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आयुष विभाग की ओपीडी छह गुणा बढ़ी
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OPD of AYUSH department increased
- फोटो : Sirsa
आयुष विभाग में मरीजों की तादाद बढ़नी शुरू हो गई है। लॉकडाउन में विभाग की ओपीडी आधे से भी कम हो गई, लेकिन एक सितंबर से जनरल ओपीडी शुरू होते ही आयुष विभाग में आने वाले मरीजों की संख्या छह गुणा हो गई है। कोरोना संक्रमण के डर से रुके मरीज अब अस्पताल में आने लगे हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रतिमाह मरीजों की संख्या केवल 200 तक ही थी और वहीं अब ओपीडी शुरू होने के बाद एक माह में करीब 1200 मरीज आ रहे हैं।
आयुष विभाग में लॉकडाउन से पहले हर माह में 1500 से भी अधिक मरीज आते थे। लेकिन कोरोना संक्रमण के शुरूआत होते ही मरीजों का अस्पताल में आना बंद हो गया। सिविल अस्पताल में लॉकडाउन में भी आयुष विभाग की ओपीडी बंद नहीं हुई। लेकिन मरीजों की संख्या पर बहुत ज्यादा असर दिखाई दिया था। वहीं लॉकडाउन की शुरूआत में मरीजों की जांच होने लगी, जिस दौरान करीब 200 मरीज ही एक माह में दवाई लेने आने लगे। वहीं अनलॉक की शुरूआत होते ही मरीजों में कोरोना को लेकर थोड़ा भय कम हुआ और आयुष विभाग में इलाज करवाने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। अनलॉक के दौरान एक माह में मरीजों की संख्या 550 तक पहुंच गई। वहीं सिविल अस्पताल में एक सितंबर से जनरल ओपीडी शुरू होने के बाद अब वह मरीज अस्पताल में आ रहे हैं जो कोरोना संक्रमण या लॉकडाउन के कारण घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। आयुष विभाग में दवाई लेने वालों की संख्या एक सितंबर से अब तक करीब 1200 हो गई है।
ज्यादातर मरीजों को है चमड़ी रोग की समस्या
आयुष विभाग में दवाई लेने आने वाले मरीजों में अधिकतर वह मरीज हैं, जिन्हें चमड़ी की समस्या है। जिन्हें आयुष विभाग के चिकित्सक एक सप्ताह की दवाई देते हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण वह मरीज दवाई लेने नहीं आए। अब अस्पताल में जनरल ओपीडी की शुरूआत होते ही वे मरीज दोबारा आने शुरू हो गए हैं। अपनी दवाई लेने आए मरीज विक्रम ने बताया कि वह कोरोना के कारण अस्पताल में नहीं आया था, लेकिन अब लोगों की आवाजाही आम हो गई है, जिस कारण वह अपनी दवाई लेने आ गया है। वहीं वह दवाइयां उन्हें अब दोबारा से शुरू करनी पड़ेगी।
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कोट
लॉकडाउन के दौरान ओपीडी बहुत कम हो गई थी। उस दौरान पूरे दिन में केवल पांच से छह मरीज आते थे, लेकिन अब 40 से 45 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
-डॉ. जयपाल, चिकित्सक, आयुष विभाग सिरसा।
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आयुष विभाग में लॉकडाउन से पहले हर माह में 1500 से भी अधिक मरीज आते थे। लेकिन कोरोना संक्रमण के शुरूआत होते ही मरीजों का अस्पताल में आना बंद हो गया। सिविल अस्पताल में लॉकडाउन में भी आयुष विभाग की ओपीडी बंद नहीं हुई। लेकिन मरीजों की संख्या पर बहुत ज्यादा असर दिखाई दिया था। वहीं लॉकडाउन की शुरूआत में मरीजों की जांच होने लगी, जिस दौरान करीब 200 मरीज ही एक माह में दवाई लेने आने लगे। वहीं अनलॉक की शुरूआत होते ही मरीजों में कोरोना को लेकर थोड़ा भय कम हुआ और आयुष विभाग में इलाज करवाने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। अनलॉक के दौरान एक माह में मरीजों की संख्या 550 तक पहुंच गई। वहीं सिविल अस्पताल में एक सितंबर से जनरल ओपीडी शुरू होने के बाद अब वह मरीज अस्पताल में आ रहे हैं जो कोरोना संक्रमण या लॉकडाउन के कारण घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। आयुष विभाग में दवाई लेने वालों की संख्या एक सितंबर से अब तक करीब 1200 हो गई है।
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ज्यादातर मरीजों को है चमड़ी रोग की समस्या
आयुष विभाग में दवाई लेने आने वाले मरीजों में अधिकतर वह मरीज हैं, जिन्हें चमड़ी की समस्या है। जिन्हें आयुष विभाग के चिकित्सक एक सप्ताह की दवाई देते हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण वह मरीज दवाई लेने नहीं आए। अब अस्पताल में जनरल ओपीडी की शुरूआत होते ही वे मरीज दोबारा आने शुरू हो गए हैं। अपनी दवाई लेने आए मरीज विक्रम ने बताया कि वह कोरोना के कारण अस्पताल में नहीं आया था, लेकिन अब लोगों की आवाजाही आम हो गई है, जिस कारण वह अपनी दवाई लेने आ गया है। वहीं वह दवाइयां उन्हें अब दोबारा से शुरू करनी पड़ेगी।
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लॉकडाउन के दौरान ओपीडी बहुत कम हो गई थी। उस दौरान पूरे दिन में केवल पांच से छह मरीज आते थे, लेकिन अब 40 से 45 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं।
-डॉ. जयपाल, चिकित्सक, आयुष विभाग सिरसा।