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विकास के जज्बे ने कबड्डी खिलाड़ी को बना दिया चौधरी
ब्यूरो/अमर उजाला/सिरसा
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:34 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी परमिंद्र सिंह जुगनू गांव डबवाली के नए चौधरी हैं। सरकार के रवैये से परेशान होकर यह खिलाड़ी अपना कनाडा वीजा रद्द करवाकर चुनावी मैदान में कबड्डी खेलने उतरा था।
जुगनू ने कहा कि उसकी चुनाव लड़ने की मंशा नहीं थी। लेकिन सरकार की उपेक्षाओं ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। जुगनू ने बताया कि करीब छह माह पहले उसने सीएम मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर गांव में स्टेडियम तथा जिम स्थापित करवाकर कोच नियुक्त करने की मांग की थी।
जिससे कि होनहार बच्चे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकें। लेकिन सरकार ने पत्र का जवाब नहीं दिया। ऐसे में जुगनू ने सरपंच बनने की ठानी। हालांकि उसी बीच उसे कबड्डी खेलने के लिए उसने कनाडा जाना था। उसने बताया कि उसके इस फैसले में ग्रामीणों ने उसका सहयोग दिया। जैसे ही जीत पर मुहर लगी तो ग्रामीणों ने इसे कंधों पर उठा लिया। बारहवीं पास जुगनू कबड्डी का मंजा हुआ खिलाड़ी है।
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विदेश क्लबों के काउंटी मैच खेलता है जुगनू
वह विदेशी क्लबों के लिए काऊंटी मैच खेलता है। क्लब रिचडम के लिए कबड्डी सर्कल स्टाइल खेलते हुए सिंगापुर, इंग्लैंड में देश का नाम रोशन कर चुका है। यहीं नहीं हैंडबॉल में भी उसका कोई सानी नहीं। हैंडबॉल में नेशनल लेवल पर खेलते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुका है।
क्या कहना है जुगनू का
कबड्डी खिलाड़ी जुगनू ने कहा कि शहर से सटा होने के बावजूद गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। मजदूरों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा। जरूरतमंद 100-100 गज प्लाट के लिए सरकारी कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं। गांव की कई गलियां आज भी कच्ची हैं। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाना सबसे बड़ा उद्देश्य है।
युवाओं के लिए करेंगे काम
सही मायने में युवा पीढ़ी को बचाने के लिए जुगनू सरपंची की दौड़ में शामिल हुआ था। युवाओं के लिए ही उसने सरकार को पत्र लिखा था। जुगनू का मानना है कि नशे की गर्त में डूबी युवा पीढ़ी को खेल ही बचा सकते हैं। ऐसा तभी संभव है, जब सरकार ग्रामीण आंचल में खेल सुविधाएं मुहैया करवाए।
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जुगनू ने कहा कि उसकी चुनाव लड़ने की मंशा नहीं थी। लेकिन सरकार की उपेक्षाओं ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। जुगनू ने बताया कि करीब छह माह पहले उसने सीएम मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर गांव में स्टेडियम तथा जिम स्थापित करवाकर कोच नियुक्त करने की मांग की थी।
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जिससे कि होनहार बच्चे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकें। लेकिन सरकार ने पत्र का जवाब नहीं दिया। ऐसे में जुगनू ने सरपंच बनने की ठानी। हालांकि उसी बीच उसे कबड्डी खेलने के लिए उसने कनाडा जाना था। उसने बताया कि उसके इस फैसले में ग्रामीणों ने उसका सहयोग दिया। जैसे ही जीत पर मुहर लगी तो ग्रामीणों ने इसे कंधों पर उठा लिया। बारहवीं पास जुगनू कबड्डी का मंजा हुआ खिलाड़ी है।
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विदेश क्लबों के काउंटी मैच खेलता है जुगनू
वह विदेशी क्लबों के लिए काऊंटी मैच खेलता है। क्लब रिचडम के लिए कबड्डी सर्कल स्टाइल खेलते हुए सिंगापुर, इंग्लैंड में देश का नाम रोशन कर चुका है। यहीं नहीं हैंडबॉल में भी उसका कोई सानी नहीं। हैंडबॉल में नेशनल लेवल पर खेलते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुका है।
क्या कहना है जुगनू का
कबड्डी खिलाड़ी जुगनू ने कहा कि शहर से सटा होने के बावजूद गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। मजदूरों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा। जरूरतमंद 100-100 गज प्लाट के लिए सरकारी कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं। गांव की कई गलियां आज भी कच्ची हैं। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाना सबसे बड़ा उद्देश्य है।
युवाओं के लिए करेंगे काम
सही मायने में युवा पीढ़ी को बचाने के लिए जुगनू सरपंची की दौड़ में शामिल हुआ था। युवाओं के लिए ही उसने सरकार को पत्र लिखा था। जुगनू का मानना है कि नशे की गर्त में डूबी युवा पीढ़ी को खेल ही बचा सकते हैं। ऐसा तभी संभव है, जब सरकार ग्रामीण आंचल में खेल सुविधाएं मुहैया करवाए।