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Sirsa News: गुजरात और महाराष्ट्र में आधुनिक यंत्र प्रणाली का हो रहा परीक्षण

Sun, 07 Jul 2024 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 07 Jul 2024 11:40 PM IST
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Modern equipment system is being tested in Gujarat and Maharashtra
खेत में खड़ी फसल में जमा पानी।
सिरसा। गुलाबी सुंडी का डर किसानों के जहन में अभी तक है। इसी का परिणाम है कि जिले में धान का रकबा इस बार बढ़ने जा रहा है। इधर कृषि विभाग के अधिकारी अभी से गुलाबी सुंडी को लेकर उच्च चेतावनी स्तर पर है। पिछले दिनों गांव ढूकड़ा के खेतों में कृषि विभाग की टीमों ने निरीक्षण किया था। इस दौरान गुलाबी सुंडी के लक्षण देखने को नहीं मिले। बावजूद इसके कृषि विभाग लोगों को खेतों में फेरोमोन ट्रैप लगाने को लेकर प्रेरित कर रहा है।
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हालांकि पिछली बार किसानों ने इस ट्रैप को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। जिसके परिणाम फसलों में गुलाबी सुंडी बड़े स्तर पर देखने को मिली। कृषि अधिकारियों के अनुसार फेरोमोन ट्रैप को अपग्रेड किया जा रहा है। जिसको लेकर गुजरात और महाराष्ट्र में ट्रायल चल रहे हैं। जहां अभी तक सिर्फ ट्रैप में सात से आठ दिनों के आकलन के आधार पर गुलाबी सुंडी का पता चलता था। नई तकनीक के आधार पर गुलाबी सुंडी के कीट जैसे ही ट्रैप में आएगा। उससे मैसेज कृषि अधिकारी और खेत मालिक दोनों के मोबाइल पर पहुंच जाएगा। ताकि दोनों सचेत हो जाएं और दवा का छिड़काव समय रहते हुए कर सके। इससे फसल को खराब होने से बड़े स्तर पर रोका जा सकता है। एक जिले में ट्रायल की लागत 6 लाख रुपये के आसपास आंकी गई है।
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इस प्रकार होता है फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग
कपास के खेतों में फूल लगने से पहले ही फेरोमोन ट्रैप जगह-जगह लगाए जाते हैं। एक एकड़ में कम से कम 3 से 4 ट्रैप लगाए जाएंगे। जिससे गुलाबी सुंडी के पैदा होते ही खत्म की जा सकेगी। गुलाबी सुंडी एक तरह का कीट है। जिसका वैज्ञानिक नाम पैक्टीनीफोरा गोंसीपीला है। ये अपने जीवनकाल के दौरान अलग-अलग चार अवस्थाओं से गुजरता है। सामान्यत: फसल में कलियां व फूल आने के बाद ही इस कीट का उपद्रव शुरू होता है। कई बार कीटग्रस्त फूलों की पंखुड़ियां आपस में मिल जाती हैं। दूर से देखने पर गुलाब के सामान दिखाई देती हैं। अंडे में निकली छोटी-छोटी सुंडियां फूल व छोटे बोल्स में सूक्ष्म छिद्र बनाकर उनके अंदर प्रवेश कर जाती है। इससे फूल व बोल्स गिर जाते हैं। जिससे फसल को काफी नुकसान होता है।
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गुलाबी सुंडी का डर बढ़ा रहा धान का रकबा
बता दें कि गुलाबी सुंडी के कारण किसानों ने इस बार धान को प्रमुखता दी है। नरमे की फसल से किसानों ने मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। ग्वार और धान ने नरमे के रकबे की जगह ले ली है। हालांकि गुलाबी सुंडी को लेकर सरकार पहले से ज्यादा गंभीर है। पिछले वर्ष फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग करने के लिए किसानों से कृषि विभाग और एचएयू के वैज्ञानिकों ने अपील की थी, लेकिन ग्रामीणों ने कोई विशेष रूचि नहीं दिखाई। जबकि एक फेरोमोन ट्रैप की कीमत महज 75 रुपये है।




गुलाबी सुंडी को लेकर फेरोमोन ट्रैप तकनीक कारगर है। इन तकनीक को ओर अपग्रेड किया जा रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र में ट्रायल लिए जा रहे हैं। नई तकनीक से ट्रैप में सुंडी के कीट आने के साथ ही मोबाइल मैसेज किसान व अधिकारी को मिल जाएगा। जिससे सुंडी को कंट्रोल किया जा सकेगा।
-डॉ. सुखदेव कंबोज, उप निदेशक कृषि विभाग
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