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तबाही के मंजर को याद कर सिहर उठते हैं लोग
sirsa
Updated Sun, 15 Jun 2014 11:31 PM IST
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एक वर्ष पहले उत्तराखंड में हुई त्रासदी में फंसे लोग आज भी तबाही के उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। रातों को सपने में भी पहाड़ों की वो गूंज अब तक सुनाई पड़ रही है। पीड़ित परिवारों के लोग उत्तराखंड की यात्रा से तौबा कर रहे हैं। एक साल से हर दिन पूरा परिवार भगवान का शुक्राना कर रहा है कि उनके परिवार के सभी लोग सुरक्षित आ गए थे। एक-एक पल को याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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ऐसा ही अनुभव ले चुके प्रेम नगर निवासी सतपाल और भागीरथ का परिवार अब केदारनाथ यात्रा से तौबा करता दिख रहा है। गत वर्ष की दस जून को सतपाल, उनकी पत्नी कृष्णा, बेटा विकास, साली बिमला व सुशीला और उनके बच्चे रक्षित व मन्नु, साले का बेटा वरुण के अलावा सतपाल के पड़ोसी भागीरथ व उनकी पत्नी सरिता बड़े चाव से चार धाम यात्रा के लिए रवाना हुए थे। हरिद्वार, मसूरी, गंगोत्री व यमनोत्री की यात्रा करते हुए 15 जून को गोरीकुंड पहुंचे। सतपाल ने बताया कि 16 जून को सुबह विकास व सुशीला केदारनाथ धाम में माथा टेकने के लिए आगे निकल गए। कुछ ही देर में पहाड़ों में आवाज आने लगी। देखते ही देखते पानी का बहाव बहुत ज्यादा बढ़ने लगा। उन्होंने बताया कि पहाड़ों में गूंज के साथ कंपन हो रही थी।
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सभी लोग सहम उठे। दिन भर वहीं पर फंसे रहे। भागीरथ ने बताया कि पूरी रात बारिश होती रही वे सड़क पर ही खड़े रहे। अगले दिन 17 जून को सारा दिन इंतजार करते रहे पर जल प्रलय रुकने का नाम नहीं ले रही थी। 17 जून की रात को भी बारिश में बाहर ही रहे। पहाड़ पानी के साथ टूटकर बह रहे थे। रास्ते टूट चुके थे। आगे निकल चुके विकास और सुशीला की चिंता भी हो रही थी। मोबाइलों का नेटवर्क न रहने के कारण कहीं भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। फिर पहाड़ियों के ऊपर से होते हुए वापस आने के लिए पैदल चलने लगे। 20 जून को किसी तरह पहाड़ों से होते हुए वे गोरीकुंड के पास पहुंच गए और 21 जून को एक जीप मिली, जिस पर सवार होकर वे गोरीकुंड तक पहुंचे। उसके बाद बस में ऋषिकेश पहुंचे, जहां से 22 जून को देहरादून आए। अगले दिन घर पहुंचे तो सांस में सांस आई। विकास और सुशीला गोरीकुंड में ही मिले। वे दोनों केदारनाथ माथा टेक आए थे। हमने तो रास्ते में ही बाबा की फोटो के आगे माथा टेका और सुरक्षित घर पहुंचने की प्रार्थना की। पहाड़ों को पैदल पार करते समय सभी को चोटें आई थी।
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इस बार वैष्णो धाम की यात्रा करेंगे
सतपाल और भागीरथ ने बताया कि अब सारे परिवार वाले केदारनाथ यात्रा से तौबा कर रहे हैं। हां, बेटा विकास अब भी केदारनाथ जाने की इच्छा रखता है। सतपाल और भागीरथ दोनों ही कृषि विभाग में अधिकारी हैं और दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ मित्र भी हैं। कहीं भी जाना हो, साथ में कार्यक्रम बनाते हैं। इस बार केदारनाथ यात्रा में न जाकर दोनों परिवारों में वैष्णो देवी धाम की यात्रा की है। गत वर्ष जब वे उत्तराखंड से लौटे तो एक महीने तक सपनों में भी पहाड़ों की वो गूंज सुनाई पड़ती रही। अब टीवी में देखकर फिर वो यादें ताजी हो गई हैं। हम भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं कि सभी दस सदस्य सुरक्षित लौट आए। अब तो किसी भी पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा करने को मन नहीं करता।
फोटो विवरण: 15-एसआईआरपी-01-गत वर्ष उतराखंड यात्रा में फंसने के बाद सुरक्षित लौटा सिरसा का एक परिवार।