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निजी स्कूल बसों में ताक पर सुरक्षा मानक, फर्स्ट एड बॉक्स मिले न अग्निशमन यंत्र
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बस की जांच करते एसएचओ।
- फोटो : Sirsa
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पंजाब के संगरूर में जर्जर स्कूली वैन में आग लगने से चार बच्चों की मौत के बावजूद जिले में स्कूलों बच्चों के लिए सुरक्षित वाहन पॉलिसी पर अमल नहीं हो रहा है। पैसे पूरे लेने के बावजूद निजी स्कूलों की कई बसों में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बच्चों को पहुंचाया जा रहा है। मंगलवार को यातायात पुलिस ने 14 स्कूली वाहनों की चेकिंग की तो आठ में सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एंड किट बॉक्स, अग्निशमन उपकरण, हेल्पर, ड्राइवर के यूनिफार्म नहीं मिले। बसों के कागजात भी पूरे नहीं पाए गए। सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर यातायात पुलिस ने आठ निजी स्कूलों की बसों के चालान काटे।
यातायात पुलिस ने महाराणा प्रताप सिंह चौक पर 14 स्कूली बसों की जांच की, जिनमें से आठ बसों में सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर 10 हजार रुपये के चालान काटे गए। एसएचओ की जांच के दौरान एक निजी स्कूल की बस के कागजात जांचने के लिए मांगे तो ड्राइवर द्वारा आधे अधूरे कागजात दिखा दिए। एसएचओ ने ड्राइवर से लाइसेंस मांगा तो ड्राइवर ने कहा कि वो तो स्कूल में जमा है। एसएचओ बोले कि बच्चों को छोड़कर वापस आना और आते समय डीएल साथ लेकर आना। ड्राइवर द्वारा स्कूल प्रबंधन को सूचना भेजी गई, तो स्कूल प्रबंधक एसएचओ के पास पहुंचे और कागजात पूरे होने की बात कहने लगे। स्कूल प्रबंधन के सामने कागजात दोबारा जांचने के बाद एसएचओ बोले कि ये सभी कागजात की नकल है। असल कागजात दिखाओ, ड्राइवर के पास लाइसेंस तक नहीं है। कागजात पूरे न होने पर बस ड्राइवर का एक हजार का चालान काट दिया गया।
जिले में 1500 बसें रजिस्टर्ड, अधिकांश कबाड़
बता दें कि जिले में रजिस्टर्ड 1500 निजी स्कूल बसों में से काफी बसें ऐसी हैं, जो कबाड़ की स्थिति में है। ऐसी बसें कभी भी बड़े हादसों को न्यौता दे सकती हैं। इसके बावजूद भी वे सड़कों पर दौड़ रही हैं। हालांकि आरटीए विभाग ने कुछ दिन पहले मात्र तीन बसों को इंपाउंड करके जांच के नाम पर खानापूर्ति की थी। आरटीए विभाग खटारा बसों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा और न ही बसों को जांचने के लिए कभी भी गंभीर प्रयास किया जाता।
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चेकिंग के दौरान आठ बसों के चालान काटे गए हैं। अभी भी कई ऐसी स्कूल बसें हैं, जिनपर पीला रंग तक नहीं किया गया है। कई बसों में कैमरे लगे हैं, लेकिन चल नहीं रहे। स्कूल बस चालक पूरे कागजातों के साथ सड़क पर उतरे नहीं तो चालान काटा जाएगा।
- बहादुर सिंह एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस।
स्कूल वाहनों के लिए ये हैं मानक
- स्कूल बस या वाहन का रंग पीला होगा। वाहन पर सामने की तरफ सफेद रिफलेक्टिव टेप होगी। पीछे की तरफ लाल रंग रिफलेक्टर वाहन के अनुसार होगा और पीले रंग की रिफलेक्टिव टेप होगी।
- यह टेप 50 एमएम से कम चौड़ी नहीं होनी चाहिए और बीआईएस मानकों के अनुसार होंगे। इन वाहनों में स्पीड गवर्नर मानक एआईएस 018 के अनुसार लगेंगे। ये स्पीड गवर्नर राज्य परिवहन आयुक्त कार्यालय से स्वीकृत डीलर और निर्माता से लगे होने चाहिए। प्रशिक्षित, अनुभवी और अच्छे स्वभाव का चालक होना चाहिए।
- बस में एक अटेंडेंट या कंडक्टर होगा। चालक के पास कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए। चालक के जंपिंग, लाल बत्ती, गलत पार्किंग जैसे तीन से ज्यादा चालान नहीं होने चाहिए।
- बस 50 किमी. की स्पीड से ज्यादा नहीं चलेगी। स्कूल परिसर के भीतर बच्चे उतारे जाएंगे और वहीं से सवार होंगे। बस में फर्स्ट एड बॉक्स और आग बुझाने वाला यंत्र होना चाहिए।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूल वाहनों की जांच की मांग उठाई, सौंपा ज्ञापन
पैरेंट्स एसोसिएशन हरियाणा ने अतिरिक्त उपायुक्त सिरसा को ज्ञापन सौंपकर प्राइवेट स्कूलों में चलाई जा रही स्कूल बसों व वैन का निरीक्षण करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रधान सौरभ मेहता, उप प्रधान चिक्की मैहता, सचिव राके फुटेला मौजूद थे। ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन के उक्त पदाधिकारियों ने एडीसी सिरसा को बताया कि 15 फरवरी 2020 को पंजाब के संगरूर में एक दिन पहले 25 हजार रुपये स्कूल द्वारा कबाड़ में खरीदी वैन में आग लग गई थी, जिससे चार बच्चे जिंदा जल गए और आठ बच्चों को बड़ी मुश्किल से बचाया। सिरसा जिला में अनेक प्राइवेट स्कूल बिना परमिट के बसें चला रहे हैं और सरकार द्वारा निर्धारित पीले रंग की बजाए सफेद रंग, बिना हैवी लाइसेंस, बिना फास्ट एंड बॉक्स, बिना लेडी परिचालक के चलाया जा रहा है। फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं लिया जा रहा। उक्त पदाधिकारियों के अनुसार एडीसी सिरसा ने इस संबंध में उचित कार्रवाई का विश्वास दिलाया है।
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यातायात पुलिस ने महाराणा प्रताप सिंह चौक पर 14 स्कूली बसों की जांच की, जिनमें से आठ बसों में सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर 10 हजार रुपये के चालान काटे गए। एसएचओ की जांच के दौरान एक निजी स्कूल की बस के कागजात जांचने के लिए मांगे तो ड्राइवर द्वारा आधे अधूरे कागजात दिखा दिए। एसएचओ ने ड्राइवर से लाइसेंस मांगा तो ड्राइवर ने कहा कि वो तो स्कूल में जमा है। एसएचओ बोले कि बच्चों को छोड़कर वापस आना और आते समय डीएल साथ लेकर आना। ड्राइवर द्वारा स्कूल प्रबंधन को सूचना भेजी गई, तो स्कूल प्रबंधक एसएचओ के पास पहुंचे और कागजात पूरे होने की बात कहने लगे। स्कूल प्रबंधन के सामने कागजात दोबारा जांचने के बाद एसएचओ बोले कि ये सभी कागजात की नकल है। असल कागजात दिखाओ, ड्राइवर के पास लाइसेंस तक नहीं है। कागजात पूरे न होने पर बस ड्राइवर का एक हजार का चालान काट दिया गया।
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जिले में 1500 बसें रजिस्टर्ड, अधिकांश कबाड़
बता दें कि जिले में रजिस्टर्ड 1500 निजी स्कूल बसों में से काफी बसें ऐसी हैं, जो कबाड़ की स्थिति में है। ऐसी बसें कभी भी बड़े हादसों को न्यौता दे सकती हैं। इसके बावजूद भी वे सड़कों पर दौड़ रही हैं। हालांकि आरटीए विभाग ने कुछ दिन पहले मात्र तीन बसों को इंपाउंड करके जांच के नाम पर खानापूर्ति की थी। आरटीए विभाग खटारा बसों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा और न ही बसों को जांचने के लिए कभी भी गंभीर प्रयास किया जाता।
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चेकिंग के दौरान आठ बसों के चालान काटे गए हैं। अभी भी कई ऐसी स्कूल बसें हैं, जिनपर पीला रंग तक नहीं किया गया है। कई बसों में कैमरे लगे हैं, लेकिन चल नहीं रहे। स्कूल बस चालक पूरे कागजातों के साथ सड़क पर उतरे नहीं तो चालान काटा जाएगा।
- बहादुर सिंह एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस।
स्कूल वाहनों के लिए ये हैं मानक
- स्कूल बस या वाहन का रंग पीला होगा। वाहन पर सामने की तरफ सफेद रिफलेक्टिव टेप होगी। पीछे की तरफ लाल रंग रिफलेक्टर वाहन के अनुसार होगा और पीले रंग की रिफलेक्टिव टेप होगी।
- यह टेप 50 एमएम से कम चौड़ी नहीं होनी चाहिए और बीआईएस मानकों के अनुसार होंगे। इन वाहनों में स्पीड गवर्नर मानक एआईएस 018 के अनुसार लगेंगे। ये स्पीड गवर्नर राज्य परिवहन आयुक्त कार्यालय से स्वीकृत डीलर और निर्माता से लगे होने चाहिए। प्रशिक्षित, अनुभवी और अच्छे स्वभाव का चालक होना चाहिए।
- बस में एक अटेंडेंट या कंडक्टर होगा। चालक के पास कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए। चालक के जंपिंग, लाल बत्ती, गलत पार्किंग जैसे तीन से ज्यादा चालान नहीं होने चाहिए।
- बस 50 किमी. की स्पीड से ज्यादा नहीं चलेगी। स्कूल परिसर के भीतर बच्चे उतारे जाएंगे और वहीं से सवार होंगे। बस में फर्स्ट एड बॉक्स और आग बुझाने वाला यंत्र होना चाहिए।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूल वाहनों की जांच की मांग उठाई, सौंपा ज्ञापन
पैरेंट्स एसोसिएशन हरियाणा ने अतिरिक्त उपायुक्त सिरसा को ज्ञापन सौंपकर प्राइवेट स्कूलों में चलाई जा रही स्कूल बसों व वैन का निरीक्षण करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रधान सौरभ मेहता, उप प्रधान चिक्की मैहता, सचिव राके फुटेला मौजूद थे। ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन के उक्त पदाधिकारियों ने एडीसी सिरसा को बताया कि 15 फरवरी 2020 को पंजाब के संगरूर में एक दिन पहले 25 हजार रुपये स्कूल द्वारा कबाड़ में खरीदी वैन में आग लग गई थी, जिससे चार बच्चे जिंदा जल गए और आठ बच्चों को बड़ी मुश्किल से बचाया। सिरसा जिला में अनेक प्राइवेट स्कूल बिना परमिट के बसें चला रहे हैं और सरकार द्वारा निर्धारित पीले रंग की बजाए सफेद रंग, बिना हैवी लाइसेंस, बिना फास्ट एंड बॉक्स, बिना लेडी परिचालक के चलाया जा रहा है। फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं लिया जा रहा। उक्त पदाधिकारियों के अनुसार एडीसी सिरसा ने इस संबंध में उचित कार्रवाई का विश्वास दिलाया है।