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Sirsa News: स्पेशल गिरदावरी और क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की प्रक्रिया शुरू
Sat, 02 Aug 2025 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:17 PM IST
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चाेपटा। विधायक भरत सिंह बैनीवाल को खराबे के बारे में जानकारी देते हुए किसान। संवाद
चोपटा। सिरसा जिले के चोपटा क्षेत्र में हाल ही में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र के सेमग्रस्त गांवों में जलभराव के कारण नरमा, कपास, ग्वार, मूंगफली, मूंग और बाजरे जैसी खरीफ फसलें बर्बाद होने लगी हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बैनीवाल ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखाकर 35000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की मांग उठाई थी। इसी मामले में संज्ञान लेते हुए सिरसा के उपायुक्त ने स्पेशल गिरदावरी और क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने के आदेश जारी किए हैं। विधायक ने शनिवार को भी गांव शक्कर मंदोरी, शाहपुरिया, रुपाणा, माखोसरानी सहित कई गांवों के खेतों में जाकर स्थिति का जायजा लिया।
उपायुक्त की ओर से तहसीलदार नाथूसरी चोपटा और ऐलनाबाद को पत्र भेजकर जलभराव वाले गांवों की फसलों का गांव वार आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही, स्पेशल गिरदावरी कराकर पोर्टल पर क्षतिपूर्ति के लिए डेटा अपलोड करने और किसानों को मुआवजा दिलवाने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त कार्यालय को विधायक भरत सिंह बैनीवाल का पत्र प्राप्त हुआ था। विधायक ने बारिश से हुए फसल नुकसान का ब्यौरा, ग्रामीण स्तर पर गिरदावरी की मांग और किसानों को मुआवजा देने की अपील की गई थी।
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10 से अधिक गांवों में फसलें जलमग्न, शत प्रतिशत नुकसान
तीन चार दिनों से लगातार हो रही से नाथूसरी चोपटा खंड के करीब 10 गांवों में 2608 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ चुकी है। कृषि विभाग के अनुसार, इनमें से 1110 एकड़ में 50 से 75 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है, जबकि 1500 एकड़ भूमि पर 100 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है। इनमें मुख्य रूप से गांव चाहरवाला, तरकांवाली, शाहपुरिया, शक्कर मंदोरी, गंजा रुपाणा, रुपाणा बिश्नोईयां, माखोसरानी, नाथूसरी कला, हजीरा, लुदेसर, रुपाणा खुर्द, दड़बा कलां, गुड़िया खेड़ा, रूपवास, रायपुर प्रमुख हैं।
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किसानों से अपील: फसल नष्ट न करें जब तक गिरदावरी पूरी न हो
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे जलभराव वाली फसलों को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट न करें। जब तक कि विभाग की ओर से स्पेशल गिरदावरी या क्रॉप कटिंग रिपोर्ट तैयार नहीं कर ली जाती। विभाग ने स्पष्ट किया कि अब सावन की फसल का बिजाई समय समाप्त हो चुका है, और रबी की फसल की तैयारी में अभी समय है। इसलिए किसान जल्दबाजी न करें, ताकि सरकारी प्रक्रिया में कोई दिक्कत न आए।
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किसान बोले- उत्पादन शून्य, खर्च 10 हजार रुपये प्रति एकड़
गांव के किसान वीरेंद्र कासनिया, संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, सुभाष चंद्र, मनीष, विनोद, राजेंद्र, प्रवीण कुमार आदि ने विधायक से अपनी स्थिति सांझा की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण उनके खेतों में पानी भर गया है। नरमा, कपास, ग्वार, मूंगफली, मूंग और बाजरे की फसलें पूरी तरह सूखने लगी हैं और अब वे नष्ट होने के कगार पर हैं।किसानों ने बताया कि एक एकड़ पर उन्होंने 8000 से 10,000 रुपये तक की लागत पहले ही लगा दी है, लेकिन अब उत्पादन पूरी तरह से शून्य हो सकता है। अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी।
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उपायुक्त की ओर से तहसीलदार नाथूसरी चोपटा और ऐलनाबाद को पत्र भेजकर जलभराव वाले गांवों की फसलों का गांव वार आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही, स्पेशल गिरदावरी कराकर पोर्टल पर क्षतिपूर्ति के लिए डेटा अपलोड करने और किसानों को मुआवजा दिलवाने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त कार्यालय को विधायक भरत सिंह बैनीवाल का पत्र प्राप्त हुआ था। विधायक ने बारिश से हुए फसल नुकसान का ब्यौरा, ग्रामीण स्तर पर गिरदावरी की मांग और किसानों को मुआवजा देने की अपील की गई थी।
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10 से अधिक गांवों में फसलें जलमग्न, शत प्रतिशत नुकसान
तीन चार दिनों से लगातार हो रही से नाथूसरी चोपटा खंड के करीब 10 गांवों में 2608 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ चुकी है। कृषि विभाग के अनुसार, इनमें से 1110 एकड़ में 50 से 75 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है, जबकि 1500 एकड़ भूमि पर 100 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है। इनमें मुख्य रूप से गांव चाहरवाला, तरकांवाली, शाहपुरिया, शक्कर मंदोरी, गंजा रुपाणा, रुपाणा बिश्नोईयां, माखोसरानी, नाथूसरी कला, हजीरा, लुदेसर, रुपाणा खुर्द, दड़बा कलां, गुड़िया खेड़ा, रूपवास, रायपुर प्रमुख हैं।
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किसानों से अपील: फसल नष्ट न करें जब तक गिरदावरी पूरी न हो
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे जलभराव वाली फसलों को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट न करें। जब तक कि विभाग की ओर से स्पेशल गिरदावरी या क्रॉप कटिंग रिपोर्ट तैयार नहीं कर ली जाती। विभाग ने स्पष्ट किया कि अब सावन की फसल का बिजाई समय समाप्त हो चुका है, और रबी की फसल की तैयारी में अभी समय है। इसलिए किसान जल्दबाजी न करें, ताकि सरकारी प्रक्रिया में कोई दिक्कत न आए।
किसान बोले- उत्पादन शून्य, खर्च 10 हजार रुपये प्रति एकड़
गांव के किसान वीरेंद्र कासनिया, संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, सुभाष चंद्र, मनीष, विनोद, राजेंद्र, प्रवीण कुमार आदि ने विधायक से अपनी स्थिति सांझा की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण उनके खेतों में पानी भर गया है। नरमा, कपास, ग्वार, मूंगफली, मूंग और बाजरे की फसलें पूरी तरह सूखने लगी हैं और अब वे नष्ट होने के कगार पर हैं।किसानों ने बताया कि एक एकड़ पर उन्होंने 8000 से 10,000 रुपये तक की लागत पहले ही लगा दी है, लेकिन अब उत्पादन पूरी तरह से शून्य हो सकता है। अगर जल्द मुआवजा नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी।