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ऑनलाइन पढ़ाई : लिखने की छूटी आदत, लिखावट भी गई बिगड़, प्रार्थना पत्र लिखना भूले विद्यार्थी
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राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में विद्यार्थियों से बातचीत करते प्राचार्य मदन मलिक। संवाद
- फोटो : Sirsa
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अनुपमा जाखड़
सिरसा। कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद होने से ऑनलाइन शिक्षण जहां वरदान बना, वहीं इसने विद्यार्थियों के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब तक विद्यार्थी आंखों व सिर में दर्द, देखने की क्षमता कम होने जैसी शारीरिक परेशानियां झेल रहे थे। अब ऑनलाइन शिक्षण में कंप्यूटर और स्मार्ट फोन से पढ़ाई का असर लिखने की आदत और लिखावट पर भी पड़ने लगा है। बोर्ड की कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की 70 फीसदी लिखावट इस समय बेहद खराब है। वहीं 10वीं व 12वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थी प्राचार्य को प्रार्थना पत्र तक लिखने में सक्षम नहीं हैं।
एक फरवरी को 10वीं व 12वीं की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विद्यालयों को खोला गया है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन ने यह भांपा कि विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हो चुके हैं। दो माह बाद विद्यार्थियों की बोर्ड की परीक्षाएं हैं। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के प्राचार्य मदन मलिक बताते हैं कि उनके पास बोर्ड कक्षाएं के विद्यार्थी के प्रार्थना पत्र आते हैं। जब वे उन्हें पढ़ते हैं, ये सोचकर हैरान होते हैं कि विद्यार्थी प्रार्थना पत्र तक नहीं लिख पा रहा हैं। व्याकरण की अनेक गलतियां होती हैं। इसके आधार में कहा जा सकता है कि इस समय विद्यार्थियों की व्याकरण शुन्य हो चुकी है। वहीं लगभग हर स्कूल में 70 फीसदी विद्यार्थियों की लिखावट व व्याकरण खराब हो चुकी हैं। संवाद
अतिरिक्त कक्षाओं की तैयारी
ऑनलाइन पढ़ाई होने के कारण विद्यार्थी इस समय पढ़ना-लिखना भूल चुके हैं। इसकी वजह से उनकी लिखनी की क्षमता समाप्त हो चुकी है। ऐेसे में अध्यापकों के लिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के स्तर में सुधार करना बड़ी चुनौती बन चुका है। विद्यालयों द्वारा रेमेडियल (अतिरिक्त) कक्षाएं लगाने की तैयारी की जा रही है। इन कक्षाओं में जो विद्यार्थी अधिक कमजोर है। उन्हें अलग से कक्षाएं दी जाएगी।
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विद्यार्थियों में ये आम कमियां देखने को मिलीं
- बच्चों में लिखने और पढ़ने की रफ्तार काफी कम हुई।
- लिखावट काफी खराब हुई, निपटाऊ काम कर रहे हैं।
- याद करने और रखने की भी क्षमता घट गई है।
- प्रतिस्पर्धा की भावना कम हो रही। फिजिकल क्लास में जवाब देने में एक-दूसरे से आगे रहते थे
- पढ़ने की आदत कम होने से नए शब्दों का ज्ञान हुआ कम।
- कुछ समझ नहीं आए तो पूछने की आदत भी घटी, शिक्षक के पूछने पर जवाब नहीं दे पाते।
- स्किल्स बढ़ाने के लिए दिए जाने वाले अतिरिक्त काम को गंभीरता से नहीं ले रहे।
ऑनलाइन कक्षाओं की वजह से विद्यार्थियों का बहुत नुकसान हुआ है। वर्तमान समय में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी प्रार्थना पत्र तक लिखने में असक्षम है। लिखावट तो बहुत खराब हो चुकी है। विद्यार्थियों में सुधार के लिए जल्द से अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएं। - मदन मलिक, प्राचार्य राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल
इस वर्ष 11वीं कक्षा में प्रमोट हुए विद्यार्थी आए हैं। जिन्हें कुछ भी लिखना तक नहीं आ रहा है। पहले किसी भी कक्षा में एक या दो विद्यार्थी ही ऐसे होते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पूरी कक्षा ही इस श्रेणी में आ गई है। सभी अध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि जितना हो सके, विद्यार्थियों से लिखने का काम करवाया जाए। - जसबीर कौर, प्राचार्य, राजकीय कन्या विद्यालय।
ऑनलाइन पढ़ाई से विद्यार्थियों का नुकसान हुआ है। इसके कारण विद्यार्थियों की लिखावट खराब हुई है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान विद्यार्थी हाथों से नोट्स नहीं बना पाए, जिसके कारण अब उन्हें लिखने में दिक्कत आ रही है। अध्यापकों को विद्यार्थियों पर ज्यादा ध्यान देने का कहा गया है। अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर भी विद्यार्थियों पर मेहनत की जाएगी। - राजीव उतरेजा, प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल
पहले के समय में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए अध्यापकों को मेहनत करनी पड़ रही है। हालांकि कुछ विद्यार्थी हैं ऐसे जिन्होंने अपने आप पर मेहनत की है और वे आज अच्छा रिजल्ट भी दे रहे हैं, लेकिन ज्यादा विद्यार्थी ऐसे हैं, जो सब भूल चुके हैं। - डॉ. साक्षी, सुपरवाइजर, डीएवी स्कूल
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सिरसा। कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद होने से ऑनलाइन शिक्षण जहां वरदान बना, वहीं इसने विद्यार्थियों के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब तक विद्यार्थी आंखों व सिर में दर्द, देखने की क्षमता कम होने जैसी शारीरिक परेशानियां झेल रहे थे। अब ऑनलाइन शिक्षण में कंप्यूटर और स्मार्ट फोन से पढ़ाई का असर लिखने की आदत और लिखावट पर भी पड़ने लगा है। बोर्ड की कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की 70 फीसदी लिखावट इस समय बेहद खराब है। वहीं 10वीं व 12वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थी प्राचार्य को प्रार्थना पत्र तक लिखने में सक्षम नहीं हैं।
एक फरवरी को 10वीं व 12वीं की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विद्यालयों को खोला गया है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन ने यह भांपा कि विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हो चुके हैं। दो माह बाद विद्यार्थियों की बोर्ड की परीक्षाएं हैं। राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल के प्राचार्य मदन मलिक बताते हैं कि उनके पास बोर्ड कक्षाएं के विद्यार्थी के प्रार्थना पत्र आते हैं। जब वे उन्हें पढ़ते हैं, ये सोचकर हैरान होते हैं कि विद्यार्थी प्रार्थना पत्र तक नहीं लिख पा रहा हैं। व्याकरण की अनेक गलतियां होती हैं। इसके आधार में कहा जा सकता है कि इस समय विद्यार्थियों की व्याकरण शुन्य हो चुकी है। वहीं लगभग हर स्कूल में 70 फीसदी विद्यार्थियों की लिखावट व व्याकरण खराब हो चुकी हैं। संवाद
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अतिरिक्त कक्षाओं की तैयारी
ऑनलाइन पढ़ाई होने के कारण विद्यार्थी इस समय पढ़ना-लिखना भूल चुके हैं। इसकी वजह से उनकी लिखनी की क्षमता समाप्त हो चुकी है। ऐेसे में अध्यापकों के लिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के स्तर में सुधार करना बड़ी चुनौती बन चुका है। विद्यालयों द्वारा रेमेडियल (अतिरिक्त) कक्षाएं लगाने की तैयारी की जा रही है। इन कक्षाओं में जो विद्यार्थी अधिक कमजोर है। उन्हें अलग से कक्षाएं दी जाएगी।
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विद्यार्थियों में ये आम कमियां देखने को मिलीं
- बच्चों में लिखने और पढ़ने की रफ्तार काफी कम हुई।
- लिखावट काफी खराब हुई, निपटाऊ काम कर रहे हैं।
- याद करने और रखने की भी क्षमता घट गई है।
- प्रतिस्पर्धा की भावना कम हो रही। फिजिकल क्लास में जवाब देने में एक-दूसरे से आगे रहते थे
- पढ़ने की आदत कम होने से नए शब्दों का ज्ञान हुआ कम।
- कुछ समझ नहीं आए तो पूछने की आदत भी घटी, शिक्षक के पूछने पर जवाब नहीं दे पाते।
- स्किल्स बढ़ाने के लिए दिए जाने वाले अतिरिक्त काम को गंभीरता से नहीं ले रहे।
ऑनलाइन कक्षाओं की वजह से विद्यार्थियों का बहुत नुकसान हुआ है। वर्तमान समय में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी प्रार्थना पत्र तक लिखने में असक्षम है। लिखावट तो बहुत खराब हो चुकी है। विद्यार्थियों में सुधार के लिए जल्द से अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएं। - मदन मलिक, प्राचार्य राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल
इस वर्ष 11वीं कक्षा में प्रमोट हुए विद्यार्थी आए हैं। जिन्हें कुछ भी लिखना तक नहीं आ रहा है। पहले किसी भी कक्षा में एक या दो विद्यार्थी ही ऐसे होते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पूरी कक्षा ही इस श्रेणी में आ गई है। सभी अध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि जितना हो सके, विद्यार्थियों से लिखने का काम करवाया जाए। - जसबीर कौर, प्राचार्य, राजकीय कन्या विद्यालय।
ऑनलाइन पढ़ाई से विद्यार्थियों का नुकसान हुआ है। इसके कारण विद्यार्थियों की लिखावट खराब हुई है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान विद्यार्थी हाथों से नोट्स नहीं बना पाए, जिसके कारण अब उन्हें लिखने में दिक्कत आ रही है। अध्यापकों को विद्यार्थियों पर ज्यादा ध्यान देने का कहा गया है। अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर भी विद्यार्थियों पर मेहनत की जाएगी। - राजीव उतरेजा, प्राचार्य, डीएवी पब्लिक स्कूल
पहले के समय में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए अध्यापकों को मेहनत करनी पड़ रही है। हालांकि कुछ विद्यार्थी हैं ऐसे जिन्होंने अपने आप पर मेहनत की है और वे आज अच्छा रिजल्ट भी दे रहे हैं, लेकिन ज्यादा विद्यार्थी ऐसे हैं, जो सब भूल चुके हैं। - डॉ. साक्षी, सुपरवाइजर, डीएवी स्कूल