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Sirsa News: दावे किए, सपने दिखाए, पर पांच साल में समस्याएं दूर न कर पाए
Wed, 21 Aug 2024 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 21 Aug 2024 01:05 AM IST
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सिरसा। शहर में पिछले पांच सालों में पांच अति महत्वपूर्ण मुद्दों पर शहर की सरकार के प्रयास पूरी तरह से विफल नजर आए। कई बार प्रयास करने के बाद भी यह योजनाएं सिरे नहीं चढ़ी और आज भी लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।
बेसहारा पशु, सड़कों पर गड्ढे, पार्किंग व्यवस्था और आवारा कुत्तों और रेहड़ी वालों के लिए स्थायी जगह का प्रबंध नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालात यह बन गए है कि शहरवासी पांच साल बाद अब इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद छोड़ चुके हैं। वहीं, कई योजनाएं पांच साल में शुरू भी नहीं हो पाई और मुख्यमंत्री की घोषणाओं में अटक कर ही रह गई।
पांच साल में मात्र 2000 पशु पकड़े
पांच सालों में कई बार बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। नगर परिषद की ओर से पांच सालों में मात्र दो हजार के करीब पशु ही विभिन्न गोशालाओं और नंदीशाला में पहुंचाए गए। लेकिन डेयरी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। परिणाम स्वरूप आज भी सड़कों पर कई बेसहारा पशु देखने को मिलते हैं और हादसों का कारण बनते हैं।
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प्रतिदिन शहर में 30 से 40 लोगों को काट रहे आवारा कुत्ते
पॉश इलाकों में भी आवारा कुत्तों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इनका शिकार बन चुके हैं। कई वर्षों से सेक्टरों से लेकर पाॅश एरिया के लोग अधिकारियों को लिखित में मांगपत्र सौंप चुके हैं। अभी तक प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं कर पाया है। कई बार टेंडर लगाने के बाद भी प्रशासन एजेंसी चयनित नहीं कर पाया। प्रतिदिन शहर में 30 से 40 लोग इनके काटने का शिकार होते हैं।
नहीं मिली जगह, हर चौक पर रेहड़ी वालों ने कर रखा है अतिक्रमण
रेहड़ी वालों को स्थायी जगह देने की प्रक्रिया पांच सालों से चल रही है। इस दिशा में सिवाय खानापूर्ति के प्रशासन ने कुछ नहीं किया। पांच सालों में जगह तक का चयन प्रशासन नहीं कर पाया है। कागजों में स्ट्रीट वेंडिंग जोन की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में ढिलाई के परिणाम है कि शहर में हर फुटपाथ व चौक पर रेहड़ी वालों के कारण अतिक्रमण देखने को मिलता है।
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पार्किंग की नहीं व्यवस्था, सड़कों पर लग रहा जाम
पिछले पांच सालों में शहर ने बहुत विकास किया है। बाजारों से लेकर हिसार रोड, डबवाली रोड सभी जगहों पर बहुमंजिला इमारतें बनी हैं। परंतु पार्किंग की समस्या का समाधान आज तक विभाग नहीं कर पाया है। बिना पार्किंग बन रहे भवनों पर कार्रवाई न होने के कारण बाजारों व मुख्य सड़कों पर वाहनों के कारण जाम लगना आम बात हो गई है। वहीं, मल्टी स्टोरी पार्किंग योजना बनकर रह गई है। छह बार में जमीन के मलबे तक की बोली संबंधित विभाग नहीं करवा पाया है।
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सड़कों पर बने गड्ढे
मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक सड़कों के गड्ढों को भरवाने के आदेश दे चुके हैं। पांच साल में पांच बार बड़े स्तर पर टेंडर लगाकर इन गड्ढों को भरने की खानापूर्ति की गई। बावजूद इसके सड़कों पर गड्ढे खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं और हादसों को न्योता दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम हो या अधिकारियों की बैठक हो इस गड्ढों का हर बार जिक्र होता रहा।
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ये योजनाएं हुईं शुरू
ऑटो मार्केट - ऑटो मार्केट के सौंदर्यीकरण की योजना शुरू हुई। सड़क निर्माण के साथ सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू करवाया गया। इस कारण व्यापारियों ने राहत की सांस ली। वहीं, व्यापारियों की दुकानों को उनके नाम करने की प्रक्रिया भी पुन: शुरू हुई।
मंडी शिफ्टिंग योजना - शहर की महत्वाकांक्षी सब्जी मंडी, अनाज मंडी और लकड़ी मंडी के शिफ्टिंग का कार्य शुरू हो चुका है। पहले फेज में सब्जी मंडी को शिफ्ट करने का कार्य शुरू किया जाएगा और मंडी का निर्माण कार्य बाईपास पर जारी है। वर्ष 2024 के अंत तक पहले फेज का कार्य पूर्ण हो जाएगा।
अमृत योजना - अमृत योजना के पहले फेज में 32 करोड़ का कार्य किया जा चुका है। हिसार रोड और डबवाली रोड पर बरसाती पानी की निकासी की लाइन बिछाई जा चुकी है। जो 90 फीसदी कामयाब साबित हुई है। वहीं, दूसरे फेज को लेकर 35.92 करोड़ की योजना पास हो चुकी है। आचार संहिता के बाद इसका कार्य भी शुरू हो जाएगा।
स्ट्रीट लाइट योजना - शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर आधुनिक स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य शुरू हो चुका है। सांगवान चौक से रानियां रोड पर आधुनिक स्ट्रीट लाइट लग चुकी हैं। जबकि डबवाली रोड और बेगू रोड पर स्ट्रीट लाइट को लेकर करोड़ों रुपये का टेंडर लगाया जा चुका है।
पंजुआना से चतरगढ़पट्टी जलघर योजना - पंजुआना नहर से चतरगढ़पट्टी जलघर को जोड़ने के लिए 20 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट को पूर्ण किया जा चुका है। इस योजना के पूर्ण होने पर अब 50 हजार आबादी को शुद्ध पेयजल की सप्लाई हो पाएगी। जिसकी लंबे समय से मांग उठ रही थी।
इनका योजनाओं का काम धरातल पर नहीं हुआ शुरू
- मेडिकल कॉलेज
- चतरगढ़पट्टी रेलवे फाटक पर पुल बनाने का कार्य
- कंगनपुर रेलवे फाटक पर पुल बनाने का कार्य
- नशा मुक्ति केंद्र बनाना
- कम्युनिटी सेंटर की व्यवस्था
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बेसहारा पशु, सड़कों पर गड्ढे, पार्किंग व्यवस्था और आवारा कुत्तों और रेहड़ी वालों के लिए स्थायी जगह का प्रबंध नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालात यह बन गए है कि शहरवासी पांच साल बाद अब इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद छोड़ चुके हैं। वहीं, कई योजनाएं पांच साल में शुरू भी नहीं हो पाई और मुख्यमंत्री की घोषणाओं में अटक कर ही रह गई।
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पांच साल में मात्र 2000 पशु पकड़े
पांच सालों में कई बार बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। नगर परिषद की ओर से पांच सालों में मात्र दो हजार के करीब पशु ही विभिन्न गोशालाओं और नंदीशाला में पहुंचाए गए। लेकिन डेयरी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। परिणाम स्वरूप आज भी सड़कों पर कई बेसहारा पशु देखने को मिलते हैं और हादसों का कारण बनते हैं।
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प्रतिदिन शहर में 30 से 40 लोगों को काट रहे आवारा कुत्ते
पॉश इलाकों में भी आवारा कुत्तों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इनका शिकार बन चुके हैं। कई वर्षों से सेक्टरों से लेकर पाॅश एरिया के लोग अधिकारियों को लिखित में मांगपत्र सौंप चुके हैं। अभी तक प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं कर पाया है। कई बार टेंडर लगाने के बाद भी प्रशासन एजेंसी चयनित नहीं कर पाया। प्रतिदिन शहर में 30 से 40 लोग इनके काटने का शिकार होते हैं।
नहीं मिली जगह, हर चौक पर रेहड़ी वालों ने कर रखा है अतिक्रमण
रेहड़ी वालों को स्थायी जगह देने की प्रक्रिया पांच सालों से चल रही है। इस दिशा में सिवाय खानापूर्ति के प्रशासन ने कुछ नहीं किया। पांच सालों में जगह तक का चयन प्रशासन नहीं कर पाया है। कागजों में स्ट्रीट वेंडिंग जोन की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में ढिलाई के परिणाम है कि शहर में हर फुटपाथ व चौक पर रेहड़ी वालों के कारण अतिक्रमण देखने को मिलता है।
पार्किंग की नहीं व्यवस्था, सड़कों पर लग रहा जाम
पिछले पांच सालों में शहर ने बहुत विकास किया है। बाजारों से लेकर हिसार रोड, डबवाली रोड सभी जगहों पर बहुमंजिला इमारतें बनी हैं। परंतु पार्किंग की समस्या का समाधान आज तक विभाग नहीं कर पाया है। बिना पार्किंग बन रहे भवनों पर कार्रवाई न होने के कारण बाजारों व मुख्य सड़कों पर वाहनों के कारण जाम लगना आम बात हो गई है। वहीं, मल्टी स्टोरी पार्किंग योजना बनकर रह गई है। छह बार में जमीन के मलबे तक की बोली संबंधित विभाग नहीं करवा पाया है।
सड़कों पर बने गड्ढे
मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक सड़कों के गड्ढों को भरवाने के आदेश दे चुके हैं। पांच साल में पांच बार बड़े स्तर पर टेंडर लगाकर इन गड्ढों को भरने की खानापूर्ति की गई। बावजूद इसके सड़कों पर गड्ढे खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं और हादसों को न्योता दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम हो या अधिकारियों की बैठक हो इस गड्ढों का हर बार जिक्र होता रहा।
ये योजनाएं हुईं शुरू
ऑटो मार्केट - ऑटो मार्केट के सौंदर्यीकरण की योजना शुरू हुई। सड़क निर्माण के साथ सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू करवाया गया। इस कारण व्यापारियों ने राहत की सांस ली। वहीं, व्यापारियों की दुकानों को उनके नाम करने की प्रक्रिया भी पुन: शुरू हुई।
मंडी शिफ्टिंग योजना - शहर की महत्वाकांक्षी सब्जी मंडी, अनाज मंडी और लकड़ी मंडी के शिफ्टिंग का कार्य शुरू हो चुका है। पहले फेज में सब्जी मंडी को शिफ्ट करने का कार्य शुरू किया जाएगा और मंडी का निर्माण कार्य बाईपास पर जारी है। वर्ष 2024 के अंत तक पहले फेज का कार्य पूर्ण हो जाएगा।
अमृत योजना - अमृत योजना के पहले फेज में 32 करोड़ का कार्य किया जा चुका है। हिसार रोड और डबवाली रोड पर बरसाती पानी की निकासी की लाइन बिछाई जा चुकी है। जो 90 फीसदी कामयाब साबित हुई है। वहीं, दूसरे फेज को लेकर 35.92 करोड़ की योजना पास हो चुकी है। आचार संहिता के बाद इसका कार्य भी शुरू हो जाएगा।
स्ट्रीट लाइट योजना - शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर आधुनिक स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य शुरू हो चुका है। सांगवान चौक से रानियां रोड पर आधुनिक स्ट्रीट लाइट लग चुकी हैं। जबकि डबवाली रोड और बेगू रोड पर स्ट्रीट लाइट को लेकर करोड़ों रुपये का टेंडर लगाया जा चुका है।
पंजुआना से चतरगढ़पट्टी जलघर योजना - पंजुआना नहर से चतरगढ़पट्टी जलघर को जोड़ने के लिए 20 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट को पूर्ण किया जा चुका है। इस योजना के पूर्ण होने पर अब 50 हजार आबादी को शुद्ध पेयजल की सप्लाई हो पाएगी। जिसकी लंबे समय से मांग उठ रही थी।
इनका योजनाओं का काम धरातल पर नहीं हुआ शुरू
- मेडिकल कॉलेज
- चतरगढ़पट्टी रेलवे फाटक पर पुल बनाने का कार्य
- कंगनपुर रेलवे फाटक पर पुल बनाने का कार्य
- नशा मुक्ति केंद्र बनाना
- कम्युनिटी सेंटर की व्यवस्था