फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   Lack of space in Haddarori to dump animal carcasses, foul smell spreading in villages when dumped in the open

पशुओं के शव डालने के लिए हड्डारोड़ी में जगह की कमी, खुले में डाले जाने पर गांवों में फैल रही दुर्गंध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 11:03 PM IST
विज्ञापन
Lack of space in Haddarori to dump animal carcasses, foul smell spreading in villages when dumped in the open
लंपी से संक्रमित पशु। - फोटो : Sirsa
सिरसा, डबवाली। जिले में लंपी बीमारी के कारण पशुओं की हो रही मौतें बढ़ती जा रही है। जिले में एक दिन में ही मंगलवार को 48 पशुओं की लंबी बीमारी के कारण मौत हो गई। मृतक पशुओं की बढ़ती संख्या से अब गांव की हड्डा रोड़ी तक छोटी पड़ रही है। जबकि अधिकारियों के आदेश है कि मृत पशुओं के शव को 10 फीट गहरे गड्ढे में दफनाया जाना चाहिए। लेकिन ठेकेदार और हड्डा रोड़ी के कारिंदे लंपी बीमारी से मरे पशुओं को खुले में ही डाल रहे हैं। जिस कारण इनके शवों से उठती दुर्गंध लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
विज्ञापन

वहीं खुले में डाले गए पशुओं के शवों को कुत्ते और पक्षी नोंच रहे हैं। कुत्ते संक्रमित पशुओं को अंगों को इधर-उधर फैला रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने मृत पशुओं को दफनाने के लिए धारा 144 के तहत गहरे गड्ढे में दफनाने के नियम लागू किए हैं। इसके बावजूद गांव बिज्जुवाली व गोदिकां की हड्डा रोड़ी में इस समय करीब एक दर्जन पशु खुले में डाले गए हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। पशुओं के शवों को खुले में डालने को लेकर उनकी संबंधित ठेकेदार के साथ बहस भी हो चुकी। क्योंकि मृत पशुओं की चमड़ी उतारने पर प्रशासन ने रोक लगाई हुई है। जिससे उनकी आमदनी बंद हो गई है। ऐसे में वो इन पशुओं के शवों को खुले में डालकर चले जाते हैं। वहीं मृत पशुओं को दफनाने में न तो गोशाला संचालक और न ही ग्रामीण आर्थिक मदद कर रहे हैं। जिसकी वजह से प्रशासन के नियम भी ताक पर धरे रह गए हैं। क्योंकि 10 फीट गहरा गड्ढा करने के लिए जेसीबी या फिर मजदूर लगाने पड़ते हैं। जिस पर करीब 1 हजार रुपये या इससे अधिक खर्च आता है।
विज्ञापन

दफनाने के बाद न तो चमड़ी काम की और न ही हड्डियां
डबवाली के ठेकेदार चंदन ने बताया की गोशाला की तरफ से हमें मृत पशुओं को उठाने का ठेका दिया हुआ है। इन्हीं मृत पशुओं से उनकी आमदनी होती है। लेकिन अब जिला प्रशासन ने शवों की चमड़ी उतारने पर रोक लगा दी है। मृत पशु को दफनाने के नियम से उनकी कमाई बंद हो गई है। ऐसे में उन्होंने ग्रामीणों के साथ-साथ गोशाला प्रबंधकों से प्रति पशु एक हजार रुपये देने की मांग रखी थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। मृत पशुओं के शरीर के निष्पादन हम अपने स्तर पर करने में असमर्थ हैं। इस बात को लेकर हमारी ग्रामीणों के साथ बहस भी हुई थी और उस दौरान हमने हमारी समस्या उनके सामने रखी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

बढ़ रहा पशुओं के मरने तथा संक्रमित होने का आंकड़ा
जिले में अब तक 6214 पशु संक्रमित हो चुके हैं जिनमें से 217 पशुओं की मौत हो चुकी है। वहीं 4518 पशु रिकवरी के बाद स्वस्थ हुए हैं। इसके अलावा 1696 पशु अभी भी संक्रमित है। मंगलवार को एक ही दिन में 48 पशुओं की मौत हुई है जो अब तक हुई मौतों में सबसे अधिक है। वहीं मंगलवार को एक ही दिन में लंपी पॉक्स के 420 नए मामले सामने आए हैं।
36 भैंस लंपी से संक्रमित, अभी तक नहीं हुई किसी की मौत
जिले में गाय तथा नंदी के पश्चात यह संक्रमण भैंसों में भी पाया गया है। 1696 पशुओं में 36 भैंस संक्रमित मिली है। हालांकि अभी उन संक्रमित भैंस से किसी के मरने का मामला सामने नहीं आया है इसके अलावा अन्य पशु भी अभी तक इस बीमारी से सुरक्षित हैं।
मृत पशुओं की तादाद बढ़ी तो जगह की बनेगी समस्या
मरने के बाद पशुओं के शवों को दफनाने में जगह की अधिक आवश्यकता होती है। बहुत से गांव व शहर में हड्डा रोड़ी के लिए जगह का अभाव है ऐसे में अगर संक्रमित पशुओं की तादाद अधिक बढ़ने लगी तो जगह की काफी समस्या उत्पन्न होगी। वहीं अभी तक जिला प्रशासन ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है।

सभी गोशालाओं व गांव स्तर पर प्रचार प्रसार के माध्यम से पशुओं को दफनाने संबंधित सूचना पहुंचा दी गई थी। विभाग की टीम भी हर गांव में जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। इसके बावजूद भी कोई यह कहे कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं तो सब झूठ है। वैक्सीन के जल्द पहुंचने की संभावना है। जैसे ही वैक्सीन आती है तो वैक्सीनेशन का कार्य तेज कर दिया जाएगा। कालांवाली क्षेत्र में मंगलवार को फॉगिंग करवाई जा चुकी है।
-डॉ. विद्यासागर बांसल, उप निदेशक पशुपालन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed