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Sirsa News: तय मजदूरी से कम भुगतान पर भड़के मंडी मजदूर
Sun, 11 Oct 2026 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:23 AM IST
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कालांवाली। अतिरिक्त अनाज मंडी में धान की सफाई, तुलाई और भराई का काम शैलर संचालकों की अपनी लेबर से करवाने व निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान करने के आरोप लगाते हुए शनिवार को अनाज मंडी मजदूर यूनियन के सदस्यों ने रोष जताया।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के कारण मंडी की पारंपरिक लेबर को काम नहीं मिल रहा और उनका रोजगार लगातार प्रभावित हो रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे हड़ताल करेंगे।
यूनियन प्रधान प्रदीप खन्ना ने आरोप लगाया कि पिछले चार-पांच वर्षों से मंडी में आने वाले धान को सीधे अतिरिक्त अनाज मंडी में उतार दिया जाता है। वहां धान की न तो नियमानुसार सफाई की जाती है और न ही उसकी पूरी तुलाई होती है। उन्होंने दावा किया कि सफाई के नाम पर केवल दिखावे के लिए पंखे लगाए गए हैं और धान को पर्याप्त रूप से साफ किए बिना ही बोरियों में भर दिया जाता है। खन्ना ने इस व्यवस्था में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया।
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उन्होंने कहा कि धान की बोरियों में भराई का काम शैलर संचालक अपनी लेबर से करवा रहे हैं, जबकि मंडी में वर्षों से काम करने वाले मजदूर खाली बैठे हैं। धान का सीजन साल में केवल दो-तीन महीने रहता है और यही समय मजदूरों की कमाई का मुख्य जरिया है। इस दौरान भी काम नहीं मिलने से उनके सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
सरकारी दर और भुगतान में अंतर का आरोप : खन्ना के अनुसार सरकार ने धान के एक बैग की मजदूरी 12 से 13 रुपये निर्धारित की है, लेकिन शैलर संचालक मजदूरों को करीब चार रुपये प्रति बैग के हिसाब से भुगतान कर रहे हैं।
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मजदूरों ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के कारण मंडी की पारंपरिक लेबर को काम नहीं मिल रहा और उनका रोजगार लगातार प्रभावित हो रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे हड़ताल करेंगे।
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यूनियन प्रधान प्रदीप खन्ना ने आरोप लगाया कि पिछले चार-पांच वर्षों से मंडी में आने वाले धान को सीधे अतिरिक्त अनाज मंडी में उतार दिया जाता है। वहां धान की न तो नियमानुसार सफाई की जाती है और न ही उसकी पूरी तुलाई होती है। उन्होंने दावा किया कि सफाई के नाम पर केवल दिखावे के लिए पंखे लगाए गए हैं और धान को पर्याप्त रूप से साफ किए बिना ही बोरियों में भर दिया जाता है। खन्ना ने इस व्यवस्था में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया।
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उन्होंने कहा कि धान की बोरियों में भराई का काम शैलर संचालक अपनी लेबर से करवा रहे हैं, जबकि मंडी में वर्षों से काम करने वाले मजदूर खाली बैठे हैं। धान का सीजन साल में केवल दो-तीन महीने रहता है और यही समय मजदूरों की कमाई का मुख्य जरिया है। इस दौरान भी काम नहीं मिलने से उनके सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
सरकारी दर और भुगतान में अंतर का आरोप : खन्ना के अनुसार सरकार ने धान के एक बैग की मजदूरी 12 से 13 रुपये निर्धारित की है, लेकिन शैलर संचालक मजदूरों को करीब चार रुपये प्रति बैग के हिसाब से भुगतान कर रहे हैं।