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Sirsa News: मानसून की बेरुखी, धान में आया झंडा, किसानों को दोबारा करनी पड़ रही रोपाई
Sun, 21 Jul 2024 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 21 Jul 2024 01:43 AM IST
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गांव महमदपुर में धान की फसल खराब होने पर खेत में ट्रैक्टर चलाता किसान। संवाद
सिरसा। इन दिनों सावन में मानसून रुठा हुआ लग रहा है। इस कारण खेतों में धान सूखने लगा है। धान की फसल में झंडा रोग आ गया है और करीब 20 गांवों के लोगों ने तो सूखी धान की पौध को उखाड़कर नए सिरे से रोपाई शुरू करवाई है।
जुलाई में मात्र एक बार ही अच्छी बारिश हुई है। जिले में इंद्रदेव की बेरुखी, जहां किसानों पर भारी पड़ रही है, वहीं झंडा रोग ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। घग्गर नदी के साथ लगते करीब 20 गांवों में इसका काफी असर हुआ है। गांव महमदपुर, टीटूखेड़ा, मीरपुर सहित करीब 1 हजार एकड़ का रकबा प्रभावित हुआ है। यहां पर किसानों को एक बार फिर से अपनी धान की फसल की रोपाई करनी पड़ी है। महमदपुर के किसान देवीदत्त, सोमनाथ, गुलबहार आदि ने बताया कि गर्मी के कारण खेत में गर्माहट अधिक हो गई है। पानी तप रहा है और धान की फसल झंडा रोग की शिकार हो गई। पहले धान की रोपाई के लिए प्रति एकड़ 20 हजार रुपये का नुकसान हुआ था और दोबारा रोपाई पर भी यही खर्च आया है।
10 प्रतिशत से ज्यादा फसल प्रभावित
कृषि विभाग की मानें तो इस रोग से अब तक 10 प्रतिशत से ऊपर फसल प्रभावित हो चुकी है। इसके मूल में तापमान के बढ़ने के साथ उमस भरी गर्मी व बारिश का नहीं होना है। किसान आए दिन रोग से निदान पाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर पहुंच रहे हैं।
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इस बार गर्मी अधिक पड़ी है, जिस कारण धान की फसल को नुकसान हुआ है। धान की फसल में झंडा रोग आ गया है, हालांकि नुकसान अधिक नहीं है। किसानों को इससे बचने के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं। - डॉ. सुखदेव कंबोज, उपनिदेशक कृषि विभाग, सिरसा।
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जुलाई में मात्र एक बार ही अच्छी बारिश हुई है। जिले में इंद्रदेव की बेरुखी, जहां किसानों पर भारी पड़ रही है, वहीं झंडा रोग ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। घग्गर नदी के साथ लगते करीब 20 गांवों में इसका काफी असर हुआ है। गांव महमदपुर, टीटूखेड़ा, मीरपुर सहित करीब 1 हजार एकड़ का रकबा प्रभावित हुआ है। यहां पर किसानों को एक बार फिर से अपनी धान की फसल की रोपाई करनी पड़ी है। महमदपुर के किसान देवीदत्त, सोमनाथ, गुलबहार आदि ने बताया कि गर्मी के कारण खेत में गर्माहट अधिक हो गई है। पानी तप रहा है और धान की फसल झंडा रोग की शिकार हो गई। पहले धान की रोपाई के लिए प्रति एकड़ 20 हजार रुपये का नुकसान हुआ था और दोबारा रोपाई पर भी यही खर्च आया है।
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10 प्रतिशत से ज्यादा फसल प्रभावित
कृषि विभाग की मानें तो इस रोग से अब तक 10 प्रतिशत से ऊपर फसल प्रभावित हो चुकी है। इसके मूल में तापमान के बढ़ने के साथ उमस भरी गर्मी व बारिश का नहीं होना है। किसान आए दिन रोग से निदान पाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर पहुंच रहे हैं।
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इस बार गर्मी अधिक पड़ी है, जिस कारण धान की फसल को नुकसान हुआ है। धान की फसल में झंडा रोग आ गया है, हालांकि नुकसान अधिक नहीं है। किसानों को इससे बचने के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं। - डॉ. सुखदेव कंबोज, उपनिदेशक कृषि विभाग, सिरसा।