठक होती है लेकिन उन्हें अप्रूवल नहीं मिलती। तो वहीं स्कूलों में पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक तक नहीं है। प्रैक्टिस के लिए आए छात्रअध्यापक अब बच्चों का सहारा बने हुए हैं।
निदेशालय द्वारा हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या अधिक बढ़ाने पर तो बल दिया जा रहा है लेकिन स्कूलों में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। जिले के अधिक संख्या वाले स्कूलों में तो विद्यार्थियों के बैठने तक का प्रबंध नहीं और ना ही उनमें पर्याप्त कमरे हैं। जिसके कारण विद्यार्थियों को खुले में कक्षाएं लगानी पड़ रही। दिसंबर माह में जैसे तैसे सूर्य की तपिश में बैठकर विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। कोहरा होने पर विद्यार्थियोें को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि शिक्षा निदेशालय द्वारा कोरोना काल के बाद राजकीय स्कूलों में दाखिले बढ़ाने को लेकर अभियान चलाया था। जिससे प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कई गुणा अधिक बढ़ गई थी। लेकिन निदेशालय द्वारा विद्यार्थियों के अनुपात में अभी तक स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने को लेकर अप्रूवल नहीं दी जा रही।
बच्चे कक्षाओं के बाहर, आंगनबाड़ी को दिया कमरा
खंड सिरसा में शहर के राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद भी जिला शिक्षा विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र को कमरा देने के आदेश दिए गए हैं। पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी खुले मैदानों में बाहर बैठकर कक्षाएं लगा रहे हैं। स्कूल लगने का समय सुबह 9 बजे का होता है। अधिक ठंड होने के बावजूद भी विद्यार्थियों को बाहर बैठना पड़ता है।
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बैठने के लिए नहीं है पर्याप्त बैंच
राजकीय स्कूलों की कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए बैंचों की कमी है। जिसके चलते विद्यार्थियों को सर्द मौसम में भी फर्श पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है। हालांकि विभाग द्वारा कोरोना काल के दौरान स्कूलों से बैंचों की डिमांड मांगी थी। स्कूलों द्वारा 12 हजार से अधिक बैंचों की डिमांड की गई थी लेकिन ना तो बैंच आए ना ही इसे लेकर कोई दूसरा विकल्प सुझाव में दिया गया।
स्कूलों में अध्यापकों की कमी, पूरा नहीं हो पा रहा पाठ्यक्रम
स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम अभी अधर में लटक रहा है। ट्रेनिंग के लिए आए छात्र अध्यापक बच्चों को सीनियर अध्यापकों की देख रेख में पढ़ाई करवा रहे हैं। चार महीने की ट्रेनिंग के दौरान यह एक अध्यापक जितना कार्य करेंगे। जिला शिक्षा विभाग के पास बच्चों का दूसरे टर्म का पाठ्यक्रम करवाने के लिए कोई प्लान नहीं है।
शहर के सबसे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल, जाने कैसी है स्थिति
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महाबीर दल दो शिफ्टों में चल रहा है। यहां करीब 1300 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एक शिफ्ट में कक्षाएं लगाने के लिए 8 कमरों की जरूरत है।
- राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल अनाज मंडी में 1700 विद्यार्थी हैं। यहां पर 24 कमरों की डिमांड है। 10 कमरों की मिल चुकी है अप्रूवल। पर अभी भी शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य।
-- राजकीय प्राथमिक स्कूल में 495 विद्यार्थी, 14 सेक्शन, 5 कमरों की जरूरत।
-- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल खैरपूर में 12 कमरों की जरूरत, करीब 2000 हजार विद्यार्थी ले रहे हैं शिक्षा।
-- राजकीय हाई स्कूल चत्तरगढ़पट्टी दो शिफ्टों में चल रहा है, 12 कमरों की डिमांड।
प्रधानमंत्री गण विकास योजना के तहत जिले के स्कूलों के लिए करीब 150 कमरे की डिमांड की गई है। साथ ही 10 कमरे डीएसई से मांग की है।
-मनमीत सिंह, एसडीओ, समग्र शिक्षा अभियान।
राजकीय स्कूलों में कमरों की डिमांड को लेकर निदेशालय के पास पूरी जानकारी है।
-संत कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
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निदेशालय द्वारा हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या अधिक बढ़ाने पर तो बल दिया जा रहा है लेकिन स्कूलों में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। जिले के अधिक संख्या वाले स्कूलों में तो विद्यार्थियों के बैठने तक का प्रबंध नहीं और ना ही उनमें पर्याप्त कमरे हैं। जिसके कारण विद्यार्थियों को खुले में कक्षाएं लगानी पड़ रही। दिसंबर माह में जैसे तैसे सूर्य की तपिश में बैठकर विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। कोहरा होने पर विद्यार्थियोें को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि शिक्षा निदेशालय द्वारा कोरोना काल के बाद राजकीय स्कूलों में दाखिले बढ़ाने को लेकर अभियान चलाया था। जिससे प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कई गुणा अधिक बढ़ गई थी। लेकिन निदेशालय द्वारा विद्यार्थियों के अनुपात में अभी तक स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने को लेकर अप्रूवल नहीं दी जा रही।
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बच्चे कक्षाओं के बाहर, आंगनबाड़ी को दिया कमरा
खंड सिरसा में शहर के राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद भी जिला शिक्षा विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र को कमरा देने के आदेश दिए गए हैं। पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी खुले मैदानों में बाहर बैठकर कक्षाएं लगा रहे हैं। स्कूल लगने का समय सुबह 9 बजे का होता है। अधिक ठंड होने के बावजूद भी विद्यार्थियों को बाहर बैठना पड़ता है।
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बैठने के लिए नहीं है पर्याप्त बैंच
राजकीय स्कूलों की कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए बैंचों की कमी है। जिसके चलते विद्यार्थियों को सर्द मौसम में भी फर्श पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है। हालांकि विभाग द्वारा कोरोना काल के दौरान स्कूलों से बैंचों की डिमांड मांगी थी। स्कूलों द्वारा 12 हजार से अधिक बैंचों की डिमांड की गई थी लेकिन ना तो बैंच आए ना ही इसे लेकर कोई दूसरा विकल्प सुझाव में दिया गया।
स्कूलों में अध्यापकों की कमी, पूरा नहीं हो पा रहा पाठ्यक्रम
स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम अभी अधर में लटक रहा है। ट्रेनिंग के लिए आए छात्र अध्यापक बच्चों को सीनियर अध्यापकों की देख रेख में पढ़ाई करवा रहे हैं। चार महीने की ट्रेनिंग के दौरान यह एक अध्यापक जितना कार्य करेंगे। जिला शिक्षा विभाग के पास बच्चों का दूसरे टर्म का पाठ्यक्रम करवाने के लिए कोई प्लान नहीं है।
शहर के सबसे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल, जाने कैसी है स्थिति
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महाबीर दल दो शिफ्टों में चल रहा है। यहां करीब 1300 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एक शिफ्ट में कक्षाएं लगाने के लिए 8 कमरों की जरूरत है।
- राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल अनाज मंडी में 1700 विद्यार्थी हैं। यहां पर 24 कमरों की डिमांड है। 10 कमरों की मिल चुकी है अप्रूवल। पर अभी भी शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य।
-- राजकीय प्राथमिक स्कूल में 495 विद्यार्थी, 14 सेक्शन, 5 कमरों की जरूरत।
-- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल खैरपूर में 12 कमरों की जरूरत, करीब 2000 हजार विद्यार्थी ले रहे हैं शिक्षा।
-- राजकीय हाई स्कूल चत्तरगढ़पट्टी दो शिफ्टों में चल रहा है, 12 कमरों की डिमांड।
प्रधानमंत्री गण विकास योजना के तहत जिले के स्कूलों के लिए करीब 150 कमरे की डिमांड की गई है। साथ ही 10 कमरे डीएसई से मांग की है।
-मनमीत सिंह, एसडीओ, समग्र शिक्षा अभियान।
राजकीय स्कूलों में कमरों की डिमांड को लेकर निदेशालय के पास पूरी जानकारी है।
-संत कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।

डेस्क के अभाव में दरी पर बैठै विद्यार्थी।- फोटो : Sirsa

कमरों के अभाव में खुले में बैठे पढ़ाई करते विद्यार्थी।- फोटो : Sirsa

राजकीय विद्यालय में खुले में लग रही कक्षाएं।- फोटो : Sirsa