{"_id":"620e88116d0b760f3f67e593","slug":"only-first-aid-is-available-in-the-emergency-ward-agroha-and-rohtak-are-referred-for-treatment-sirsa-news-hsr6245736120","type":"story","status":"publish","title_hn":"इमरजेंसी वार्ड में मिलता है केवल प्राथमिक उपचार, इलाज के लिए अग्रोहा और रोहतक रेफर होते हैं मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इमरजेंसी वार्ड में मिलता है केवल प्राथमिक उपचार, इलाज के लिए अग्रोहा और रोहतक रेफर होते हैं मरीज
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में बना आईसीयू वार्ड।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। हादसे में घायल होकर नागरिक अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए इमरजेंसी वार्ड बनाया गया है। यहां पर गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। लेकिन नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों की ओर से केवल प्राथमिक उपचार कर उन्हें अग्रोहा और रोहतक में रेफर कर दिया जाता है। स्थिति यह है कि हर माह 100 से अधिक मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंचते है लेकिन इनमें से इक्का दुक्का मरीज को ही सिरसा में इलाज दिया जाता है जबकि अन्य मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
नागरिक अस्पताल में बने इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। लेकिन अगर कोई सड़क हादसे के मरीज वार्ड में पहुंचते है तो डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। इलाज देने की बजाय डॉक्टरों की ओर से फाइल तैयार करवा उन्हें अग्रोहा और रोहतक में रेफर कर दिया जाता है। रेफर किए जाने वाले मरीजों में कई ऐसे भी शामिल होते हैं जिन्हें मामूली चोटें आती है। जिसके कारण उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इमरजेंसी वार्ड में ही बना है आईसीयू वार्ड, लेकिन नहीं सुविधा
गंभीर मरीजों को सुविधा देने के लिए करीब दो करोड़ की लागत से इमरजेंसी वार्ड में ही 10 बेड का आईसीयू वार्ड बनाया गया है लेकिन यह मरीजों के किसी काम नहीं आ रहा। आईसीयू वार्ड में मरीजों को दाखिल कर उपचार करने के लिए पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी तक नहीं है। जबकि इनमें से कई मशीनें भी खराब पड़ी हैं। जिसके कारण मरीजों को इसकी कोई भी सुविधा नहीं मिल पा रही। वार्ड में प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
इमरजेंसी वार्ड में दो मरीजों का इलाज करने की सुविधा
इमरजेंसी वार्ड के एक कमरे में ही सभी उपकरण रखे गए हैं। जिसमें केवल दो बेड ही स्थायी रूप से हैं। अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो दो से अधिक मरीजों को दाखिल करने व उपचार करने के लिए स्ट्रेचरों पर ही मरीजों को लेटाया जाता है। जबकि इन स्ट्रेचरों पर कई मशीनें काम तक नहीं कर पाती। वहीं बीते दिन यानी बुधवार को सड़क हादसे में कार सवार चार लोग घायल हुए थे। इन सभी मरीजों को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। लेकिन बेडों की कमी होने के कारण दो मरीजों को स्ट्रेचर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। जिसके बाद मामूली चोटें आने वाले दो लोगों को भी गंभीर मरीजों के साथ सिरसा से अग्रोहा रेफर कर दिया गया।
इलाज न देकर निजी अस्पतालों को पहुंचाया जाता है लाभ
नागरिक अस्पताल में बने इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को इलाज न देकर डॉक्टरों की ओर से निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाया जाता है। वार्ड में पहुंचने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिसके बाद उनके परिजन मरीज को सिरसा के ही निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचते है। जिसके कारण सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाती और उनको निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ता है। जिससे निजी अस्पतालों को सीधा इसका लाभ पहुंचाया जाता है। डॉक्टरों की सांठ गांठ के कारण मरीजों को छोटे से इलाज में भारी खर्च उठाना पड़ता है।
अधिक गंभीर मरीजों को ही अग्रोहा और रोहतक में रेफर किया जाता है। सर्जन की सुविधा न होने के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है। अगर सामान्य मरीजों को भी रेफर करने का कोई मामला आता है जांच की जाएगी।
-डॉ. बुुधराम, उप सिविल सर्जन, सिरसा।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में बने इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। लेकिन अगर कोई सड़क हादसे के मरीज वार्ड में पहुंचते है तो डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। इलाज देने की बजाय डॉक्टरों की ओर से फाइल तैयार करवा उन्हें अग्रोहा और रोहतक में रेफर कर दिया जाता है। रेफर किए जाने वाले मरीजों में कई ऐसे भी शामिल होते हैं जिन्हें मामूली चोटें आती है। जिसके कारण उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
इमरजेंसी वार्ड में ही बना है आईसीयू वार्ड, लेकिन नहीं सुविधा
गंभीर मरीजों को सुविधा देने के लिए करीब दो करोड़ की लागत से इमरजेंसी वार्ड में ही 10 बेड का आईसीयू वार्ड बनाया गया है लेकिन यह मरीजों के किसी काम नहीं आ रहा। आईसीयू वार्ड में मरीजों को दाखिल कर उपचार करने के लिए पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी तक नहीं है। जबकि इनमें से कई मशीनें भी खराब पड़ी हैं। जिसके कारण मरीजों को इसकी कोई भी सुविधा नहीं मिल पा रही। वार्ड में प्रशिक्षित स्टाफ न होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
इमरजेंसी वार्ड में दो मरीजों का इलाज करने की सुविधा
इमरजेंसी वार्ड के एक कमरे में ही सभी उपकरण रखे गए हैं। जिसमें केवल दो बेड ही स्थायी रूप से हैं। अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो दो से अधिक मरीजों को दाखिल करने व उपचार करने के लिए स्ट्रेचरों पर ही मरीजों को लेटाया जाता है। जबकि इन स्ट्रेचरों पर कई मशीनें काम तक नहीं कर पाती। वहीं बीते दिन यानी बुधवार को सड़क हादसे में कार सवार चार लोग घायल हुए थे। इन सभी मरीजों को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। लेकिन बेडों की कमी होने के कारण दो मरीजों को स्ट्रेचर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। जिसके बाद मामूली चोटें आने वाले दो लोगों को भी गंभीर मरीजों के साथ सिरसा से अग्रोहा रेफर कर दिया गया।
इलाज न देकर निजी अस्पतालों को पहुंचाया जाता है लाभ
नागरिक अस्पताल में बने इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को इलाज न देकर डॉक्टरों की ओर से निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाया जाता है। वार्ड में पहुंचने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिसके बाद उनके परिजन मरीज को सिरसा के ही निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचते है। जिसके कारण सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाती और उनको निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ता है। जिससे निजी अस्पतालों को सीधा इसका लाभ पहुंचाया जाता है। डॉक्टरों की सांठ गांठ के कारण मरीजों को छोटे से इलाज में भारी खर्च उठाना पड़ता है।
अधिक गंभीर मरीजों को ही अग्रोहा और रोहतक में रेफर किया जाता है। सर्जन की सुविधा न होने के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है। अगर सामान्य मरीजों को भी रेफर करने का कोई मामला आता है जांच की जाएगी।
-डॉ. बुुधराम, उप सिविल सर्जन, सिरसा।