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Sirsa News: इंसान ने काम-धंधे के लिए तो समय निर्धारित कर रखा है पर राम नाम जपने के लिए नहीं
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कथा में प्रवचन करते स्वामी राजेन्द्रानंद
बडागुढ़ा। गांव छतरियां स्थित श्री कृष्ण प्रणामी गोशाला में आयोजित श्री धेनुमानस गो कथा के 5वें दिन कथावाचक स्वामी राजेंदानंद ने राम नाम की भक्ति एवं गोसेवा का संदेश दिया।इस अवसर पर कथावाचक ने कहा कि इंसान ने अपनी दिनचर्या के काम-धंधे करने के लिए समय निर्धारित कर रखा है, लेकिन राम नाम के लिए न ही तो उसके पास समय होता है और न ही उसका मन।
यही कारण है कि आज इंसान के जीवन में दुख तकलीफें, रोग-द्वेष व अशांति घर कर चुकी है। इन सब का एक ही इलाज है राम की भक्ति एवं गऊ माता की सेवा। वे लोग भाग्यशाली हैं जो घर गृहस्थी में रहकर भक्ति एवं गोसेवा के लिए समय निकालते हैं। उन्होंने कहा कि इस संसार में जितने भी संत एवं पीर-पैगंबर हुए, सभी ने गोसेवा को अति उत्तम सेवा बताया।
कथावाचक ने सुनाया कि जीवन में कितने ही यज्ञ व दान-पुण्य कर लें, अगर गऊ माता को दुत्कार दिया तो सभी व्यर्थ जाएंगे। संसार में कुछ तो सेवा का अवसर तलाशते हैं और कुछ लोग अवसर होते हुए भी सेवा नहीं करते। कथावाचक ने कहा कि ये इंसान की फितरत है कि वह दूसरे को गरीब व निम्न समझता है, लेकिन भगवान ने न ही तो किसी को नीचा बनाया और न ऊंचा।
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कथावाचक ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपने मन में निर्धन की तरह भाव उत्पन्न कीजिए, फिर देखिए भगवान दौड़े न चले आएं तो। कथा के दौरान गाए गए सुंदर भजनों ने पूरे पंडाल को भक्तिमय बना दिया।
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यही कारण है कि आज इंसान के जीवन में दुख तकलीफें, रोग-द्वेष व अशांति घर कर चुकी है। इन सब का एक ही इलाज है राम की भक्ति एवं गऊ माता की सेवा। वे लोग भाग्यशाली हैं जो घर गृहस्थी में रहकर भक्ति एवं गोसेवा के लिए समय निकालते हैं। उन्होंने कहा कि इस संसार में जितने भी संत एवं पीर-पैगंबर हुए, सभी ने गोसेवा को अति उत्तम सेवा बताया।
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कथावाचक ने सुनाया कि जीवन में कितने ही यज्ञ व दान-पुण्य कर लें, अगर गऊ माता को दुत्कार दिया तो सभी व्यर्थ जाएंगे। संसार में कुछ तो सेवा का अवसर तलाशते हैं और कुछ लोग अवसर होते हुए भी सेवा नहीं करते। कथावाचक ने कहा कि ये इंसान की फितरत है कि वह दूसरे को गरीब व निम्न समझता है, लेकिन भगवान ने न ही तो किसी को नीचा बनाया और न ऊंचा।
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कथावाचक ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपने मन में निर्धन की तरह भाव उत्पन्न कीजिए, फिर देखिए भगवान दौड़े न चले आएं तो। कथा के दौरान गाए गए सुंदर भजनों ने पूरे पंडाल को भक्तिमय बना दिया।