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ऑनलाइन शिक्षा का फायदे से ज्यादा हुआ नुकसान, पुस्तकों की जगह बच्चों को पड़ी अश्लील वीडियो की आदत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 11:36 PM IST
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Online education did more harm than good, children got used to porn videos instead of books
सिरसा। पिछले तीन महीनों से विद्यार्थियों की ऑफलाइन कक्षाएं स्कूलों द्वारा लगाई जा रही है। लेकिन अभी भी विद्यार्थी दो साल के दौरान ऑनलाइन मोड से निकल नहीं पा रहे है। कोरोना महामारी के दौरान विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाएं लगाई गई। जिसके दौरान अभिभावकों ने बच्चों के हाथ में 24 घंटों के लिए मोबाइल फोन हाथ में थमा दिए। जिसका खामियाजा अब सबको भुगतना पड़ रहा है।
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दो साल के बाद वर्चुअल से वास्तविक दौर में पढ़ाई के लिए लौटे विद्यार्थियों को शारीरिक बीमारियों के साथ-साथ मानसिक, एंग्जाइटी जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर अभिभावक बच्चों को लगने वाली गंदी आदतों से भी परेशान है।
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केस नंबर- 1
एक महिला ने बताया कि उसका बेटा 8 है और दूसरा 12 साल का है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चा कमरे में बंद रहकर फोन का इस्तेमाल अधिक करने लगा। ऑनलाइन पढ़ाई से पहले वह सबके साथ घुलता-मिलता था। घर में कोई रिश्तेदार आता तो उनसे मिलने के लिए बाहर आता था। लेकिन अब वह कमरे से बाहर तक निकलना पसंद नहीं करता है। बीते 2 सालों में वह अकेला रहना पसंद करने लगा है। उसे अकेले रहने की आदत पड़ चुकी है।
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केस नंबर-2
शहर में रहने वाले एक दंपति ने बताया कि उनका लड़का 11वीं कक्षा में पढ़ता है और 16 वर्ष का है। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उन्होंने उसे अलग से स्मार्ट फोन लेकर दे दिया। जिसके बाद बेटा पूरा-पूरा दिन फोन पर लगा रहता। जब उन्होंने जांच की तो उन्हें पता चला कि उनका लड़का पढ़ाई के साथ-साथ अश्लील कंटेट देखने लग गया है। जिससे अभिभावक बच्चे को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
मनोविशेषज्ञ के पास बढ़े 80 फीसदी मामले
कोरोना महामारी से पहले मनोविशेषज्ञों के पास जहां 15 से 20 मामले आते थे। वहीं इनकी संख्या बढ़कर 70 से 80 हो गई है। कोरोना महामारी के बाद उनके पास करीब महीने के 80 मामले काउंसिलिंग के लिए आते है। पहले इन मामलों में शहरी बच्चों की संख्या ज्यादा होती थी। लेकिन अब शहर के बच्चों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थी भी मानसिक तनाव का शिकार हुए हैं।

वर्जन
ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों की सामाजिक दूरी बढ़ गई है। बच्चे मोबाइल के आदि हो गए है। स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक तनाव भी बढ़ गया है। जब कोरोना महामारी की शुरूआत हुई थी तो उस समय एक समस्या ये थी कि बच्चे अकेले कमरे में रहने से घुटन महसूस कर रहे है। लेकिन अब इसके बिल्कुल विपरीत हो गया है। वर्तमान में बच्चे अकेला रहना पसंद कर रहे है। वो भी अपने फोन के साथ। शिक्षा के ज्यादा बच्चों में अनैतिक कंटेंट देखने की इच्छा में इजाफा हुआ है। जिसके प्रतिदिन मामले आ रहे हैं।
-रविंद्र पूरी, मनोविशेषज्ञ, सिरसा।
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