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Sirsa News: कम पढ़े लिखे युवा हो रहे नशे का शिकार, थकान से बचने के लिए लेते हैं, गोली फिर हो जाते हैं आदी
Sat, 23 Sep 2023 10:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 23 Sep 2023 10:15 PM IST
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एडीजीपी श्रीकांत जाधव की टीम ग्रामीणों की बैठक ले ते हुए।
सिरसाा। एडीजीपी श्रीकांत जाधव की नशा मुक्ति टीम की ओर से जिले के विभिन्न गांवों में जांच व जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। कई गांवों के दौरे के बाद टीम के सामने चौकाने वाली आंकड़े आए हैं। टीम ने 332 लोगों से नशा छोड़ने के आवेदन फार्म भरवाएं हैं। इनमें युवाओं की संख्या 70 से 80 प्रतिशत है। इतना ही नहीं, ये युवा कम पढ़े लिखे और गरीब घरों से हैं। वे सबसे पहले दवा के तौर नशे की गोली लेते हैं, फिर आदी हो जाते हैं। इसके बाद चिट्टे आदि का सेवन शुरू कर देते हैं।
शनिवार को गांव बग्गुवाली में टीम ने शिविर लगाया और युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया। इस दौरान सात युवाओं ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया। प्रवक्ता सज्जन सिंह ने बताया कि सात युवाओं में से दो युवाओं के कुछ जमीन है, जबकि पांच युवाओं के परिजन दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। इनमें से एक युवक ही 12वीं पास है, बाकी ने दसवीं भी नहीं की है। इसी तरह के कुछ हालात गांव भीमा में देखने को मिले। यहां पर टीम चार से पांच दिन रुकी थी। शिविर को 21 बच्चों ने ज्वाइन किया। इनमें दो ही बच्चे जमीन वाले थे, बाकी 19 बच्चे गरीब परिवारों के थे।
उन्होंने बताया कि यह युवा धीरे-धीरे नशे की लत में आते हैं। काम करने के दौरान थकान से बचने के लिए कोई इन्हें गोली दे देता है। इसके बाद नशे का सिलसिला चल पड़ता है। इसके बाद युवा गोलियां, कैप्सूल, चिट्टा और इंजेक्शन तक लगाने लगते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि गांव बग्गुवाली के युवाओं से बातचीत की गई तो पता चला कि सबसे पहले दवा के तौर पर गोली ली थी। इसके बाद वे नशे के आदी हो गए। इसके बाद वे चिट्टा व अन्य नशे की लत में पड़ गए। चिट्टा महंगा आता है तो अब एक माह से इंजेक्शन लगा रहे हैं। अब ये नशा छोड़ना चाहते हैं और कैंप में आए हैं।
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एचएआईवी पॉजीटिव नहीं मिले
प्रवक्ता सज्जन सिंह ने बताया कि जो युवा नशे का इंजेक्शन ले रहे थे। उनमें कोई एचआईवी पॉजीटिव नहीं मिला है। उन्होंने गांव अबूबशहर में नशा पीड़ित की मौत हो गई थी। उसके बाद गांव में पुलिस ने कार्रवाई की और चार से पांच नशा बेचने वालों को पकड़ा। यदि नशा के कारण मौत होने वाले युवा के परिजन पुलिस को बताते हैं कि संबंधित व्यक्ति से नशा लेकर आया तो उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लेती है और कार्रवाई शुरू हो जाती है।
सभी का डाटा तैयार कर रहा प्रशासन
एडीजीपी टीम ने सिरसा के गांव भीमा, फग्गू, थिराज, बाजेका, बेगू, सुचान, कोटली, रगड़ी खेड़ा, नरेल खेड़ा, मौजूखेड़ा, अबुबशहर, सत्ता खेङा, व बग्गु वाली में टीम ने शिविर लगाया है। इस दौरान लोगों से जानकारी प्राप्त कर नशा तस्करों की सूची भी प्रशासन तैयार कर रहा है। इन सभी नशा तस्करों का रिकॉर्ड बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार से दूसरे गांवों के वालंटियर भी जानकारी दे रहे हैं। जिससे यह डाटा तैयार हो रहा है। जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।
अब तक 30 लोग हो चुके हैं नशामुक्त, 17 भीमा गांव के
गांव बग्गुवाली के पंचायत घर में नशा मुक्ति शिविर को शुभारंभ किया गया। टीम प्रभारी गजन सिंह ने बताया उपचार के दौरान टीम लगातार परिजनों के संपर्क में रहेगी, उनके घरवालों की भी काउंसिलिंग करेगी। ड्रग मुक्ति टीम लगातार 10 दिन गांव में शिविर चलाएगी। इस अभियान के तहत 30 लोग पूरी तरह नशा मुक्त हो चुके हैं। इनमें 17 युवा भीमा गांव के हैं। गांव बग्गु वाली में सर्वे के दौरान सामने आया कि 25 व्यक्ति नशे की गिरफ्त में हैं।
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शनिवार को गांव बग्गुवाली में टीम ने शिविर लगाया और युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया। इस दौरान सात युवाओं ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया। प्रवक्ता सज्जन सिंह ने बताया कि सात युवाओं में से दो युवाओं के कुछ जमीन है, जबकि पांच युवाओं के परिजन दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। इनमें से एक युवक ही 12वीं पास है, बाकी ने दसवीं भी नहीं की है। इसी तरह के कुछ हालात गांव भीमा में देखने को मिले। यहां पर टीम चार से पांच दिन रुकी थी। शिविर को 21 बच्चों ने ज्वाइन किया। इनमें दो ही बच्चे जमीन वाले थे, बाकी 19 बच्चे गरीब परिवारों के थे।
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उन्होंने बताया कि यह युवा धीरे-धीरे नशे की लत में आते हैं। काम करने के दौरान थकान से बचने के लिए कोई इन्हें गोली दे देता है। इसके बाद नशे का सिलसिला चल पड़ता है। इसके बाद युवा गोलियां, कैप्सूल, चिट्टा और इंजेक्शन तक लगाने लगते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि गांव बग्गुवाली के युवाओं से बातचीत की गई तो पता चला कि सबसे पहले दवा के तौर पर गोली ली थी। इसके बाद वे नशे के आदी हो गए। इसके बाद वे चिट्टा व अन्य नशे की लत में पड़ गए। चिट्टा महंगा आता है तो अब एक माह से इंजेक्शन लगा रहे हैं। अब ये नशा छोड़ना चाहते हैं और कैंप में आए हैं।
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एचएआईवी पॉजीटिव नहीं मिले
प्रवक्ता सज्जन सिंह ने बताया कि जो युवा नशे का इंजेक्शन ले रहे थे। उनमें कोई एचआईवी पॉजीटिव नहीं मिला है। उन्होंने गांव अबूबशहर में नशा पीड़ित की मौत हो गई थी। उसके बाद गांव में पुलिस ने कार्रवाई की और चार से पांच नशा बेचने वालों को पकड़ा। यदि नशा के कारण मौत होने वाले युवा के परिजन पुलिस को बताते हैं कि संबंधित व्यक्ति से नशा लेकर आया तो उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लेती है और कार्रवाई शुरू हो जाती है।
सभी का डाटा तैयार कर रहा प्रशासन
एडीजीपी टीम ने सिरसा के गांव भीमा, फग्गू, थिराज, बाजेका, बेगू, सुचान, कोटली, रगड़ी खेड़ा, नरेल खेड़ा, मौजूखेड़ा, अबुबशहर, सत्ता खेङा, व बग्गु वाली में टीम ने शिविर लगाया है। इस दौरान लोगों से जानकारी प्राप्त कर नशा तस्करों की सूची भी प्रशासन तैयार कर रहा है। इन सभी नशा तस्करों का रिकॉर्ड बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार से दूसरे गांवों के वालंटियर भी जानकारी दे रहे हैं। जिससे यह डाटा तैयार हो रहा है। जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।
अब तक 30 लोग हो चुके हैं नशामुक्त, 17 भीमा गांव के
गांव बग्गुवाली के पंचायत घर में नशा मुक्ति शिविर को शुभारंभ किया गया। टीम प्रभारी गजन सिंह ने बताया उपचार के दौरान टीम लगातार परिजनों के संपर्क में रहेगी, उनके घरवालों की भी काउंसिलिंग करेगी। ड्रग मुक्ति टीम लगातार 10 दिन गांव में शिविर चलाएगी। इस अभियान के तहत 30 लोग पूरी तरह नशा मुक्त हो चुके हैं। इनमें 17 युवा भीमा गांव के हैं। गांव बग्गु वाली में सर्वे के दौरान सामने आया कि 25 व्यक्ति नशे की गिरफ्त में हैं।