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Sirsa News: प्रतिबंधित पशु मांस मामले में पुलिस की जांच नगर परिषद कार्यालय पहुंची, अधिकारियों से की पूछताछ
Sat, 15 Jun 2024 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 15 Jun 2024 12:36 AM IST
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सिरसा। डिंग थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित मांस से भरा ट्रक पकड़ने मामले में पुलिस की जांच अब नगर परिषद कार्यालय तक पहुंच गई है। पुलिस की टीम वीरवार को जांच करने के लिए नगर परिषद कार्यालय पहुंची और सफाई शाखा के अधिकारियों से मृत पशुओं के टेंडर संबंधी जानकारी हासिल की। इतना ही नहीं, मृत पशुओं का टेंडर किस एजेंसी को दिया गया है और टेंडर के नियमों संबंधी सत्यापित कॉपियां टीम अपने साथ लेकर गई।
इस मामले में अब तक कि पुलिस जांच में सामने में आया है कि नगर परिषद की मृत पशुओं का टेंडर उठाने वाली एजेंसी के कुछ लोग मिले हुए है। उन्होंने कोर्ट में दावा पेश किया है कि उन्हें नगर परिषद से मृत पशुओं को उठाने का टेंडर दिया गया है। वहीं नगर परिषद के अधिकारियों ने दावा किया कि टेंडर के अंतर्गत मृत पशुओं के निस्तारण किया जाना है। टेंडर में कहीं भी प्रतिबंधित पशु के मांस को बेचने संबंधी छूट नहीं दी गई है। वहीं दूसरी ओर नगर परिषद प्रशासन के अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भी मृत पशुओं के टेंडर को रद्द करने संबंधी कोई प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई है।
बता दें कि पुलिस अधिकारी के अनुसार टेंडर लेने वाली एजेंसी की ओर से कोर्ट में नगर परिषद को पार्टी बनाया है। जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनको नगर परिषद की ओर से मृत पशुओं का टेंडर दिया गया था। इसलिए उनके पास अधिकार है कि वह मृत पशुओं के मांस आगे बेच सकते हैं। यही कारण है कि नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों से मामले संबंधी जांच की जा रही है।
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नगर परिषद के टेंडर में नियम
- टेंडर के नियमानुसार मृत पशुओं को उठाने के लिए एजेंसी को टेंडर दिया गया है।
- वह मृत पशुओं का निस्तारण अपनी जमीन पर करेगा।
- टेंडर के नियमानुसार यदि एजेंसी से कोई विवाद होता है तो उसका निपटान वह अपने स्तर पर करेगी, नगर परिषद की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
यह नियम न होना बन रहा परेशानी
नगर परिषद के टेंडर के अंदर निस्तारण की प्रक्रिया को विस्तृत रूप से बताया नहीं गया है। उसमें निस्तारण के तहत मांस बेचने पाए जाने पर होने वाली कार्रवाई आदि के बारे में नहीं लिखा गया है। टेंडर में निस्तारण की प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी नहीं देने का लाभ उठाने की आरोपी कोशिश कर रहे है। मृत पशु उठान के नियमानुसार पशुओं की हड्डी और चर्बी को एजेंसी बेच सकती है। बाकी बचे हुए मृत पशु के शरीर का उसे अपने स्तर पर निपटान करना होगा।
यह था मामला
बता दें कि दो सप्ताह पहले जिला के डिंग थाना क्षेत्र में भावदीन टोल प्लाजा पर गोरक्षकों के साथ मिलकर डिंग पुलिस ने प्रतिबंधित पशु के मांस से भरे ट्रक को पकड़ा था। इस दौरान पुलिस ने चालक व परिचालक को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने जनता भवन सिरसा के फ्लैट नंबर 26 निवासी पंकज कुमार की शिकायत पर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में चालक हापुड़ निवासी जिशान, परिचालक की अजहर, सुनील पप्पू, मेरठ फलवदा निवासी हाजी सबलू, गाजियाबाद के केला भट्टा निवासी फारूक व तासिम के खिलाफ केस दर्ज किया था। चालक के अनुसार यह मांस गाजियाबाद के साहिबाबाद में बनी अर्शीया फैक्टरी में ले जाया जाना था।
नगर परिषद एजेंसी को टेंडर दिया गया है। पुलिस ने एजेंसी के सदस्य प्रतिबंधित पशु का मांस सप्लाई करते हुए पकड़े हैं। ऐसे में पुलिस अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है। मांस बेचने की अनुमति नगर परिषद ने नहीं दी है। यदि उच्चाधिकारी आदेश करेंगे तो एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया जाएगा। -जयवीर सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद
मृत पशु का मांस बेचने मामले में जांच की जा रही है। जांच के दौरान नगर परिषद के मृत पशु उठाने को लेकर दिए गए लाइसेंस संबंधी बात सामने आई है। इसलिए नगर परिषद के अधिकारियों से मृत पशु उठाने को लेकर एजेंसी को दिए गए टेंडर के दस्तावेज लिए गए हैं। प्रतिबंधित पशु के मांस मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
-अशोक कुमार, जांच अधिकारी, डिंग थाना प्रभारी
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इस मामले में अब तक कि पुलिस जांच में सामने में आया है कि नगर परिषद की मृत पशुओं का टेंडर उठाने वाली एजेंसी के कुछ लोग मिले हुए है। उन्होंने कोर्ट में दावा पेश किया है कि उन्हें नगर परिषद से मृत पशुओं को उठाने का टेंडर दिया गया है। वहीं नगर परिषद के अधिकारियों ने दावा किया कि टेंडर के अंतर्गत मृत पशुओं के निस्तारण किया जाना है। टेंडर में कहीं भी प्रतिबंधित पशु के मांस को बेचने संबंधी छूट नहीं दी गई है। वहीं दूसरी ओर नगर परिषद प्रशासन के अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भी मृत पशुओं के टेंडर को रद्द करने संबंधी कोई प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई है।
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बता दें कि पुलिस अधिकारी के अनुसार टेंडर लेने वाली एजेंसी की ओर से कोर्ट में नगर परिषद को पार्टी बनाया है। जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनको नगर परिषद की ओर से मृत पशुओं का टेंडर दिया गया था। इसलिए उनके पास अधिकार है कि वह मृत पशुओं के मांस आगे बेच सकते हैं। यही कारण है कि नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों से मामले संबंधी जांच की जा रही है।
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नगर परिषद के टेंडर में नियम
- टेंडर के नियमानुसार मृत पशुओं को उठाने के लिए एजेंसी को टेंडर दिया गया है।
- वह मृत पशुओं का निस्तारण अपनी जमीन पर करेगा।
- टेंडर के नियमानुसार यदि एजेंसी से कोई विवाद होता है तो उसका निपटान वह अपने स्तर पर करेगी, नगर परिषद की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
यह नियम न होना बन रहा परेशानी
नगर परिषद के टेंडर के अंदर निस्तारण की प्रक्रिया को विस्तृत रूप से बताया नहीं गया है। उसमें निस्तारण के तहत मांस बेचने पाए जाने पर होने वाली कार्रवाई आदि के बारे में नहीं लिखा गया है। टेंडर में निस्तारण की प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी नहीं देने का लाभ उठाने की आरोपी कोशिश कर रहे है। मृत पशु उठान के नियमानुसार पशुओं की हड्डी और चर्बी को एजेंसी बेच सकती है। बाकी बचे हुए मृत पशु के शरीर का उसे अपने स्तर पर निपटान करना होगा।
यह था मामला
बता दें कि दो सप्ताह पहले जिला के डिंग थाना क्षेत्र में भावदीन टोल प्लाजा पर गोरक्षकों के साथ मिलकर डिंग पुलिस ने प्रतिबंधित पशु के मांस से भरे ट्रक को पकड़ा था। इस दौरान पुलिस ने चालक व परिचालक को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने जनता भवन सिरसा के फ्लैट नंबर 26 निवासी पंकज कुमार की शिकायत पर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में चालक हापुड़ निवासी जिशान, परिचालक की अजहर, सुनील पप्पू, मेरठ फलवदा निवासी हाजी सबलू, गाजियाबाद के केला भट्टा निवासी फारूक व तासिम के खिलाफ केस दर्ज किया था। चालक के अनुसार यह मांस गाजियाबाद के साहिबाबाद में बनी अर्शीया फैक्टरी में ले जाया जाना था।
नगर परिषद एजेंसी को टेंडर दिया गया है। पुलिस ने एजेंसी के सदस्य प्रतिबंधित पशु का मांस सप्लाई करते हुए पकड़े हैं। ऐसे में पुलिस अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है। मांस बेचने की अनुमति नगर परिषद ने नहीं दी है। यदि उच्चाधिकारी आदेश करेंगे तो एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया जाएगा। -जयवीर सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद
मृत पशु का मांस बेचने मामले में जांच की जा रही है। जांच के दौरान नगर परिषद के मृत पशु उठाने को लेकर दिए गए लाइसेंस संबंधी बात सामने आई है। इसलिए नगर परिषद के अधिकारियों से मृत पशु उठाने को लेकर एजेंसी को दिए गए टेंडर के दस्तावेज लिए गए हैं। प्रतिबंधित पशु के मांस मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
-अशोक कुमार, जांच अधिकारी, डिंग थाना प्रभारी